नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हाल ही में संकेत दिया है कि पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) का अनुपात 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 21 प्रतिशत किया जा सकता है। यह बढ़ोतरी वाहनों की अनुकूलता सीमाओं और मौजूदा नियामक मानकों के अनुरूप होगी। यह कदम कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करने और जैव ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने की भारत की रणनीति का हिस्सा है।
सरकार ने क्या कहा?
एक सवाल के जवाब में भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी ने कहा कि सरकार जैव ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) एथेनॉल ब्लेंडिंग में ±1 प्रतिशत की छूट (tolerance) देता है, जिससे इस अनुपात को 21 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि E20 (20% एथेनॉल मिश्रण) पहले ही लागू किया जा चुका है, और निर्धारित सीमाओं के भीतर थोड़ी बढ़ोतरी संभव है।
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के क्या फायदे हुए हैं?
- एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम से अब तक काफी आर्थिक लाभ हुए हैं।
- सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस पहल से सालाना लगभग 45 मिलियन बैरल कच्चे तेल की बचत हुई है। इसके अलावा, लगभग ₹1.65 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा की भी बचत हुई है।
क्या ज़्यादा एथेनॉल ब्लेंडिंग सभी वाहनों के लिए उपयुक्त है?
विशेषज्ञों के अनुसार, ज़्यादा एथेनॉल मिश्रण सभी वाहनों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है। अप्रैल 2023 के बाद निर्मित वाहन E20-अनुरूप (compliant) हैं। हालांकि, पुराने वाहनों को ऐसे मिश्रणों के उपयोग के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि ऐसी बढ़ोतरी लागू करने से पहले, इंजनों को विशेष रूप से ज़्यादा एथेनॉल मिश्रणों के अनुकूल बनाने के लिए डिज़ाइन करना ज़रूरी है।
क्या एथेनॉल उद्योग इस बदलाव के पक्ष में है?
एथेनॉल उद्योग इस ब्लेंडिंग सीमा को बढ़ाने की वकालत कर रहा है, क्योंकि उसके पास अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मौजूद है।
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने हाल ही में कहा कि इस मामले पर फैसला अगले एथेनॉल आपूर्ति वर्ष शुरू होने से पहले लिया जा सकता है, जो नवंबर में शुरू होता है।
क्या सरकार ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए कोई समिति गठित की है? सरकार ने इस दिशा में एक रोडमैप तैयार करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी पैनल बनाया है, जिसमें पेट्रोलियम, खाद्य, भारी उद्योग और सड़क परिवहन मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल हैं।

फ्लेक्स-फ्यूल वाहन क्या हैं और इनका क्या महत्व है?
हनीफ़ कुरैशी ने फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) की क्षमता पर भी ज़ोर दिया। ये वाहन 85 प्रतिशत तक इथेनॉल मिले पेट्रोल पर चल सकते हैं। उन्होंने बताया कि अभी ऐसे दोपहिया और चारपहिया वाहन विकसित किए जा रहे हैं, जो कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को और कम कर सकते हैं।
E20 क्या है, और यह कैसे काम करता है?
E20 में 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। इथेनॉल गन्ने और मक्के जैसी फसलों से बनाया जाता है। इसकी ऑक्टेन रेटिंग बहुत ज़्यादा (लगभग 95 RON) होती है, जिससे इंजन का दहन बेहतर और ज़्यादा सुचारू होता है। बता दें कि 1 अप्रैल 2025 से पेट्रोल पंपों पर 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिला पेट्रोल उपलब्ध कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
वाहनों पर E20 का क्या असर होता है?
- E20 का असर वाहन के प्रकार पर निर्भर करता है।
- नए वाहन इसे आसानी से संभाल सकते हैं। हालांकि, पुराने वाहनों के माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है और लंबे समय में इंजन के कुछ पुर्ज़ों पर असर पड़ सकता है।
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E20 और E10 में क्या अंतर है?
E10 (10 प्रतिशत इथेनॉल) की तुलना में E20 बेहतर दहन और ज़्यादा ऑक्टेन रेटिंग देता है। हालांकि, ऊर्जा दक्षता में थोड़ा अंतर हो सकता है।
क्या इथेनॉल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है?
चूँकि इथेनॉल पौधों से मिलने वाला ईंधन है, इसलिए यह ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसके पर्यावरणीय लाभ इस्तेमाल की गई खास उत्पादन प्रक्रिया पर निर्भर करते हैं। कुल मिलाकर, इस बदलाव में बहुत ज़्यादा क्षमता है। हालांकि, वाहन की अनुकूलता और दक्षता जैसी चुनौतियों के कारण इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।

















