Makar Sankranti 2024: धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति तिथि पर गंगा स्नान कर पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होती है। साथ ही सुख-समृद्धि और आय में वृद्धि होती है। इसके अलावा जन्म जन्मांतर में किए गए सारे पापों से मुक्ति मिलती है। अगर आप भी भगवान भास्कर की कृपा के भागी बनना चाहते हैं तो आज स्नान-ध्यान कर सूर्य देव की उपासना करें।
15 जनवरी को होगी संक्रांति, जानिए वजह(Makar Sankranti 2024)
ज्योतिषियों और पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाएगा. इस दिन सूर्य देव सुबह 02:54 बजे धनु राशि(Makar Sankranti 2024) से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस अवसर पर शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेगा.
मकर संक्रांति पुण्यकाल- सुबह 07:15 बजे से शाम 06:21 बजे तक
मकर संक्रांति महा पुण्यकाल- प्रातः 07:15 बजे से प्रातः 09:06 बजे तक
मकर संक्रांति पर किस भगवान की पूजा करनी चाहिए?
यह त्यौहार भगवान सूर्य की आराधना के लिए मनाया जाता है। मकर संक्रांति का त्यौहार पूरे देश में अलग-अलग शहरों में अलग-अलग नामों से अपने-अपने अद्भुत रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन(Makar Sankranti 2024) करते हुए मनाया जाता है। महाराष्ट्र- महाराष्ट्र में लोग तिलगुड़ी तिल के लड्डू बनाते हैं और दोस्तों और परिवार के साथ बांटते हैं.
भगवान सूर्य को प्रसन्न करने के मंत्र
– ॐ सूर्याय नम:
– ॐ घृणि सूर्याय नम:
– ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
– ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ
– ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य:
– ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा
– ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:
– नमामि देवदेवशं भूतभावनमव्ययम्। दिवाकरं रविं भानुं मार्तण्डं भास्करं भगम्।।
– इन्द्रं विष्णुं हरिं हंसमर्कं लोकगुरुं विभुम्। त्रिनेत्रं त्र्यक्षरं त्र्यङ्गं त्रिमूर्तिं त्रिगतिं शुभम्।।
शनिदेव को प्रसन्न करने मंत्र
– ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
– ॐ शं शनैश्चराय नमः।
– शनि महामंत्र ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
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शनिदेव का पौराणिक मंत्र
– ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
– छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।
– ऊँ शन्नोदेवीर-भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।(Makar Sankranti 2024)
ऐसे करें मंत्रों का जाप
– मकर संक्रांति के दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें।
– इसके बाद सूर्य देव की तस्वीर स्थापित करें और उनके सामने बैठें।
– सूर्य देव की विधि-विधान से पूजा करें।
– कुमकुम, लाल फूल, लाल वस्त्र आदि चढ़ाएं।
– इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाएं.
– यह दीपक तब तक जलता रहना चाहिए जब तक मंत्र जाप पूरा न हो जाए।
– मंत्र जाप की शुरुआत लाल चंदन की माला से करें।
– कम से कम 5 माला जप अवश्य करें।
– शनिदेव के मंत्र का जाप करते समय भी यही प्रक्रिया करनी होती है।
– बस शनिदेव को नीले फूल और नीले वस्त्र अर्पित करें।
– मंत्र जप के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें।












