भागीरथपुरा के लोग अशिक्षित, विधानसभा में कहा-ये धारावी का छोटा स्वरूप
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार बोले- काला पानी पिला रहे
भोपाल। MP Budget Session: विधानसभा के बजट सत्र के पांचवे दिन सदन में भागीरथपुरा कांड को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि घटना के बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। पीड़ितों के इलाज, पानी की जांच और नई पाइपलाइन का काम शुरू किया गया है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई है। उन्होंने कहा कि यह 90 साल पुरानी बस्ती है, जो मुंबई के धारावी का छोटा स्वरूप है। यहां अशिक्षित लोग रहते हैं, जहां काम करना नगर निगम कर्मचारियों के लिए मुश्किल होता है। इसी कारण नगर निगम के कर्मचारी ठीक तरीके से काम नहीं कर पा रहे थे।
उन्होंने माना कि नागरिकों ने पहले शिकायत की थी। इस मामले में देरी हुई। महापौर ने टेंडर जारी किए थे, लेकिन काम समय पर शुरू नहीं हो पाया। जांच के लिए कमेटी बनाई गई, जिसमें कुछ अधिकारी दोषी पाए गए। उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि यह घटना इंदौर के लिए कलंक के समान है, जबकि इंदौर लगातार स्वच्छता में नंबर एक रहा है। यहां स्वच्छता को संस्कार का रूप दिया गया है।
सिंघार बोले- लोगों को काला पानी पिलाया जा रहा
वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोगों को साफ पानी देना सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार को जवाब देना चाहिए, लेकिन सरकार जवाब नहीं दे रही है। काला पानी की सजा तो सुनी है, लेकिन यहां तो लोगों को काला पानी पिलाया जा रहा है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा ने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, जबकि विपक्ष ने इस मामले पर सदन में चर्चा कराने की मांग की।

नगर निकायों के लिए सस्ती बिजली योजना का सुझाव
प्रश्नकाल के दौरान विधायक अजय बिश्नोई ने विधानसभा में कहा कि भोपाल नगर निगम ने 10 मेगावाट क्षमता की बिजली के लिए एक निजी कंपनी से समझौता किया है। इस समझौते के तहत नगर निगम को लगभग 35 सालों तक 3 से 3.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था सभी नगर निगमों के लिए उपयोगी हो सकती है, लेकिन छोटी नगर पालिकाएं और नगर परिषदें अलग-अलग यह प्रक्रिया नहीं कर पाएंगी। उन्होंने सुझाव दिया कि इन सभी नगर निकायों के लिए संयुक्त रूप से बजट बनाकर एक टेंडर जारी किया जाए, जिससे उन्हें भी सस्ती बिजली उपलब्ध हो सके।
इसके अलावा, विधायकों ने बैराज निर्माण में अनियमितता, बिजली और भर्ती गड़बड़ी, जबलपुर की फ्री होल्ड भूमि, किसानों की फसल नुकसान और विकास कार्यों की गुणवत्ता जैसे अहम मुद्दे उठाए।
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सभापति बोले- ध्यानाकर्षण सूचनाएं पढ़ी जाएंगी, उसी के अनुसार सदन की कार्यवाही बढ़ेगी
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष ने एक बार फिर भागीरथपुरा मामले पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने इस विषय को गंभीर बताते हुए तत्काल बहस की आवश्यकता जताई। सभापति की आसंदी पर बैठीं अर्चना चिटनीस ने स्पष्ट किया कि पहले ध्यानाकर्षण सूचनाएं पढ़ी जाएंगी। उसी के अनुसार सदन की कार्यवाही आगे बढ़ेगी। मंत्री की अनुपस्थिति पर आपत्ति ध्यानाकर्षण सूचना पर बोलते हुए सोहनलाल वाल्मीकि ने कहा कि संबंधित विभाग के मंत्री सदन में मौजूद ही नहीं हैं, जो कि गंभीर विषय पर चर्चा के दौरान उचित नहीं है।
अंबाडा से गुमशुदा नाबालिग बालिकाओं की जांच की मांग सोहनलाल वाल्मीकि ने छिंदवाड़ा जिले के अंबाडा गांव से गुमशुदा नाबालिग बच्चियों की तलाश के लिए विशेष पुलिस दल गठित कर उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
मंत्री का जवाब- 9 सदस्यीय विशेष जांच दल गठित मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने जवाब देते हुए बताया कि इस मामले में 9 सदस्यीय विशेष जांच दल गठित किया गया है। 18 जुलाई 2025 को छिंदवाड़ा के एसपी द्वारा जांच दल बनाया गया था और बच्चियों की तलाश लगातार जारी है।
सीसीटीवी जांच और व्यापक तलाश अभियान उन्होंने बताया कि दोनों बालिकाएं स्कूल न जाकर ऑटो रिक्शा से जुन्नारदेव क्षेत्र की ओर गई थीं। संभावित मार्गों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई है। घटना की गंभीरता को देखते हुए रेडियो संदेश के माध्यम से सभी जिलों के थानों और चौकियों को सूचित कर व्यापक स्तर पर तलाश के निर्देश दिए गए हैं।
कई इलाकों में लगातार खोजबीन की जा रही बालिकाओं की खोज के लिए पुलिस कंट्रोल रूम भोपाल, छात्रावास, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, धर्मशाला, अस्पताल और अन्य धार्मिक स्थलों पर लगातार जांच की गई। स्कूल स्टाफ, परिजनों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर बयान दर्ज किए गए हैं।
मिशन वात्सल्य पोर्टल और इनाम की घोषणा
गुमशुदा बालिकाओं की जानकारी मिशन वात्सल्य पोर्टल पर दर्ज कर उनके फोटो पंपलेट जिले सहित अन्य जिलों और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित किए गए हैं। चार महीने बीतने और मानव तस्करी की आशंका को देखते हुए एसडीओपी जुन्नारदेव के नेतृत्व में अग्रिम विवेचना की जा रही है।
सूचना देने या आरोपियों की गिरफ्तारी में मदद के लिए 5,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया है, जबकि डीआईजी छिंदवाड़ा रेंज ने अतिरिक्त 20,000 रुपये के इनाम की घोषणा की है। साथ ही गजट प्रकाशन और प्रिंट, डिजिटल मीडिया तथा आकाशवाणी के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
लखन घनघोरिया पानी के सैंपल और रिपोर्ट लेकर पहुंचे
जबलपुर विधायक लखन घनघोरिया अपने साथ जबलपुर के महापौर और वर्तमान विधायकों के क्षेत्रों से लिए गए पानी के सैंपल तथा उनकी जांच रिपोर्ट लेकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने इन सैंपलों के माध्यम से जल गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।
कांग्रेस विधायकों की नारेबाजी से सदन में हंगामा विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने जोरदार नारेबाजी की, जिससे सदन का माहौल गरमा गया। विपक्ष ने पानी के मुद्दे को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और तत्काल चर्चा की मांग की।
नियम 55 में स्पष्ट है, चर्चा हो सकती है : नेता प्रतिपक्ष
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अध्यक्ष महोदय विद्वान हैं और नियम 55 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि मामला कोर्ट में लंबित होने के बावजूद उस पर चर्चा की जा सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर चर्चा से परहेज क्यों किया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चार–पांच लाख रुपये का मुआवजा कब दिया जाएगा, इस पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। जयवर्धन सिंह द्वारा उठाए गए 20 से 32 मौतों के अलग-अलग आंकड़ों पर भी चर्चा जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसका कोर्ट से कोई संबंध नहीं है। साथ ही 2019 की पॉल्यूशन कंट्रोल रिपोर्ट के अलर्ट पर भी चर्चा की जा सकती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या स्वच्छ पानी के मुद्दे पर भी चर्चा नहीं हो सकती?
स्पीकर का निर्णय, कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है स्पीकर ने कहा कि सदन की कार्रवाई आगे बढ़ चुकी है। ध्यानाकर्षण और बजट पर चर्चा होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न पक्षों को सुनने के बाद ही यह व्यवस्था दी गई है और विषय को ग्रहण नहीं किया गया है।
संसदीय कार्य मंत्री की आपत्ति संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि एक बार व्यवस्था दिए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष का इस प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने इस टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाने की मांग भी की।
भागीरथपुरा के स्थगन प्रस्ताव को मंजूरी नहीं, विपक्ष का प्रदर्शन
कटारे ने कहा कि लखन घनघोरिया द्वारा सदन में दिखाई गई अलग-अलग रंगों की पानी की बोतलों को देखकर भी अगर किसी का दिल नहीं पसीज रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि यदि हर ग्राम पंचायत और शहर के हर वार्ड में मौतें हो रही हैं, तो क्या इस मौन स्थिति पर चर्चा नहीं होनी चाहिए? कटारे ने कहा कि वे जनता के विश्वास के आधार पर सदन में पहुंचे हैं। ऐसे में जनता के मुद्दों पर चर्चा करना उनका दायित्व है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वे भिंड की जनता के प्रभावित होने या किसी घटना के इंतजार के बाद ही चर्चा करें? क्या तब जाकर यह विषय महत्वपूर्ण माना जाएगा? हालांकि भागीरथपुरा के स्थगन प्रस्ताव पर विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा की मंजूरी नहीं दी। कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा में प्रदर्शन किया।
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हेमंत कटारे- सदन नियमों से चलेगा, हालात से नहीं
विपक्ष के डिप्टी लीडर हेमंत कटारे ने शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहने के दौरान एक सब-ज्यूडिस मामला पेंडिंग होने के बावजूद सदन में एडजर्नमेंट मोशन पर चर्चा का मुद्दा उठाया। कटारे ने कहा कि सदन नियमों से चलेगा, हालात से नहीं। न तो मंत्री, न ही स्पीकर या बेंच पर बैठे चेयरमैन नियमों से ऊपर हैं।
मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि इस सिस्टम में स्पीकर की पोजीशन को आम तौर पर चैलेंज किया जाता है, न ही यह दावा किया जाता है कि कोई उनसे ऊपर नहीं है। नियम यह भी कहता है कि अगर जरूरी हो, तो स्पीकर सभी नियमों में ढील दे सकते हैं।अपने फैसले खुद ले सकते हैं। इसलिए, मेरा मानना है कि सभी को इसका पालन करना चाहिए।
जयवर्धन बोले- सरकार के जवाब में पहले पेज पर 20 मौतें लिखीं, परिशिष्ट में 32 की लिस्ट दी
जयवर्धन सिंह ने कहा कि यह मामला नैतिकता से जुड़ा है। जब भी किसी पुरस्कार की बात होती है तो नेता सामने आ जाते हैं, लेकिन जब जिम्मेदारी तय करने की बात आती है तो अधिकारियों को आगे कर दिया जाता है और मंत्री या महापौर पीछे हट जाते हैं। उन्होंने कहा कि स्थगन को स्वीकार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज ही उन्होंने मंत्री से पूछा था कि भागीरथपुरा प्रकरण में अब तक कितनी मौतें हुई हैं। जवाब के पहले पेज पर 20 का आंकड़ा दिया गया है, जबकि परिशिष्ट में 32 मौतें दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि 6 फरवरी 2026 तक 32 मौतों का उल्लेख उसी उत्तर के परिशिष्ट में है। ऐसे में प्रमुख पेज पर 20 का आंकड़ा देना त्रुटिपूर्ण है और इस पर चर्चा होनी चाहिए कि सही आंकड़ा क्यों नहीं दिया जा रहा।
उन्होंने कहा कि अब तक सिर्फ 20 लोगों को मुआवजा मिला है। बाकी मृतकों के परिजनों को सहायता कब दी जाएगी? मुख्यमंत्री ने 4 लाख रुपए की सहायता की घोषणा की थी, वह कब तक मिलेगी? इन सभी बातों की तारीख तय होनी चाहिए और इस पर चर्चा होनी चाहिए।
जयवर्धन सिंह ने कहा कि मंत्री ने स्वयं बताया कि वे 15 महीने तक इस विभाग के मंत्री रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि अमृत योजना के माध्यम से नल-जल और पेयजल योजनाओं पर बड़ी राशि खर्च की गई। उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं है कि हादसे के बाद क्या किया जाएगा, बल्कि यह है कि हादसे से पहले क्या चूक हुई।

