प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत जिले में आवास निर्माण की गति कागज़ों पर संतोषजनक नजर आ रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। बड़ी संख्या में लाभार्थियों के मकान अब भी अधूरे पड़े हुए हैं, जिससे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

तीसरी किस्त के बाद भी अधूरे हजारों मकान

आंकड़ों के अनुसार जिले में 26,618 लाभार्थियों को तीसरी किस्त का भुगतान किया जा चुका है, लेकिन इनमें से केवल 23,133 मकानों का ही निर्माण पूरा हो पाया है। अब भी 3,485 मकान अधूरे हैं, जबकि इन सभी को तीसरी किस्त जारी की जा चुकी है। राज्य स्तर पर समस्तीपुर उन जिलों में शामिल है, जहां तीसरी किस्त प्राप्त करने वाले लाभार्थियों की संख्या सबसे अधिक है। इसके बावजूद अधूरे आवासों की बड़ी संख्या प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

निर्माण में देरी के पीछे क्या हैं असली कारण?

जानकारी के अनुसार, मकानों के अधूरे रहने के पीछे कई कारण सामने आए हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

  • मजदूरी की बढ़ती लागत

  • निर्माण सामग्री के दामों में वृद्धि

  • निगरानी और तकनीकी सहयोग की कमी, इन कारणों की वजह से कई लाभार्थी तय समय सीमा के भीतर अपने घरों का निर्माण पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

प्रशासन की समीक्षा और लाभार्थियों पर दबाव

अधूरे मकानों की प्रगति को लेकर प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है। जिला स्तर से प्रखंड और संबंधित पंचायतों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। लाभार्थियों पर भी योजना को जल्द से जल्द पूर्ण कराने का दबाव बनाया जा रहा है, ताकि निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा किया जा सके। अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन आने वाले दिनों में 3,485 अधूरे आवासों को समय पर पूरा करा पाता है या नहीं।

किस्त जारी करने में नंबर वन, पूर्ण कराने में पिछड़ा जिला

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)_ कागज़ों में रफ्तार, ज़मीन पर अधूरे हजारों घर (1)

जिला राज्यभर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तीसरी किस्त जारी करने में नंबर वन रहा है। कुल 26,618 आवासों की तीसरी किस्त भेजी गई। हालांकि, आवास पूर्ण कराने के मामले में जिला तीसरे स्थान पर है। यह आंकड़ा वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के अंतर्गत स्वीकृत आवासों से संबंधित है।

शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना में भी गंभीर स्थिति

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत भी स्थिति चिंताजनक है। एक रिपोर्ट के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में गरीबों और झुग्गीवासियों के लिए बनाए गए 9.7 लाख घरों में से लगभग 47% अब भी खाली पड़े हैं।

आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की कमी बनी बड़ी वजह

संसदीय पैनल की रिपोर्ट के अनुसार, कई लाभार्थी इन घरों में इसलिए नहीं रह रहे हैं क्योंकि—

  • सड़क

  • पानी

  • बिजली

  • सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, विशेष रूप से इन-सीटू स्लम रिडेवलपमेंट (ISSR) के तहत बने घरों में स्थिति ज्यादा खराब है, जहां लगभग 70% मकान खाली पड़े हैं।

केंद्र–राज्य समन्वय की कमी से बढ़ी समस्या

पीएमएवाई-शहरी दिशानिर्देशों के अनुसार, सड़क, पानी और सीवरेज जैसी ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है। हालांकि, कई राज्यों द्वारा यह सुविधाएं समय पर उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं, जिससे मकान खाली रह गए।

आंकड़े जो हालात बयां करते हैं

  • AHP और ISSR के तहत बने 9.7 लाख घरों में से सिर्फ 5.1 लाख में लोग रह रहे हैं

  • AHP के तहत बने करीब 9 लाख घरों में से 4.1 लाख खाली

  • ISSR के तहत बने 67,806 घरों में से 47,510 मकान अब भी खाली

संसदीय समिति की सिफारिश

संसदीय समिति ने मंत्रालय को सलाह दी है कि—

  • आवास परियोजनाओं की प्रगति पर कड़ी निगरानी रखी जाए

  • निर्माण और आवंटन में हो रही देरी को दूर किया जाए

  • केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य वास्तव में पूरा हो सके।