हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में सेब की खेती एक नए बदलाव की ओर बढ़ रही है। रिटायर्ड आर्मी अधिकारी कर्नल दिव्य ठाकुर ने सेना से सेवा निवृत्ति के बाद ऑर्गेनिक एप्पल फार्मिंग को अपना मिशन बनाया है। हाई-डेंसिटी सेब बागान के जरिए वह टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे किसानों और उपभोक्ताओं—दोनों का भरोसा दोबारा मजबूत हो सके।
‘ऑर्गेनिक’ शब्द पर भरोसे का संकट
आज बाजार में ऑर्गेनिक लेबल का गलत इस्तेमाल एक बड़ी समस्या बन चुका है। कर्नल ठाकुर का मानना है कि बिना मानकों के ऑर्गेनिक कहकर फसल बेचना उपभोक्ताओं के साथ धोखा है। इसी वजह से उन्होंने सख्त सरकारी नियमों के तहत ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया अपनाई, ताकि सेब पूरी तरह केमिकल-फ्री और पारदर्शी तरीके से उगाए जा सकें।
हाई-डेंसिटी सेब बागान से बेहतर उत्पादन

हाई-डेंसिटी एप्पल फार्मिंग मॉडल में कम जगह पर अधिक पौधे लगाए जाते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ता है और किसान को जल्दी फसल मिलती है। ड्रिप इरिगेशन, जैविक खाद और नीम आधारित कीट नियंत्रण जैसी तकनीकों के जरिए यह खेती लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण बन रही है।
किसानों और उपभोक्ताओं को जोड़ने की कोशिश
कर्नल दिव्य ठाकुर अब डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) मॉडल के जरिए सेब सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने पर काम कर रहे हैं। इससे न सिर्फ किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे, बल्कि उपभोक्ताओं को भी असली ऑर्गेनिक सेब मिलने का भरोसा मिलेगा। उनकी यह पहल हिमाचल में ऑर्गेनिक सेब खेती के लिए एक नई दिशा तय कर रही है।







