भारत में किसान पारंपरिक फसलों की जगह अब कैश क्रॉप्स की तरफ ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं। इस सीरीज़ में हम आपको रजनीगंधा की फसल के बारे में बताएंगे। मैदानी इलाकों में रजनीगंधा लगाने का सबसे अच्छा समय फरवरी और मार्च के बीच होता है। रजनीगंधा के फूलों की शादी और धार्मिक समारोहों के साथ-साथ तेल और परफ्यूम बनाने वाली इंडस्ट्री में भी बहुत ज़्यादा डिमांड है।
खेत की तैयारी कैसे करें?
रजनीगंधा की खेती से पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करना ज़रूरी है ताकि बल्ब आसानी से बढ़ सकें। रजनीगंधा की अच्छी फसल के लिए धूप बहुत ज़रूरी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, 6.5 से 7.5 pH वाली दोमट मिट्टी रजनीगंधा की खेती के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। खेत तैयार करते समय, मिट्टी को 30 cm गहरा खोदें। इसके बाद, प्रति हेक्टेयर 500 क्विंटल गोबर की खाद डालकर मिट्टी तैयार करें। ,बहुत भारी या चिकनी मिट्टी से बचें कार्बनिक पदार्थों से भरपूर मिट्टी में फूलों की खुशबू और आकार बेहतर होता है

गहरी जुताई करें
सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं
खरपतवार नियंत्रण
खेत तैयार करते समय सभी जंगली घास और खरपतवार हटा दें, ताकि फसल की शुरुआती बढ़वार पर असर न पड़े।
रजनीगंधा लगाने की सही विधि
रजनीगंधा की अच्छी पैदावार और उच्च गुणवत्ता वाले फूल पाने के लिए सही समय, स्वस्थ बल्ब और उचित रोपाई विधि का पालन करना बेहद ज़रूरी है। सही तरीके से लगाए गए बल्ब जल्दी अंकुरित होते हैं और लंबे समय तक फूल देते हैं।
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क्यारियों की तैयारी
पहले से तैयार उठी हुई क्यारियों में रोपाई करें, जिससे जल निकास अच्छा रहे। -
रोपाई की दूरकतार से कतार की दूरी: 30–45 cm,पौधे से पौधे की दूरी: 20–25 cmबल्ब लगाने की गहराई
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बल्ब को मिट्टी में 5–7 cm गहराई पर इस तरह लगाएं कि नुकीला सिरा ऊपर की ओर रहे। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे रजनीगंधा को पंक्तियों में लगाएं, जिसमें एक पंक्ति से दूसरी पंक्ति की दूरी 30 से 40 cm और एक कंद से दूसरे कंद की दूरी 15 से 20 cm हो। प्रति एकड़ लगभग 40,000 से 50,000 कंद लगाए जाते हैं। पौधे लगाने की गहराई पर खास ध्यान देना चाहिए। कंदों को 5 से 7 cm की गहराई पर लगाना चाहिए। इससे ज़्यादा गहराई पर लगाने से बीज के अंकुरण में समस्या हो सकती है।
सिंचाई कब और कितनी करें?
रजनीगंधा की फसल में सही समय पर और सही मात्रा में सिंचाई करने से पौधे मजबूत बनते हैं, फूलों की लंबाई बढ़ती है और उत्पादन में साफ़ बढ़ोतरी होती है। ज़्यादा या कम पानी, दोनों ही फसल को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
फसल को पोषण देने के लिए, प्रति हेक्टेयर 200 किलो नाइट्रोजन, 75 किलो फास्फोरस और 125 किलो पोटाश की ज़रूरत होती है। सावधानी से सिंचाई करना ज़रूरी है। कंद लगाते समय खेत में नमी होनी चाहिए, लेकिन लगाने के तुरंत बाद सिंचाई नहीं करनी चाहिए। पहली सिंचाई तब करनी चाहिए जब कंद में जड़ें और पत्तियां निकलने लगें। अंकुरण के बाद दो महीने तक मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखना लगातार फूल आने के लिए बहुत ज़रूरी है। गर्मियों में, हफ्ते में दो बार या ज़रूरत के हिसाब से पानी दें।

रजनीगंधा की खेती में खाद और उर्वरक योजना
रजनीगंधा से अधिक फूल, लंबे डंठल और बेहतर खुशबू पाने के लिए संतुलित खाद व उर्वरक योजना बहुत ज़रूरी होती है। सही समय पर सही मात्रा में पोषक तत्व देने से उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ते हैं
खेत की आख़िरी जुताई के समय प्रति एकड़ सड़ी हुई गोबर की खाद ,8–10 टन
या वर्मी कम्पोस्ट: 3–4 टन
इससे मिट्टी की उर्वरता, जल धारण क्षमता और जड़ों की मजबूती बढ़ती है।
रजनीगंधा से संभावित उत्पादन और मुनाफा
पौधे लगाने के लगभग 80 से 95 दिनों के बाद फूल आने लगते हैं। फूलों को सुबह और शाम को तब तोड़ा जाता है जब वे पूरी तरह से खिल जाते हैं। अगर सही तरीके से खेती की जाए, तो किसान प्रति हेक्टेयर 100 से 140 क्विंटल ताज़े फूल और 150 से 180 क्विंटल कंद पैदा कर सकते हैं।
यह समय मिट्टी की गुणवत्ता, मौसम और खाद-उर्वरक प्रबंधन पर निर्भर करता है। सही देखभाल करने पर एक ही खेत से कई महीनों तक फूलों की अच्छी पैदावार ली जा सकती है। इस अवधि में यदि सिंचाई, खाद और खरपतवार नियंत्रण सही तरीके से किया जाए, तो फूलों की लंबाई, खुशबू और गुणवत्ता काफी बेहतर मिलती है। पहली फ्लश के बाद नियमित अंतराल पर लगातार फूल निकलते रहते हैं।
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