अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर वैश्विक राजनीति और तेल बाजारों के केंद्र में आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में हुई दो घंटे लंबी उच्चस्तरीय बैठक के बाद भी ईरान के साथ संभावित समझौते पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया। हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इस बीच दुनिया भर के निवेशक, तेल बाजार और कूटनीतिक विशेषज्ञ इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं कि क्या ईरान युद्ध समाप्त होने वाला है या मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है।
Trump-Iran Deal पर क्या हुआ?

व्हाइट हाउस में हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप केवल ऐसा समझौता स्वीकार करेंगे जो अमेरिकी हितों और उनकी निर्धारित शर्तों के अनुरूप हो।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर दावा किया कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए तैयार है। इसके बदले अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त कर सकता है और समुद्री व्यापार फिर सामान्य हो सकता है।
हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल ईरान को कोई आर्थिक भुगतान नहीं किया जाएगा।
ईरान ने क्या कहा?
ईरानी विदेश मंत्रालय ने किसी भी अंतिम समझौते की पुष्टि से इनकार किया है।
ईरान के अनुसार दोनों देशों के बीच बातचीत अभी जारी है और फिलहाल प्राथमिकता युद्ध समाप्त करने पर है। तेहरान का कहना है कि यूरेनियम संवर्धन और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर अभी कोई अंतिम चर्चा नहीं हुई है।
ईरानी नेताओं ने यह भी संकेत दिया है कि वे अमेरिकी आश्वासनों की बजाय ठोस कदमों पर भरोसा करना चाहते हैं।
Strait of Hormuz क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है। यदि यह मार्ग बंद होता है या यहां तनाव बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। यही कारण है कि अमेरिका इस जलमार्ग को पूरी तरह खुला रखना चाहता है। ईरान का दावा है कि इस क्षेत्र के प्रबंधन में उसका और ओमान का महत्वपूर्ण अधिकार है, जबकि अमेरिका इसे वैश्विक व्यापार का मुक्त मार्ग मानता है।
अमेरिका और ईरान की प्रमुख मांगें क्या हैं?
1. ईरान का परमाणु कार्यक्रम
अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को किसी अन्य देश को सौंप दे। वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा मानता है।
2. जमे हुए अरबों डॉलर की रिहाई
रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान विदेशों में फंसी अपनी अरबों डॉलर की संपत्तियों को मुक्त करवाना चाहता है। तेहरान का मानना है कि आर्थिक प्रतिबंधों में राहत किसी भी समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
3. सुरक्षा गारंटी
ईरान चाहता है कि अमेरिका इस बार समझौते से पीछे न हटे। यह मांग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप प्रशासन पहले 2015 के परमाणु समझौते से बाहर निकल चुका है।
4. Israel-Hezbollah संघर्ष
ईरान चाहता है कि किसी भी व्यापक समझौते में लेबनान में चल रहे Israel-Hezbollah संघर्ष को भी शामिल किया जाए।
क्या टूट चुका है सीजफायर?
अप्रैल में घोषित युद्धविराम के बावजूद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर समझौता तोड़ने के आरोप लगाए हैं। हाल के दिनों में अमेरिकी और ईरानी सैन्य गतिविधियों ने संकेत दिया है कि जमीनी स्तर पर तनाव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यही वजह है कि संभावित समझौते के बावजूद क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है।
क्या Iran War खत्म होने के करीब है?
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत पहले के मुकाबले अधिक गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है। हालांकि यूरेनियम संवर्धन, आर्थिक प्रतिबंध, जमे हुए फंड और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर अभी भी महत्वपूर्ण मतभेद बने हुए हैं। यदि इन प्रमुख विवादों पर सहमति बनती है तो मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव कम हो सकता है। लेकिन फिलहाल किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
FAQs
क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है?
नहीं, दोनों देशों ने अभी तक किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं की है।
Strait of Hormuz क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दुनिया का प्रमुख तेल व्यापार मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
अमेरिका की सबसे बड़ी मांग क्या है?
अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण स्वीकार करे।
ईरान क्या चाहता है?
ईरान जमे हुए फंड की रिहाई, प्रतिबंधों में राहत और अमेरिकी गारंटी चाहता है कि भविष्य में समझौता नहीं तोड़ा जाएगा।



