भगवान कृष्ण के साथ चिकन बिरयानी ऐड: भारत के हर राज्य का एक विशेष त्यौहार और विशेष मान्यता है। भारत के केरल राज्य का भी एक महत्त्वपूर्ण त्योहार है जो यहां का नववर्ष कहा जाता है जो मुख्य रूप से बैसाखी के दिन मनाया जाता है जिसे विषु कहा जाता है। इस बार विषु के दिन केरल में कुछ ऐसा हुआ जिसने देखते ही देखते पूरे देश में बवाल मचा दिया है।
जी हां केरल के एक रेस्टोरेंट ने भगवान कृष्ण के साथ चिकन बिरयानी ऐड दिखा दी जिसकी वजह से सोशल मीडिया पर गुस्सा फूट पड़ा। किसी ने इसे धार्मिक चोट कहा तो किसी ने सोची समझी साजिश। सवाल अब यह केवल एक पोस्ट का नहीं रहा बल्कि यह सवाल बन गया है धर्म बनाम मार्केटिंग का!
रेस्टोरेंट के मालिक का कहना है कि यह डिजाइनर की गलती है। पर यदि गलती होती तो एक पोस्टर में होती। यहां एक साथ 4-5 पोस्टर की ऐड पब्लिश कर दी गई है। ऐसे में यह गलती है या जानबूझकर खेला गया खेल इसी को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है और लोगों की भावनाएं आहत हो चुकी है।
क्या है भगवान कृष्ण के साथ चिकन बिरयानी ऐड का पूरा मामला?
बता दे हाल ही में केरल में नव वर्ष विषु मनाया गया। इसी मौके पर केरल के एक रेस्टोरेंट ने एक प्रमोशनल पोस्टर जारी किया। इस पोस्टर में भगवान कृष्ण की छवि के साथ चिकन बिरयानी और अन्य नॉनवेज डिश दिखाई गई हैं। बालकृष्ण के रूप में भगवान चिकन बिरयानी के सामने बैठे हैं और प्रसन्न दिखाई दे रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है की माखन और दही खाने वाले भगवान को नॉनवेज फूड के सामने बिठा दिया गया है। जैसे ही यह पोस्टर सामने आ गया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा और देखते ही देखते ही मुद्दा बढ़ने लगा। हिंदू धर्म में नॉनवेज को अशुद्ध भोजन माना जाता है और भगवान को शुद्ध शाकाहारी भोग अर्पित किया जाता है। ऐसे में भगवान कृष्ण के साथ मांसाहारी भोजन दिखाना धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ खेला गया खेल है।

क्यों भड़क रहे हैं लोग?
भगवान कृष्ण के साथ चिकन बिरयानी ऐड के बाद अब लोगों का गुस्सा चरम सीमा पर पहुंच गया है। केरल में इस अत्यंत महत्वपूर्ण पवित्र त्यौहार में श्रीकृष्ण की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के दर्शन से ही दिन की शुरुआत होती है। ऐसे में इस धार्मिक अवसर पर भगवान की छवि को मांसाहारी भोजन के साथ जोड़ना केरल के श्रद्धालुओं को अपमानजनक लग रहा है।
हिंदू धर्म में नॉनवेज का सेवन पाप माना जाता है। वही भगवान को इस प्रकार के भोजन का भोग भी नहीं लगाया जाता। इसलिए सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया तीखी होती जा रही है कि हिंदू लोग कितना टॉलरेट करेंगे? टॉलरेंस की एक सीमा होती है। कुछ यूज़र ने कहा है कि यह जानबूझकर किया गया काम है। धर्म के नाम पर सस्ती मार्केटिंग करने का आसान तरीका।
सोशल मीडिया पर गुस्सा और बहिष्कार की मांग
जैसे-जैसे यह विवाद बढ़ता जा रहा है ट्विटर इंस्टाग्राम और फेसबुक पर लोग रेस्टोरेंट के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। कुछ यूजर्स कह रहे हैं कि यह केवल एक गलती नहीं है बल्कि सोची समझी साजिश है। क्योंकि एक साथ 4-5 पोस्टर में भगवान कृष्ण के सामने नॉनवेज खाना रखना छोटी-मोटी गलती नहीं होती और डिजाइनर ऐसी गलती नहीं करेगा ऐसे में अब लोग इस रेस्टोरेंट के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं।

रेस्टोरेंट की तरफ से आई सफाई
जैसे विवाद सोशल मीडिया पर बढ़ने लगा रेस्टोरेंट प्रबंधन और मालिक की तरफ से सफाई आ गई है। उन्होंने कहा कि यह पोस्टर डिजाइनर द्वारा तैयार किया गया और आउटसोर्स किया गया था। मालिकों को इसके बारे में कुछ भी नहीं पता था। मालिकों ने कहा है कि उनका इरादा किसी भी धर्म की भावना को आहत करना बिल्कुल भी नहीं था। यह अनजाने में हुई गलती है। हालांकि लोग इस सफाई को स्वीकार करने से मना कर रहे हैं और रेस्टोरेंट के खिलाफ बहिष्कार का मोर्चा खोल रहे हैं।
इसके पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद
यह पहली बार नहीं है जब हिंदू देवता का इस प्रकार अपमान किया गया है। इसके पहले भी कई ब्रांड ने हिंदू देवी देवताओं का मजाक उड़ाया है। किसी ने डोर मेट पर हिंदू देवी देवताओं की आकृतियां उकेर दी तो किसी ने पैरों में पहनने वाली चप्पल पर देवताओं की तस्वीर बना दी। क्रिएटिविटी के नाम पर धार्मिक भावनाओं की अनदेखी करना आम हो चुका है। खासकर हिंदू लोगों के टॉलरेंस का बहुत ज्यादा फायदा उठाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी पिछले कुछ समय से इस प्रकार के कई कांड सामने आते रहे हैं। पहले भी ऐसे कई विज्ञापनों के कारण भारत में कम्युनल विवाद बड़ा है और अब एक बार फिर से यह नया मामला।
कुल मिलाकर केरल का यह भगवान कृष्ण के साथ चिकन बिरयानी ऐड विवाद साफ तौर से दिखता है कि भारत जैसे विविधता वाले देश में धार्मिक प्रतीकों का उपयोग सावधानी से किया जाना चाहिए। प्रत्येक धर्म की अपनी मर्यादा और नियम होते हैं और हर धर्म का यह कर्तव्य है कि वह दूसरे धर्म का सम्मान करें।
मार्केटिंग और क्रिएटिविटी के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। क्योंकि लोगों की आस्था का सम्मान नहीं किया तो बाजार से दुकान समेटनी पड़ जाएगी। हालंकि अब इस मामले में देखना होगा की विवाद में आगे क्या होता है और क्या लोग इस विवाद से कुछ सीख लेंगे या आगे भी ऐसी गलतियां दोहराते रहेंगे
















