Payal Gaming के नाम से वायरल 19 मिनट के वीडियो को महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने डीपफेक बताया। जानें पायल धारे का बयान, जांच, कानूनी सजा और ऑनलाइन स्कैम से बचाव।

सोशल मीडिया पर किसी महिला की पहचान के साथ एक कथित प्राइवेट वीडियो जोड़ देना कितना आसान हो गया है, इसका दर्दनाक उदाहरण Payal Gaming की वायरल वीडियो कंट्रोवर्सी है। दिसंबर 2025 में इंटरनेट पर 19 मिनट के एक कथित वीडियो को मशहूर गेमर और यूट्यूबर पायल धारे (Payal Dhare) से जोड़कर वायरल किया गया। देखते ही देखते यह मामला Telegram, Instagram, WhatsApp और X जैसे प्लेटफॉर्म पर चर्चा का विषय बन गया।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महाराष्ट्र साइबर पुलिस की फॉरेंसिक जांच में संबंधित वीडियो को AI से बनाया गया डीपफेक बताया गया। खुद पायल धारे ने भी साफ कर दिया था कि वीडियो में दिखाई देने वाली महिला वह नहीं हैं।
अब जून 2026 में OTT रियलिटी शो The Alliance में इस घटना को याद करते हुए पायल भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि इस घटना ने उन्हें मानसिक रूप से कितना प्रभावित किया। आइए जानते हैं Payal Gaming वायरल वीडियो का पूरा सच, पुलिस जांच और इस विवाद से जुड़ी हर जरूरी जानकारी।
इस विवाद की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई, जब सोशल मीडिया पर एक कथित प्राइवेट वीडियो तेजी से शेयर किया जाने लगा। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने बिना किसी प्रमाण के वीडियो में दिखाई देने वाली महिला को Payal Gaming बताना शुरू कर दिया।
पायल धारे भारत की जानी-मानी गेमिंग क्रिएटर हैं। उनकी लोकप्रियता और सोशल मीडिया पर बड़ी फैन फॉलोइंग के कारण यह दावा तेजी से फैल गया।
कई लोगों ने वीडियो की सच्चाई जाने बिना उसे आगे शेयर करना शुरू कर दिया। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि वीडियो की कॉपी पाने के लिए लोगों से हजारों रुपये तक मांगे जा रहे थे।
हालांकि, इस पूरे विवाद में सबसे जरूरी सवाल यह था कि क्या वीडियो में दिखाई देने वाली महिला वास्तव में पायल धारे हैं?
इसका जवाब पायल ने खुद दिया और बाद में महाराष्ट्र साइबर पुलिस की जांच ने भी वायरल दावे को गलत साबित किया।
17 दिसंबर 2025 को पायल धारे ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत बयान जारी करके पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली महिला वह नहीं हैं और उस सामग्री का उनकी जिंदगी, पहचान या निजी फैसलों से कोई संबंध नहीं है।
पायल ने अपने बयान में लिखा कि पिछले कुछ दिनों से ऑनलाइन ऐसी सामग्री प्रसारित की जा रही है, जिसमें गलत तरीके से उनके नाम और तस्वीर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने इस घटना को बेहद व्यक्तिगत और तकलीफदेह बताते हुए लोगों और मीडिया से अपील की कि वे इस सामग्री को शेयर करने, दोबारा प्रकाशित करने या इसके बारे में अटकलें लगाने से बचें।
पायल ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पहचान और तस्वीर के गलत इस्तेमाल के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
उनका यह बयान उन लोगों के लिए भी एक स्पष्ट संदेश था, जो बिना किसी पुष्टि के किसी वायरल वीडियो को किसी व्यक्ति की पहचान से जोड़ देते हैं।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा अपडेट 19 दिसंबर 2025 को सामने आया।
महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने पायल धारे की शिकायत के आधार पर मामले में आपराधिक केस दर्ज किया और वायरल वीडियो की तकनीकी जांच शुरू की।
हिंदुस्तान टाइम्स और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महाराष्ट्र राज्य साइबर विभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कार्यालय की ओर से जारी फॉरेंसिक प्रमाणपत्र में वीडियो को डिजिटल रूप से बदला हुआ पाया गया।
जांच में पुष्टि हुई कि संबंधित वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से तैयार किया गया डीपफेक था।
यानी पायल धारे को वीडियो से जोड़कर किए जा रहे दावे गलत थे।
महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई भी शुरू की। पुलिस की जांच ने एक बार फिर दिखाया कि AI तकनीक का गलत इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
दिसंबर 2025 की इस घटना के कई महीने बाद जून 2026 में पायल धारे ने रियलिटी शो The Alliance में इस पूरे विवाद के मानसिक और भावनात्मक प्रभाव के बारे में खुलकर बात की।
शो के दूसरे एपिसोड में डाइनिंग टेबल पर बातचीत के दौरान पायल ने बताया कि सोशल मीडिया पर बढ़ती नकारात्मकता और किसी की छवि को निशाना बनाने की प्रवृत्ति कितनी परेशान करने वाली है।
इस दौरान उन्होंने कहा:
"People are so sensitive now. Koi ek word bhi aapke against ja sakta hai."
उन्होंने आगे बताया कि जब कोई व्यक्ति आगे बढ़ता है और सफल होता है, तो कुछ लोग उसे नीचे गिराने की कोशिश करने लगते हैं।
पायल ने कहा कि लोगों ने उनकी छवि का मजाक बनाया और उनका डीपफेक वीडियो तैयार किया। इस घटना को याद करते हुए वह भावुक हो गईं और उनकी आंखों में आंसू आ गए।
इस बातचीत में उनके साथ मौजूद अभिनेता और होस्ट रवि किशन, निखिल चिनापा और अन्य कंटेस्टेंट भी मौजूद थे।
निखिल चिनापा ने पायल को सांत्वना देते हुए कहा कि इंटरनेट पर महिलाओं को अक्सर अनावश्यक और बेहद परेशान करने वाले ध्यान का सामना करना पड़ता है।
पायल का यह भावुक पल सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहा। कई लोगों ने AI के गलत इस्तेमाल की आलोचना की और पायल का समर्थन किया।
यह घटना बताती है कि किसी व्यक्ति के नाम से फैलाया गया एक फर्जी वीडियो सिर्फ ऑनलाइन विवाद नहीं होता, बल्कि उसकी वास्तविक जिंदगी और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाल सकता है।
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वायरल वीडियो की चर्चा के बीच इंटरनेट पर कई तरह के लिंक और डाउनलोड ऑफर भी सामने आते हैं।
Telegram, WhatsApp और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ लोग कथित वीडियो उपलब्ध कराने का दावा करते हैं। कई बार ऐसे लिंक के साथ लिखा होता है कि पूरी वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक करें या किसी दूसरे पेज पर जाएं।
लेकिन यूजर्स को समझना चाहिए कि ऐसे लिंक असली वीडियो तक पहुंचाने के बजाय साइबर ठगी का जरिया भी हो सकते हैं।
इनसे जुड़े कुछ संभावित खतरे हैं:
फिशिंग लिंक: नकली वेबसाइट के जरिए आपका मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पासवर्ड चुराने की कोशिश हो सकती है।
मैलवेयर: संदिग्ध APK फाइल या डाउनलोड लिंक के जरिए फोन में खतरनाक सॉफ्टवेयर इंस्टॉल हो सकता है।
बैंकिंग फ्रॉड: फर्जी लॉगिन पेज के जरिए बैंकिंग डिटेल और OTP हासिल करने की कोशिश की जा सकती है।
सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग: नकली वेबसाइट पर लॉगिन करने से Instagram, Facebook या दूसरे अकाउंट का एक्सेस खोने का खतरा हो सकता है।
पैसों की ठगी: कुछ लोग प्राइवेट वीडियो देने के नाम पर पहले पैसे मांगते हैं और भुगतान के बाद गायब हो जाते हैं।
ध्यान रखें कि किसी भी वायरल वीडियो का लिंक सुरक्षित होने की गारंटी सिर्फ इसलिए नहीं मिल जाती क्योंकि उसे कई लोग शेयर कर रहे हैं।
इसलिए Payal Gaming के कथित 19 मिनट के वीडियो का लिंक खोजने या डाउनलोड करने के बजाय ऐसे लिंक से दूरी बनाए रखना बेहतर है।
भारत में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी तस्वीर या वीडियो का गलत इस्तेमाल करना गंभीर मामला बन सकता है। खासकर जब AI की मदद से अश्लील या यौन सामग्री तैयार करके उसे किसी वास्तविक व्यक्ति से जोड़ दिया जाए।
ऐसे मामलों में अपराध की प्रकृति और उपलब्ध सबूतों के आधार पर अलग-अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।
Information Technology Act, 2000 की धारा 67:
इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने पर पहली बार दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन साल की जेल और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
धारा 67A:
इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से यौन रूप से स्पष्ट सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने पर पहली बार दोषी पाए जाने पर अधिकतम पांच साल की जेल और दस लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। दोबारा दोषी पाए जाने पर सजा सात साल तक बढ़ सकती है।
इसके अलावा, मामले के तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महिलाओं के अशोभनीय चित्रण से संबंधित कानूनों के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
यहां एक बात समझना जरूरी है कि सिर्फ वीडियो बनाने वाला ही नहीं, बल्कि उसे जानबूझकर आगे प्रसारित करने वाला व्यक्ति भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है। हालांकि, हर मामले में लागू धाराएं और सजा का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होता है।
इसलिए किसी भी कथित प्राइवेट वीडियो को बिना पुष्टि के डाउनलोड करना, शेयर करना या दूसरों को भेजना गंभीर परेशानी में डाल सकता है।
पायल धारे को इंटरनेट की दुनिया में Payal Gaming के नाम से जाना जाता है। वह भारत की लोकप्रिय महिला गेमिंग क्रिएटर्स में शामिल हैं।
उन्होंने YouTube पर गेमिंग वीडियो और लाइव स्ट्रीम के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। खासतौर पर BGMI (Battlegrounds Mobile India) से जुड़े उनके कंटेंट को काफी पसंद किया जाता है।
पायल S8UL Esports से भी जुड़ी रही हैं और भारतीय गेमिंग कम्युनिटी में उनकी अच्छी पहचान है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गेमिंग इंडस्ट्री पर हुई चर्चा में भी हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने बताया था कि शुरुआती दिनों में उनके पास गेमिंग के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपनी मेहनत से इस क्षेत्र में पहचान बनाई।
यही वजह है कि उनके साथ हुई इस घटना ने गेमिंग कम्युनिटी के साथ-साथ सोशल मीडिया यूजर्स का भी ध्यान खींचा।
Payal Gaming का मामला सिर्फ एक सेलिब्रिटी विवाद नहीं है। यह हर उस व्यक्ति के लिए चेतावनी है, जिसकी तस्वीरों और वीडियो का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है।
इंटरनेट पर किसी भी संदिग्ध वीडियो या लिंक को देखते समय कुछ सावधानियां जरूर बरतें।
किसी अनजान Telegram या WhatsApp लिंक पर क्लिक न करें।
संदिग्ध वेबसाइट पर अपना मोबाइल नंबर, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी न डालें।
किसी भी अनजान APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें।
बिना पुष्टि किए किसी व्यक्ति के नाम से जुड़ा वीडियो शेयर न करें।
अगर कोई आपकी तस्वीर या पहचान का गलत इस्तेमाल करता है, तो स्क्रीनशॉट और संबंधित लिंक जैसे सबूत सुरक्षित रखें।
ऐसे मामलों की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर करें।
साइबर अपराध की शिकायत के लिए भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
साइबर क्राइम शिकायत पोर्टल: https://cybercrime.gov.in
Payal Gaming का कथित 19 मिनट का वायरल वीडियो असली नहीं था। पायल धारे ने खुद इस वीडियो से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया था और महाराष्ट्र साइबर पुलिस की फॉरेंसिक जांच में भी वीडियो को AI से तैयार किया गया डीपफेक बताया गया।
जून 2026 में The Alliance में इस घटना को याद करते हुए पायल का भावुक होना दिखाता है कि इंटरनेट पर फैलने वाली झूठी सामग्री किसी की निजी जिंदगी को किस तरह प्रभावित कर सकती है।
सबसे दुखद बात यह है कि बिना किसी पुष्टि के लोग किसी महिला की पहचान और सम्मान को निशाना बनाने से पहले एक बार भी नहीं सोचते।
AI तकनीक का इस्तेमाल मनोरंजन और रचनात्मक कामों के लिए किया जा सकता है, लेकिन किसी की सहमति के बिना उसकी नकली अश्लील तस्वीरें या वीडियो बनाना और उन्हें वायरल करना बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।
इसलिए अगली बार जब आपके सामने कोई 19 मिनट का वायरल वीडियो या सनसनीखेज लिंक आए, तो उसे देखने या शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांचें। याद रखें, एक क्लिक किसी दूसरे व्यक्ति की जिंदगी को नुकसान पहुंचा सकता है और आपकी डिजिटल सुरक्षा को भी खतरे में डाल सकता है।