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अंधविश्वास का घिनौना खेल: स्वयंभू बाबा अशोक खरात का पर्दाफाश, 58 अश्लील वीडियो और करोड़ों की उगाही का काला सच

अशोक खरात

भारत में आस्था और धर्म के नाम पर सीधे-साधे लोगों को ठगने का खेल कोई नया नहीं है, लेकिन महाराष्ट्र के नासिक से सामने आया अशोक खरात उर्फ ‘कैप्टन’ खरात का मामला क्रूरता, ब्लैकमेलिंग और अंधविश्वास की सारी हदें पार कर जाता है। खुद को ‘न्यूमरोलॉजिस्ट’ (अंकशास्त्री), ‘कॉस्मोलॉजी विशेषज्ञ’ और भगवान का अवतार बताने वाले इस ढोंगी बाबा का साम्राज्य अब पूरी तरह ढह चुका है। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद इस केस में जो खुलासे हुए हैं, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।

आइए विस्तार से जानते हैं कि अंधविश्वास के इस मकड़जाल के पीछे का पूरा सच क्या है और कैसे यह ढोंगी सालों तक महिलाओं और व्यापारियों का शोषण करता रहा।

कौन है अशोक खरात? (The Mastermind of Superstition)

अशोक खरात नासिक और उसके आसपास के इलाकों में एक हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल जीने वाला ढोंगी बाबा है। उसने अपने आलीशान आश्रम और रसूख के दम पर लोगों को यह विश्वास दिला रखा था कि उसके पास दैवीय शक्तियां हैं। वह लोगों को ‘कालसर्प दोष’ और अन्य ग्रहों के बुरे प्रभाव से मुक्ति दिलाने का दावा करता था। खुद को भगवान का रूप बताकर वह भोली-भाली महिलाओं और अमीर बिजनेसमैन को अपने जाल में फंसाता था।

58 अश्लील वीडियो और ब्लैकमेलिंग का गंदा खेल

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अशोक खरात की गिरफ्तारी तब हुई जब एक 35 वर्षीय महिला ने पुलिस में उसके खिलाफ नशीला पदार्थ पिलाकर बलात्कार करने और पिछले तीन सालों से लगातार यौन शोषण करने की शिकायत दर्ज कराई।

जब नासिक पुलिस की क्राइम ब्रांच और विशेष जांच दल (SIT) ने इस मामले की गहराई से जांच की, तो उनके होश उड़ गए:

  • शोषण के सबूत: पुलिस ने खरात के ठिकानों से करीब 58 अश्लील वीडियो क्लिप बरामद किए। इन वीडियो में वह अलग-अलग महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रहा था।

  • हिडन कैमरों का इस्तेमाल: जांच में सामने आया कि खरात अपने आश्रम और केबिन में आने वाली महिलाओं का गुप्त कैमरों (Hidden Cameras) के जरिए वीडियो बना लेता था और बाद में उन्हीं वीडियो के दम पर उन्हें ब्लैकमेल करता था ताकि वे अपना मुंह न खोलें।

₹5 करोड़ की रंगदारी और करोड़ों का साम्राज्य

खरात केवल शारीरिक शोषण तक ही सीमित नहीं था, उसने लोगों की मजबूरी और डर का फायदा उठाकर करोड़ों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया था।

  • एक पुणे आधारित बिजनेसमैन ने शिकायत दर्ज कराई कि खरात ने उसे ‘मौत का डर’ (Fear of Death) दिखाकर और ‘सर्प दोष’ निवारण के नाम पर भारी-भरकम रकम वसूली।

  • आरोपी ने न केवल करोड़ों रुपये ऐंठे, बल्कि पीड़ित के पैसों पर दुनिया के 21 देशों की मुफ्त विदेशी यात्राएं भी कीं।

  • रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में कुल 8 से ज्यादा केस दर्ज हो चुके हैं, जिसमें धोखाधड़ी, जबरन वसूली (Extortion), काला जादू और मानव बलि की धमकियां देने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति में आया भूचाल

अशोक खरात का जाल सिर्फ आम जनता तक ही सीमित नहीं था, बल्कि उसके संपर्क राज्य के कई बड़े राजनेताओं और रसूखदार अधिकारियों से भी थे।

  • सोशल मीडिया पर राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष के साथ खरात की तस्वीरें और पाद्यपूजा (पैर धोने की रस्म) के वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार को आड़े हाथों लिया, जिसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा।

  • विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि खरात को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, जिसके कारण वह इतने सालों तक बिना किसी डर के अपना यह अवैध और अनैतिक धंधा चला रहा था।

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पीड़ितों पर दोहरा संकट (The Double Whammy for Victims)

इस पूरे मामले में सबसे दुखद पहलू यह है कि अशोक खरात की गिरफ्तारी के बाद उसके दफ्तर से जुड़े कुछ वीडियो और सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर लीक हो गए। इसके कारण पीड़ित महिलाओं को दोहरी प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। एक तरफ वे पहले से ही मानसिक और शारीरिक शोषण का शिकार थीं, वहीं अब समाज में उनकी पहचान उजागर होने और बदनामी का डर उन्हें सता रहा है। पुलिस और साइबर सेल अब इन वीडियो को इंटरनेट से हटाने और लीक करने वालों पर कार्रवाई करने में जुटी है।

कब थमेगा अंधविश्वास का यह दौर?

अशोक खरात का यह मामला देश में सक्रिय ‘Epstein’ जैसे घिनौने स्कैंडल की याद दिलाता है, जहाँ रसूख और अंधविश्वास की आड़ में महिलाओं का शिकार किया जाता था। IPS अधिकारी तेजस्वी सातपुते के नेतृत्व में SIT इस मामले की वित्तीय लेन-देन, प्रॉपर्टी होल्डिंग्स और सभी मामलों की गहराई से जांच कर रही है।

यह मामला हमें याद दिलाता है कि जब तक हम चमत्कार, अंधविश्वास और ढोंगी बाबाओं के झूठे दावों पर आंख मूंदकर भरोसा करते रहेंगे, तब तक अशोक खरात जैसे अपराधी समाज में पनपते रहेंगे। किसी भी संकट या परेशानी के समय बाबाओं के पास जाने के बजाय सही कानूनी, चिकित्सीय या तार्किक रास्ता चुनना ही समझदारी है।

आप इस मामले के बारे में क्या सोचते हैं? अंधविश्वास के खिलाफ समाज को जागरूक करने के लिए क्या कड़े कदम उठाए जाने चाहिए? अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।

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