Jio Satellite Internet: भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी, रिलायंस जियो, सैटेलाइट इंटरनेट सेक्टर में बड़े पैमाने पर एंट्री करने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अगले दो से तीन सालों में अंतरिक्ष में 1,600 से 1,650 लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना बना रही है। जियो ने इस पहल के लिए भारत के स्पेस रेगुलेटर, IN-SPACe के पास पहले ही एक प्रस्ताव जमा कर दिया है। अगर इसे मंज़ूरी मिल जाती है, तो जियो अपने खुद के LEO सैटेलाइट नेटवर्क के ज़रिए इंटरनेट सर्विस देने वाली पहली भारतीय कंपनी बन सकती है।
आखिर Jio Satellite Internet क्या है?
अभी हम मोबाइल टावर और फाइबर-ऑप्टिक केबल का इस्तेमाल करके इंटरनेट का उपयोग करते हैं। हालांकि, दूर-दराज़ के गांवों, पहाड़ी इलाकों, जंगलों और समुद्री क्षेत्रों तक नेटवर्क कवरेज पहुंचाना मुश्किल होता है। ऐसी जगहों पर सैटेलाइट इंटरनेट काम आता है।
इस टेक्नोलॉजी से इंटरनेट सिग्नल सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से भेजे जाते हैं। इससे उन इलाकों में भी इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा सकता है जहां मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क नहीं पहुंच पाते।
LEO सैटेलाइट क्या हैं?
LEO का मतलब है लो अर्थ ऑर्बिट; ये सैटेलाइट पृथ्वी से लगभग 500 से 700 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि जियो अपने सैटेलाइट को लगभग 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैनात करने की योजना बना रही है। इस ऊंचाई पर काम करने से इंटरनेट की स्पीड बेहतर होती है और सिग्नल लेटेंसी (सिग्नल को यात्रा करने में लगने वाला समय) कम होती है।
डायरेक्ट-टू-डिवाइस टेक्नोलॉजी क्या है?
जियो न सिर्फ सैटेलाइट इंटरनेट पर बल्कि डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) टेक्नोलॉजी पर भी काम कर रही है। इस टेक्नोलॉजी की एक खास बात यह है कि भविष्य में मोबाइल फोन सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो सकेंगे। इससे कई स्थितियों में मोबाइल टावर पर निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि, इसके काम करने के लिए फोन और नेटवर्क दोनों का इस नई टेक्नोलॉजी को सपोर्ट करना ज़रूरी है। भारत में इस टेक्नोलॉजी से जुड़े नियम और तैयारियां अभी चल रही हैं।
क्या जियो स्टारलिंक को टक्कर दे सकती है?
ग्लोबल लेवल पर, एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को अभी सैटेलाइट इंटरनेट सेक्टर में लीडर माना जाता है। इसके पास पहले से ही अंतरिक्ष में हज़ारों सैटेलाइट हैं और यह कई देशों में इंटरनेट सर्विस देती है। अब जियो भी अपना सैटेलाइट नेटवर्क बनाने का लक्ष्य रख रही है। अगर यह योजना सफल होती है, तो स्टारलिंक, वनवेब और दूसरी कंपनियों को भारत के सैटेलाइट इंटरनेट सेक्टर में कड़ी टक्कर मिल सकती है।
भारत को क्या फायदे होंगे?
अगर Jio का प्रोजेक्ट सफल होता है, तो सबसे ज़्यादा फ़ायदा उन लोगों को होगा जो अभी अच्छी क्वालिटी वाले इंटरनेट से दूर हैं। इससे दूर-दराज़ के गांवों, पहाड़ी इलाकों, जंगलों, बॉर्डर वाले इलाकों और समुद्र में काम करने वाले लोगों तक भी हाई-स्पीड इंटरनेट पहुँचाया जा सकेगा। इससे ज़्यादा से ज़्यादा लोगों के लिए ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल बैंकिंग, वीडियो कॉलिंग और सरकारी सेवाओं तक पहुँच आसान हो जाएगी। साथ ही, इससे विदेशी सैटेलाइट कंपनियों पर भारत की निर्भरता भी कम हो सकती है।
क्या Jio की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस शुरू हो गई है?
नहीं। अभी यह प्लानिंग के स्टेज पर है। कंपनी ने रेगुलेटर के पास अपना प्रपोज़ल जमा कर दिया है। मंज़ूरी मिलने के बाद, सैटेलाइट लॉन्च करने, ग्राउंड नेटवर्क बनाने और ज़रूरी लाइसेंस लेने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उसके बाद ही यह सर्विस आम जनता के लिए शुरू की जा सकेगी।
यह सर्विस कब शुरू हो सकती है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Jio का लक्ष्य अगले 2 से 3 सालों में अपना सैटेलाइट नेटवर्क तैयार करना है। हालाँकि, फ़ाइनल टाइमलाइन सरकारी मंज़ूरी, सैटेलाइट लॉन्च और टेक्निकल तैयारियों पर निर्भर करेगी।
Reliance Jio का 1,650 सैटेलाइट लॉन्च करने का प्लान भारत के टेलीकॉम और इंटरनेट सेक्टर के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर यह सफल होता है, तो यह प्रोजेक्ट उन इलाकों में लाखों लोगों को हाई-स्पीड इंटरनेट दे सकता है जहाँ अभी नेटवर्क कनेक्टिविटी बनाना मुश्किल है। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट मार्केट के आने वाले समय में तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है और Jio इस सेक्टर में एक अहम खिलाड़ी के तौर पर उभर सकता है।



