मुस्कान करिया के नाम से वायरल वीडियो को पुलिस ने डीपफेक बताया है। जानिए मामला कैसे सामने आया, परिवार पर क्या असर पड़ा और शिकायत कहां करें। जानें पूरी खबर।

सोशल मीडिया पर किसी वीडियो का वायरल होना अब उसकी सच्चाई का सबूत नहीं रह गया है। AI की मदद से किसी की असली तस्वीर और वीडियो का इस्तेमाल करके ऐसा फर्जी कंटेंट तैयार किया जा सकता है, जिसे देखकर करीबी लोग भी धोखा खा जाएं। इसका दर्दनाक उदाहरण कंटेंट क्रिएटर मुस्कान करिया के मामले में देखने को मिला है।
22 वर्षीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मुस्कान करिया (Muskan Karia) ने खुलासा किया है कि उनके नाम से इंटरनेट पर फैलाया गया आपत्तिजनक वीडियो पूरी तरह फर्जी था। उनके मुताबिक, एक सामान्य वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बदलकर डीपफेक कंटेंट बनाया गया था।
इस मामले में मुस्कान ने महाराष्ट्र साइबर सेल का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस मामले में कथित रूप से जिम्मेदार लोगों को पकड़ लिया है और उन्हें एक सर्टिफिकेट भी दिया है, जिसमें वायरल वीडियो को डीपफेक बताया गया है।
लेकिन इस पूरे मामले का सबसे भावुक पहलू यह है कि मुस्कान को अपने ही परिवार और करीबियों को समझाना पड़ा कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली महिला वह नहीं हैं।
मुस्कान करिया सोशल मीडिया पर अपने खास अंदाज और 'I Bet You Didn't Know This' वाली पहचान के लिए जानी जाती हैं। वह फूड रिव्यू, मनोरंजक वीडियो और डबल मीनिंग ह्यूमर से जुड़े कंटेंट बनाती हैं।
मई 2026 के आखिरी दिनों में उनकी जिंदगी में एक ऐसी घटना हुई, जिसने उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशान कर दिया।
मुस्कान के मुताबिक, उस समय वह घर बदलने और नया घर तलाशने में व्यस्त थीं। इसी दौरान उन्हें इंस्टाग्राम पर एक अनजान व्यक्ति का डायरेक्ट मैसेज (DM) आया। मैसेज के साथ एक वीडियो भी भेजा गया था और सवाल किया गया था, 'क्या यह आप हैं?'
जब उन्होंने वीडियो देखा तो वह बुरी तरह घबरा गईं। वीडियो इतना वास्तविक लग रहा था कि शुरुआत में उन्हें खुद को समझाना पड़ा कि उसमें दिखाई देने वाली महिला वह नहीं हैं।
मुस्कान ने बताया कि उनके एक सामान्य वीडियो का इस्तेमाल करके AI की मदद से आपत्तिजनक डीपफेक तैयार किया गया था। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर फैलने लगा।
इस पूरे विवाद में मुस्कान के लिए सबसे मुश्किल समय अपने परिवार का सामना करना था।
12 अगस्त 2026 को इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक भावुक वीडियो में उन्होंने बताया कि वायरल क्लिप इतनी वास्तविक लग रही थी कि उनके परिवार और दोस्तों को भी इसकी सच्चाई समझाना मुश्किल हो गया था।
उन्होंने कहा कि उन्हें अपने ही करीबियों के सामने यह साबित करना पड़ा कि वीडियो में दिखाई देने वाली महिला वह नहीं हैं।
मुस्कान ने अपने पिता का जिक्र करते हुए कहा, 'मैंने उन्हें पूरी चीज दिखाई, मेरे पापा ने सब कुछ देखा।'
उन्होंने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो पूरी तरह डीपफेक था और इसका इस्तेमाल उनकी छवि खराब करने के लिए किया गया।
उनके मुताबिक, जिस वीडियो को आधार बनाकर यह फर्जी कंटेंट बनाया गया था, वह उनका एक सामान्य वीडियो था, जिसे उन्होंने अपने इंस्टाग्राम सब्सक्राइबर्स के साथ साझा किया था।
यह घटना बताती है कि डीपफेक का नुकसान सिर्फ किसी की ऑनलाइन छवि तक सीमित नहीं रहता। इसका असर व्यक्ति के परिवार, रिश्तों और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
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मुस्कान ने बताया कि उन्होंने शुरुआत में लगभग दो महीने तक इस मामले पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा।
बाद में उन्होंने अपने वकील अविनाश ललवानी (Avinash Lalwani) से पूरी घटना पर चर्चा की और उन्हें वह मूल वीडियो भी दिखाया, जिसका इस्तेमाल डीपफेक बनाने में किया गया था।
इसके बाद मुस्कान और उनके वकील ने महाराष्ट्र साइबर सेल से संपर्क किया।
जांच में सहायता के लिए उन्होंने अधिकारियों को दो महत्वपूर्ण वीडियो सौंपे:
उनका मूल और सामान्य वीडियो।
AI की मदद से तैयार किया गया कथित डीपफेक वीडियो।
मुस्कान के अनुसार, उनकी शिकायत के बाद FIR दर्ज की गई और मामले की जांच शुरू हुई।
उन्होंने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में बताया कि महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में कथित आरोपियों को पकड़ लिया। इसके अलावा पुलिस की तरफ से उन्हें एक सर्टिफिकेट भी दिया गया, जिसमें वायरल वीडियो को पूरी तरह डीपफेक बताया गया था।
यह सर्टिफिकेट उनके लिए काफी महत्वपूर्ण था, क्योंकि इंटरनेट पर फैल चुकी गलत जानकारी के बीच उनके पास अब पुलिस की ओर से दिया गया एक आधिकारिक दस्तावेज था।
हालांकि, आरोपियों की पहचान, उनकी संख्या और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है।
मुस्कान ने इस मुश्किल समय में साथ देने वाले लोगों का भी आभार जताया।
उन्होंने महाराष्ट्र साइबर सेल, ADGP यशस्वी यादव और अपने वकील अविनाश ललवानी को धन्यवाद दिया। इसके अलावा उन्होंने अपने परिवार और साथी कंटेंट क्रिएटर आशीष चंचलानी (Ashish Chanchlani) का भी खास तौर पर जिक्र किया।
मुस्कान ने आशीष चंचलानी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके सहयोग से उन्हें अपनी ताकत और खुद पर भरोसा करने का एहसास हुआ।
उन्होंने यह भी बताया कि परिवार, दोस्तों और कानूनी मदद की वजह से वह इस मामले में आवाज उठा सकीं।
लेकिन उनका सबसे महत्वपूर्ण संदेश उन महिलाओं के लिए था, जिनके पास ऐसी परिस्थितियों में कानूनी मदद लेने या परिवार का सहयोग पाने के पर्याप्त साधन नहीं होते।
मुस्कान ने चिंता जताई कि कई पीड़ित ऐसे मामलों का मानसिक दबाव सहन नहीं कर पाते। इसलिए जरूरी है कि डीपफेक और ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों को गंभीरता से लिया जाए और पीड़ितों को दोषी ठहराने के बजाय उनका साथ दिया जाए।
मुस्कान करिया का मामला AI तकनीक के गलत इस्तेमाल को लेकर एक बड़ी चेतावनी है।
डीपफेक ऐसी तकनीक है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या हावभाव को दूसरे वीडियो में इस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है कि नकली कंटेंट असली दिखाई देने लगे।
इस तकनीक का इस्तेमाल मनोरंजन और रचनात्मक कामों में भी होता है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान, प्रतिष्ठा और निजता को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
विशेष रूप से महिलाओं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को इसका निशाना बनाया जा सकता है।
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि एक बार कोई फर्जी वीडियो इंटरनेट पर फैल जाए तो उसे पूरी तरह हटाना और उससे हुए नुकसान की भरपाई करना बेहद मुश्किल हो सकता है।
यही वजह है कि किसी वायरल वीडियो को बिना जांचे सच मान लेना या उसे दूसरों के साथ शेयर करना गलत है।
मुस्कान करिया के मामले के बाद एक और जरूरी बात समझने की जरूरत है।
सोशल मीडिया पर किसी चर्चित व्यक्ति के कथित MMS या प्राइवेट वीडियो के नाम पर कई फर्जी लिंक भी शेयर किए जाते हैं। इनका मकसद लोगों को संदिग्ध वेबसाइटों तक पहुंचाना या उनकी निजी जानकारी चुराना हो सकता है।
ऐसे लिंक पर क्लिक करने से बचें, खासकर जब कोई वेबसाइट वीडियो देखने के लिए आपका सोशल मीडिया पासवर्ड, मोबाइल नंबर या बैंकिंग जानकारी मांगती हो।
कुछ वेबसाइटें वीडियो चलाने के नाम पर अनजान APK फाइल डाउनलोड करने के लिए भी कहती हैं। ऐसी फाइलें आपके फोन की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं।
इसलिए किसी भी कथित लीक वीडियो को खोजने, डाउनलोड करने या आगे भेजने से बचना चाहिए।
अगर किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो का इस्तेमाल करके फर्जी आपत्तिजनक कंटेंट बनाया जाता है, तो उसके पास कानूनी शिकायत करने के विकल्प मौजूद हैं।
भारत सरकार का National Cyber Crime Reporting Portal ऑनलाइन साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज कराने के लिए आधिकारिक प्लेटफॉर्म है।
पीड़ित इन तरीकों से कार्रवाई कर सकते हैं:
सबसे पहले वायरल कंटेंट से जुड़े स्क्रीनशॉट, सोशल मीडिया अकाउंट का नाम, URL और उपलब्ध अन्य डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें।
संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उस पोस्ट या अकाउंट को रिपोर्ट करें।
नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन या साइबर सेल से संपर्क करें।
आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
जरूरत पड़ने पर किसी योग्य वकील से कानूनी सलाह लें।
शिकायत के लिए आधिकारिक वेबसाइट है:
National Cyber Crime Reporting Portal: https://cybercrime.gov.in
साइबर अपराध से जुड़ी सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 भी उपलब्ध है। महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों की शिकायत के लिए पोर्टल पर अलग विकल्प भी मौजूद हैं।
पीड़ितों को खुद संदिग्ध आरोपियों से भिड़ने के बजाय सबूत सुरक्षित रखते हुए पुलिस और कानूनी विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए।
मुस्कान करिया का मामला सिर्फ एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से जुड़ा विवाद नहीं है। यह उन सभी लोगों के लिए चेतावनी है, जो इंटरनेट पर अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा करते हैं।
आज AI की मदद से किसी भी व्यक्ति को ऐसी स्थिति में दिखाया जा सकता है, जिसका वास्तविकता से कोई संबंध न हो।
इसलिए अब 'जो दिख रहा है, वही सच है' वाली सोच पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं है।
मुस्कान ने अपने मामले में कानूनी रास्ता अपनाया और सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। लेकिन हर पीड़ित के पास ऐसा करने के लिए जरूरी संसाधन, आत्मविश्वास और सहयोग नहीं होता।
समाज की जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों में पीड़ितों पर सवाल उठाने के बजाय फर्जी कंटेंट बनाने और फैलाने वालों के खिलाफ आवाज उठाई जाए।
आखिरकार, AI से बनाया गया एक फर्जी वीडियो किसी की असली जिंदगी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए अगली बार सोशल मीडिया पर कोई कथित लीक वीडियो वायरल हो, तो उसे देखने या शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई और उसके पीछे छिपे नुकसान के बारे में जरूर सोचें।
यह लेख केवल समाचार और साइबर सुरक्षा जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। हम किसी भी प्रकार के कथित लीक, आपत्तिजनक या गैर-सहमति से बनाए गए कंटेंट को होस्ट, प्रचारित या साझा नहीं करते। लेख में दी गई पुलिस कार्रवाई की जानकारी मुस्कान करिया के सार्वजनिक बयानों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है।