Lenskart Grooming Policy Controversy: ऑनलाइन दुनिया में इन दिनों Lenskart को लेकर एक बड़ा विवाद छिड़ गया है। सोशल मीडिया पर एक स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि कंपनी की ग्रूमिंग पॉलिसी में हिजाब और पगड़ी की अनुमति है, लेकिन बिंदी,...

Lenskart Grooming Policy Controversy: ऑनलाइन दुनिया में इन दिनों Lenskart को लेकर एक बड़ा विवाद छिड़ गया है। सोशल मीडिया पर एक स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि कंपनी की ग्रूमिंग पॉलिसी में हिजाब और पगड़ी की अनुमति है, लेकिन बिंदी, तिलक, कलावा और सिंदूर जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई गई है। जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, लोगों के बीच बहस शुरू हो गई!
इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब लेखिका Shefali Vaidya ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक कथित “Lenskart Style Guide” का स्क्रीनशॉट शेयर किया। इस Lenskart viral screenshot डॉक्यूमेंट में बताया गया कि कर्मचारियों को “religious tikka/tilak, bindi/sticker, kalawa thread और visible sindoor” पहनने की अनुमति नहीं है, जबकि हिजाब और पगड़ी को मंजूरी दी गई है।

पोस्ट में यह भी सवाल उठाया गया कि एक ऐसे देश में, जहां ज्यादातर ग्राहक और कर्मचारी हिंदू हैं, वहां इस तरह की पॉलिसी कैसे लागू हो सकती है। इस दावे ने religious asymmetry यानी धार्मिक असमानता की बहस को और हवा दे दी।
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जैसे-जैसे यह पोस्ट वायरल हुआ, यूज़र्स के रिएक्शन भी सामने आने लगे। कई लोगों ने इसे “डबल स्टैंडर्ड” बताते हुए कंपनी की आलोचना की। कुछ यूज़र्स ने यहां तक कह दिया कि अगर यह सच है, तो वे कंपनी के प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करेंगे।
कई कमेंट्स में यह बात सामने आई कि अगर एक धर्म के प्रतीकों को अनुमति दी जा रही है, तो दूसरे के साथ ऐसा भेदभाव क्यों? इस मुद्दे ने देखते ही देखते एक बड़े ऑनलाइन डिबेट का रूप ले लिया।
A message from the heart... pic.twitter.com/0bV9OKlmMQ
— Peyush Bansal (@peyushbansal) January 10, 2022
विवाद बढ़ने के बाद Peyush Bansal ने खुद सामने आकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि जो डॉक्यूमेंट वायरल हो रहा है, वह कंपनी की मौजूदा पॉलिसी को सही तरीके से नहीं दर्शाता।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि Lenskart की वर्तमान नीति में किसी भी तरह के धार्मिक प्रतीक चाहे वह बिंदी हो, तिलक हो या सिंदूर पर कोई रोक नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी की ग्रूमिंग पॉलिसी समय के साथ बदलती रही है और पुराने डॉक्यूमेंट्स को वर्तमान स्थिति के रूप में देखना सही नहीं है।
हम भारत के लिए, भारत में बने हैं
Peyush Bansal ने अपने बयान में यह भी कहा कि Lenskart भारत में बनी कंपनी है और यहां के लोगों की संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि हजारों कर्मचारी अपने-अपने धार्मिक प्रतीकों के साथ काम करते हैं और वही कंपनी की असली पहचान हैं। साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले से पैदा हुई गलतफहमी के लिए खेद भी जताया और कहा कि कंपनी अपनी नीतियों को लगातार बेहतर बनाने की दिशा में काम करती रहेगी।
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