पेट्रोल-डीजल की कीमतें: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के ईंधन बाज़ार में सीधे तौर पर दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में, ब्रेंट क्रूड $110 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। पिछले शुक्रवार (15 मई) को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद, दूसरी बार कीमत बढ़ने की आशंकाएं अब बढ़ती जा रही हैं। हालांकि, सरकारी तेल कंपनियों ने 18 मई को ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है।
18 मई, 2026 को प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें
आज, पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की दरें स्थिर बनी हुई हैं। प्रमुख शहरों में कीमतें इस प्रकार हैं:

| शहर | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 97.77 | 90.67 |
| मुंबई | 106.68 | 93.14 |
| कोलकाता | 108.70 | 92.02 |
| चेन्नई | 103.67 | 95.25 |
| चंडीगढ़ | 97.27 | 85.25 |
| हैदराबाद | 110.89 | 98.96 |
| जयपुर | 107.61 | 92.90 |
| बेंगलुरु | 106.17 | 94.10 |
| लखनऊ | 97.72 | 91.01 |
इसके अलावा, गुरुग्राम, नोएडा, पटना और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में इतनी बढ़ोतरी क्यों?
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में, कच्चा तेल फिलहाल $105 से $110 प्रति बैरल की सीमा में कारोबार कर रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव—विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास की स्थिति—आपूर्ति सुरक्षा को लेकर चिंताओं को बढ़ा रहा है।
यदि यह तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो तेल की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव और तेज होने की संभावना है।

भारत में पेट्रोल-डीजल महंगे क्यों हैं?
भारत में ईंधन की कीमतें तीन मुख्य कारकों से प्रभावित होती हैं:
- अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें
- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर
- केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए कर
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पेट्रोल पर कर का हिस्सा काफी अधिक है; परिणामस्वरूप, यहां ईंधन की कीमतें कई पड़ोसी देशों की तुलना में अधिक बनी रहती हैं।
क्या पेट्रोल-डीजल कीमतें फिर बढ़ सकती हैं?

बाज़ार विशेषज्ञों और वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार, तेल विपणन कंपनियां (Oil Marketing Companies) कच्चे तेल की ऊंची दरों के कारण बेचे गए प्रत्येक लीटर पर नुकसान उठा रही हैं। 15 मई को लागू की गई ₹3 की बढ़ोतरी को केवल एक अस्थायी राहत उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
यदि अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो हम अगले 2 से 3 हफ्तों में ईंधन की कीमतों में ₹8 से ₹10 प्रति लीटर की और क्रमिक वृद्धि देख सकते हैं—इस घटना को “रेंगती हुई बढ़ोतरी” (creeping hike) कहा जाता है।
इसका आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
- परिवहन लागत में बढ़ोतरी की संभावना है।
- सब्जियों और रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- महंगाई दर पर दबाव और भी बढ़ जाएगा।
फिलहाल, अच्छी बात यह है कि आज कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालाँकि, वैश्विक हालात को देखते हुए, आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें एक बार फिर बढ़ सकती हैं।
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