देश में बढ़ती महंगाई और बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बीच, रविवार की सबसे बड़ी खबर CNG की कीमतों में बढ़ोतरी रही। दिल्ली और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में CNG की दरें ₹3 तक बढ़ा दी गई हैं। दूसरी ओर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने मई महीने के दौरान भारतीय शेयर बाज़ार से हज़ारों करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। इन दोनों ही घटनाओं का आम जनता और निवेशकों, दोनों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
दिल्ली-NCR और MP में CNG हुई और महंगी
दिल्ली, मध्य प्रदेश और कई अन्य राज्यों में लगातार दूसरे दिन CNG की कीमतें बढ़ाई गई हैं। नई दरें रविवार सुबह 6:00 बजे से लागू हो गईं। दिल्ली में CNG की कीमत बढ़कर ₹80.09 प्रति किलोग्राम हो गई है—जो पहली बार ₹80 के आंकड़े को पार कर गई है। वहीं, नोएडा और गाज़ियाबाद में कीमत ₹88.70 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में CNG की कीमतें ₹93.75 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं।

गैस की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर ऑटो-रिक्शा, टैक्सियों और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के किराए पर भी पड़ने की उम्मीद है। नतीजतन, इसका असर आम नागरिकों के मासिक बजट पर पड़ना तय है।
मई में विदेशी निवेशकों द्वारा भारी बिकवाली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने मई महीने में अब तक भारतीय शेयर बाज़ार से कुल ₹27,048 करोड़ निकाल लिए हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते, विदेशी निवेशक भारतीय बाज़ार से दूरी बनाए हुए हैं।

2026 में अब तक, विदेशी निवेशकों द्वारा बेचे गए शेयरों का कुल मूल्य ₹2.2 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। यह आंकड़ा पिछले पूरे साल में दर्ज की गई कुल निकासी से भी अधिक है। मज़बूत होता अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाज़ार पर अतिरिक्त दबाव डाल रही हैं।
टॉप 10 कंपनियों की वैल्यूएशन में भारी गिरावट
पिछले एक हफ़्ते में, मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के मामले में, देश की दस सबसे बड़ी कंपनियों में से नौ की मार्केट वैल्यू में कुल मिलाकर ₹3.12 लाख करोड़ की गिरावट देखी गई। इस गिरावट का सबसे ज़्यादा असर Reliance Industries पर पड़ा, क्योंकि इसका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन ₹1.34 लाख करोड़ कम होकर ₹18.08 लाख करोड़ रह गया। इसके अलावा, SBI और TCS जैसी बड़ी कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में भी काफ़ी गिरावट आई। इसका नतीजा यह हुआ कि निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई।
इस हफ़्ते बाज़ार में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना

सोमवार, 18 मई से शुरू होने वाले हफ़्ते में शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतें और टेक्निकल इंडिकेटर बाज़ार की दिशा तय करेंगे।
जानकारों का सुझाव है कि निवेशकों को फ़िलहाल सावधानी भरी रणनीति अपनानी चाहिए, और लंबे समय के नज़रिए से निवेश करना एक समझदारी भरा फ़ैसला होगा।
कुल मिलाकर, CNG की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में, बाज़ार की चाल काफ़ी हद तक इन वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करेगी।













