नई दिल्ली। इस साल पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) होने हैं, जिन्हें देश के राजनीतिक परिदृश्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए, चुनाव आयोग रविवार को चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा। इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल मई और जून में समाप्त होने वाला है। इसे ध्यान में रखते हुए, चुनाव आयोग आज शाम 4 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। इस कार्यक्रम के दौरान, आयोग उन राज्यों के लिए चुनाव कार्यक्रम और तारीखों की घोषणा कर सकता है जहाँ इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
2021 में इन सभी पाँच राज्यों के चुनावों की घोषणा 26 फरवरी को की गई थी। पिछली बार, बंगाल में चुनाव आठ चरणों में हुए थे। असम में तीन चरणों में मतदान हुआ था, जबकि तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में एक ही चरण में मतदान हुआ था।
आयोग की यह घोषणा राजनीतिक दलों और मतदाताओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि चुनाव कब और कैसे होंगे। चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों का पूरा कार्यक्रम बताया जाएगा। ये चुनाव न केवल संबंधित राज्यों के लिए, बल्कि अगले साल होने वाले राष्ट्रीय चुनावों के संदर्भ में भी बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
पश्चिम बंगाल में 3-4 चरणों में, असम में 2 चरणों में मतदान होने की संभावना
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में सबसे कड़ा चुनावी मुकाबला देखने की उम्मीद है, जहाँ मतदान 3 से 4 चरणों में हो सकता है। वहीं, असम में मतदान दो चरणों में होने की संभावना है। तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में चुनाव एक ही चरण में कराने की तैयारियाँ चल रही हैं।
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चरणबद्ध मतदान प्रक्रिया की योजना
यह ध्यान देने योग्य है कि चुनाव आयोग सुरक्षा व्यवस्था, मतदान कार्यक्रम और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध मतदान प्रक्रिया की योजना बना रहा है। खास तौर पर पश्चिम बंगाल में, बड़ी आबादी, संवेदनशील इलाकों और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए, कई चरणों में वोटिंग की प्रक्रिया को ज़रूरी माना गया है। इन तैयारियों के साथ, चुनावी प्रक्रिया को सुरक्षित, व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जा सकता है। ये चुनाव राजनीतिक पार्टियों और आम जनता, दोनों के लिए ही बहुत अहमियत रखते हैं। राजनीतिक पार्टियां अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देंगी, वहीं वोटर भी अपने वोट डालने की तैयारियां शुरू कर देंगे।
चुनाव की तारीखों के ऐलान और राजनीतिक महत्व
यह बात ध्यान देने लायक है कि चुनाव आयोग का यह ऐलान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोलकाता में हुई रैली के ठीक एक दिन बाद आया है। इस रैली के दौरान, उन्होंने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर आरोप लगाया था कि राज्य में चल रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) अभियान के बीच, वह कथित तौर पर अवैध प्रवासियों को बचाने की कोशिश कर रही है। इसी बीच, विपक्षी पार्टियों ने संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें उन्होंने SIR प्रक्रिया के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया था।
SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े ताज़ा अपडेट
खास बात यह है कि चुनाव आयोग ने जून 2025 में 11 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के तहत, सभी वोटरों को फॉर्म जमा करना ज़रूरी था, और कुछ वोटरों के लिए अपनी नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज़ दिखाना भी अनिवार्य था। इस प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी शामिल हैं। असम को इस राष्ट्रीय स्तर के अभियान से बाहर रखा गया था, क्योंकि वहां का ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स’ (NRC) अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है।
इसके बाद, चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप रजिस्टर्ड वोटरों की कुल संख्या में 189.8 मिलियन (18.98 करोड़) की शुद्ध कमी दर्ज की गई है। यह गहन समीक्षा प्रक्रिया फिलहाल उत्तर प्रदेश में चल रही है, और इसकी अंतिम सूची 10 अप्रैल को प्रकाशित की जानी है। बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए, इस प्रक्रिया को अप्रैल के बाद भी जारी रखने की योजना बनाई गई है।













