पॉपुलर सिंगर जैस्मिन संदलास की हाल ही में अहमदाबाद में हुई परफॉर्मेंस ने एक नई बहस को जन्म दिया है। "गुलाबी पग" जैसी हिट गानों के लिए जानी जाने वाली जैस्मिन ने 19 अप्रैल को "शरारत" गाने पर धमाकेदार परफॉर्मेंस दी, लेकिन इस शो को लेकर सोशल मीडिया पर विवा...

पॉपुलर सिंगर जैस्मिन संदलास की हाल ही में अहमदाबाद में हुई परफॉर्मेंस ने एक नई बहस को जन्म दिया है। "गुलाबी पग" जैसी हिट गानों के लिए जानी जाने वाली जैस्मिन ने 19 अप्रैल को "शरारत" गाने पर धमाकेदार परफॉर्मेंस दी, लेकिन इस शो को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद उठ गया। सिंगर ने इस दौरान पारंपरिक लहंगा चोली पहन रखा था, लेकिन जब उन्होंने परफॉर्मेंस के दौरान पानी फेंका तो कुछ दर्शकों को इस हरकत से आपत्ति हुई।
परफॉर्मेंस के दौरान माइक्रोफोन को नीचे करते हुए जैस्मिन की आवाज़ ने एक सवाल खड़ा किया – क्या वह लाइव गा रही थीं या यह सब लिप-सिंक था? वीडियो में साफ देखा गया कि सिंगर की आवाज़ बिना किसी रुकावट के पूरी परफेक्ट पिच पर जारी थी, जबकि माइक्रोफोन नीचे था। इससे सोशल मीडिया पर एक हलचल मच गई, और अब लोग इस बात को लेकर बहस कर रहे हैं कि आजकल के लाइव शो में कौन-सी मानक एथिक्स लागू होनी चाहिए।
यह विवाद तब गहरा हुआ जब जैस्मिन के परफॉर्मेंस के थियेट्रिकल तत्व और म्यूज़िकल तत्व एक साथ मिल गए। दर्शकों की उम्मीदें शायद कुछ और थीं, वे सोच रहे थे कि यह एक रॉकस्टार की तरह बगावत वाला दृश्य होगा, जिसमें पानी फेंका जाएगा। लेकिन कैमरा से जब इसे देखा गया, तो यह साउंड और मूवमेंट का मेल ठीक नहीं बैठा। यह सिखाता है कि लाइव कंसर्ट परफॉर्मेंस के लिए एक नई परिभाषा की ज़रूरत है, जहां दर्शक केवल गाने ही नहीं, बल्कि पूरे अनुभव की तलाश करते हैं।
स्मार्टफोन कैमरा से इस परफॉर्मेंस को देखकर कुछ दर्शकों ने इसे "फेक परफॉर्मेंस" करार दिया। सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ी कि लोग लाइव कंसर्ट में वोकल ऑथेंटिसिटी की उम्मीद रखते हैं, जिसमें कुछ गलती भी हो, लेकिन वे एक स्टूडियो-स्टाइल परफॉर्मेंस नहीं चाहते। वे चाहते हैं कि कलाकारों के लाइव शो में उनकी वोकल्स की प्राकृतिक गड़बड़ी भी सुनने को मिले, क्योंकि ये "मानवता" का हिस्सा हैं।
jasmine sandlas concert entry fee - 10k jasmine sandlas concert exit fee - 25k pic.twitter.com/UZo1mqzRp5
— desi sigma (@desisigma) April 20, 2026
हालांकि, शो के करीब बैठने वाले दर्शकों का अनुभव कुछ और था। उन्होंने परफॉर्मेंस को सिर्फ एक ऑनलाइन वीडियो के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे एक इमोशनल अनुभव के रूप में महसूस किया। जैस्मिन के "शरारत" हुक स्टेप और ऊर्जावान स्टेज एक्शंस ने उस माहौल को जीवित रखा, जो दर्शकों ने टिकट खरीदकर अनुभव करने के लिए चाहा था। इन दर्शकों का कहना था कि इस तरह के कंसर्ट अब केवल म्यूज़िक तक सीमित नहीं रहते, बल्कि एक सेंसरियल अनुभव बन गए हैं, जिसमें वीआर जैसी फीलिंग होती है।
यह घटना एक गहरी दरार को उजागर करती है, जो अब संगीत इंडस्ट्री में बढ़ रही है। एक पक्ष का कहना है कि लाइव परफॉर्मेंस में वोकल परफेक्शन सबसे महत्वपूर्ण है, जबकि दूसरा पक्ष मानता है कि कलाकारों का ऊर्जा और हंसी मजाक ही वो चीज़ है जो दर्शकों को आकर्षित करती है। जहां लिप-सिंक का विवाद अपने चरम पर पहुंचा है, वहीं जो लोग शो को स्थल पर देख चुके हैं, उनका मानना है कि यह परफॉर्मेंस ही सबसे महत्वपूर्ण तत्व था।
जैस्मिन संदलास की अहमदाबाद परफॉर्मेंस ने एक नई बहस को जन्म दिया है, जहां लाइव सिंगिंग और लाइव परफॉर्मेंस के बीच की रेखा अब धुंधली हो गई है। क्या लाइव शो में केवल वोकल्स की परफेक्शन चाहिए, या फिर ऊर्जावान और इंटरएक्टिव परफॉर्मेंस भी उतनी ही महत्वपूर्ण होनी चाहिए? यह सवाल अब दर्शकों के बीच और म्यूजिक इंडस्ट्री में गर्म बहस का कारण बन चुका है।