उत्तराखण्ड के Joshimath में मंगलवार सुबह से ही लोगों के मकान तोड़े की बात से गुस्सा भरा हुआ था। पहले चरण में जिन लोगों के मकान तोड़े जाने थे उनमें से कुछ लोगों ने अपने मकान से सामान को खाली कर जा रहे थे। बच्चे-महिलांए अपने घरों को देखकर विलख-विलख कर रो...

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सरकार के बिना मूल्यांकन मकान तोड़ने की बाद से गुस्सांए लोगों ने तहलीस को घेरकर धरना प्रर्दशन कर रहे हैं। लोगो का कहना हैं कि वह उनके मकानों का मुआवजा तय किए बिना वे अपने घरों को तोड़ने नहीं देंगे। साथ कुछ लोगों को यह भी कहना हैं कि उन्होंने बैंकों से होम लोन ले रखे हैं।
अगर घर टूट जांएगे तो वे कहां जांएगे और होम लोन को कैसे चुका पांयेगे। उनका कहना हैं कि हम अब बैंक की किश्ते चुकांए या फिर नए मकानों का किराया दें। बैंको की ओर से पीड़ित परिवारों को लोन मेटोरियम जैसी सुविधांए मिलनी चाहिए । यहां दिन भर प्रशासन और स्थानीय लोग आमने-सामने रहे।
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देश के राज्य शिक्षा मंत्री अजय भट्ट भी Joshimath पहुंचे और आईटीबीपी कार्यालय जाकर हालत का जायजा लिया। स्थानीय लोगों के गुस्से को देखते हुए देर शाम को मकानों को गिराने की कार्रवाई पर रोक लगाई गई। जिसकी आगे की कार्रवाई का निर्णय बुधवार मतलब आज लिया जायेगा। Joshimath में 678 मकानों को तोड़ा जाना हैं, जिनमें 2 बड़े होटल भी शामिल हैं.