पूर्व भारतीय क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा ने रोहित शर्मा और विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के समय को लेकर खुलकर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि दोनों दिग्गजों का टेस्ट से बाहर जाना पूरी तरह “नेचुरल” नहीं लगता।
रोहित और विराट, दोनों ने मई 2025 में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा था — वो भी भारत के अहम इंग्लैंड टेस्ट दौरे से कुछ ही हफ्ते पहले। इस फैसले ने फैंस और क्रिकेट एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया।
अचानक हुए संन्यास, जिसने सबको चौंका दिया
क्रिकेट जगत को सबसे ज़्यादा हैरानी इस बात से हुई कि दोनों खिलाड़ियों के संन्यास की घोषणाएं लगभग एक साथ आईं।
रोहित शर्मा और विराट कोहली ने कुछ ही दिनों के अंतर में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया, जिससे भारतीय रेड-बॉल क्रिकेट के एक युग का अंत हो गया।
रोहित शर्मा ने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने फैंस का धन्यवाद किया और यह भी साफ किया कि वह वनडे क्रिकेट खेलते रहेंगे। इसके बाद विराट कोहली ने एक भावुक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने 14 साल के टेस्ट करियर को याद किया और कहा कि यह फॉर्मेट उनके क्रिकेट जीवन का सबसे अहम हिस्सा रहा है।
संन्यास का समय इसलिए भी सवालों में आया क्योंकि रोहित कुछ समय पहले ही इंग्लैंड दौरे की तैयारियों पर बात कर चुके थे, जबकि विराट कोहली अपनी फॉर्म सुधारने के लिए डोमेस्टिक रेड-बॉल क्रिकेट में भी वापसी कर चुके थे।
उथप्पा बोले – संन्यास “ऑर्गेनिक” नहीं लगा

अपने यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए रॉबिन उथप्पा ने साफ कहा कि यह संन्यास उन्हें किसी स्वाभाविक अंत जैसा महसूस नहीं हुआ। उथप्पा ने यह भी माना कि रोहित और विराट के फैसलों के पीछे की असली वजह वही जानते हैं, लेकिन बाहर से देखने पर पूरी स्थिति कुछ अलग और असामान्य लगती है। उन्होंने इशारों में कहा कि हो सकता है बाहरी दबाव भी एक कारण रहा हो, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उथप्पा के मुताबिक, जब इतने बड़े खिलाड़ी संन्यास लेते हैं, तो आमतौर पर वह एक धीरे-धीरे होने वाली प्रक्रिया होती है। लेकिन यहां जो अचानक हुआ, उसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
ऑस्ट्रेलिया दौरा और रोहित शर्मा का मुश्किल दौर
उथप्पा ने रोहित शर्मा के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर प्रदर्शन का भी ज़िक्र किया, जहां कप्तान का बल्ला कुछ खास नहीं चला।
उनका मानना है कि ऐसे समय में रोहित को खुद पर ज़्यादा दबाव डालने के बजाय थोड़ा ब्रेक लेना चाहिए था। उथप्पा ने सुझाव दिया कि अगर रोहित छह महीने का ब्रेक लेकर फिटनेस और रिकवरी पर ध्यान देते, तो वह और मज़बूती से वापसी कर सकते थे। उनके अनुसार, रोहित की काबिलियत पर कभी कोई सवाल नहीं रहा — मामला सिर्फ सही समय, वर्कलोड और मानसिक ताज़गी का था।
भारतीय टेस्ट टीम के लिए मुश्किल दौर
उसी समय भारतीय टेस्ट टीम भी एक चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही थी।
ऑस्ट्रेलिया में खेली गई बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही, वहीं न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज़ हार के बाद सीनियर खिलाड़ियों पर दबाव और बढ़ गया। इन सबके बावजूद, ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद रोहित और विराट दोनों ने रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लिया, जिससे यह साफ दिखा कि वे अब भी रेड-बॉल क्रिकेट को लेकर गंभीर थे। इसी वजह से उनका टेस्ट से संन्यास लेना कई लोगों को और भी ज़्यादा चौंकाने वाला लगा।
व्हाइट-बॉल क्रिकेट में अब भी दिख रही भूख
हालांकि टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया गया है, लेकिन उथप्पा का मानना है कि दोनों खिलाड़ियों के अंदर की आग अभी बुझी नहीं है।
उन्होंने वनडे क्रिकेट में दोनों की नई ऊर्जा और भूख की तारीफ की और कहा कि उन्हें खेलते देखना अब भी उतना ही शानदार है। उथप्पा के मुताबिक, उनकी आंखों में आज भी कुछ अधूरा सा नज़र आता है — खासकर जब 2027 वनडे वर्ल्ड कप को ध्यान में रखा जाए।
टेस्ट के बाद भी दमदार प्रदर्शन
संन्यास के बाद दोनों खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से यह साबित भी किया।
रोहित शर्मा ने ऑस्ट्रेलिया दौरे में एक शतक और एक अर्धशतक लगाया, इसके बाद उन्होंने भारत में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी लगातार रन बनाए। वहीं विराट कोहली ने ऑस्ट्रेलिया में धीमी शुरुआत के बाद जबरदस्त वापसी की और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगातार दो शतक जड़े। इसके अलावा, उन्होंने 15 साल बाद विजय हज़ारे ट्रॉफी में वापसी की और आंध्र प्रदेश के खिलाफ शतक व गुजरात के खिलाफ अर्धशतक लगाया, जिससे उनका कमिटमेंट साफ झलका।
सवाल अब भी हैं, लेकिन जुनून बरकरार
रॉबिन उथप्पा के बयान के बाद रोहित शर्मा और विराट कोहली के टेस्ट संन्यास को लेकर बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है।
हालांकि सच्चाई क्या है, यह सिर्फ दोनों खिलाड़ी ही जानते हैं, लेकिन उनके संन्यास का समय अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
इतना ज़रूर साफ है कि ये दोनों दिग्गज आज भी पूरी तरह प्रेरित हैं।
भले ही टेस्ट क्रिकेट का अध्याय बंद हो चुका हो, लेकिन वनडे क्रिकेट में उनके प्रदर्शन यह साबित करते हैं कि जुनून, अनुशासन और खेल के प्रति प्यार आज भी ज़िंदा है।












