दिल्ली में 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' प्रदर्शन के बाद हालात अब भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में 130 से अधिक पुलिसकर्मी और करीब 65 छात्र घायल हुए, जबकि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में अब तक 15 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। राजधानी के जंतर-मंतर और उसके आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी लगातार मौजूद हैं। पुलिस का कहना है कि औसतन करीब 10 हजार लोग प्रतिदिन इस क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 3 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।

दिल्ली में 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' प्रदर्शन के बाद हालात अब भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में 130 से अधिक पुलिसकर्मी और करीब 65 छात्र घायल हुए, जबकि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में अब तक 15 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। राजधानी के जंतर-मंतर और उसके आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी लगातार मौजूद हैं। पुलिस का कहना है कि औसतन करीब 10 हजार लोग प्रतिदिन इस क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 3 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए Facial Recognition System (FRS) का इस्तेमाल शुरू किया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस तकनीक की मदद से ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और जो प्रदर्शन स्थल तक पहुंचे हैं। सूत्रों का दावा है कि अब तक 2,000 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की जा चुकी है, जिनका नाम पहले किसी आपराधिक मामले में सामने आ चुका है। इसके अलावा पुलिस यह भी नजर रख रही है कि प्रदर्शन स्थल तक लोग किस तरह पहुंच रहे हैं और वहां की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए 'संसद चलो' मार्च में बड़ी संख्या में छात्र और प्रदर्शनकारी शामिल हुए। जैसे-जैसे भीड़ आगे बढ़ी, पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक दिया। इसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। इस झड़प में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए। घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठाए गए। वहीं कुछ याचिकाओं में भी पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने के आरोप लगाए गए। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने पथराव किया और माहौल को हिंसक बनाने की कोशिश की, जिसके चलते कार्रवाई करनी पड़ी।
इस पूरे मामले में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि आशुतोष रंका ने भी दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान बच्चों के साथ मारपीट की गई, स्वयंसेवकों को सड़कों पर घसीटा गया, उनकी पसलियां तोड़ी गईं और युवा लड़कियों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। रंका ने कहा कि उनकी पार्टी भी उन पुलिसकर्मियों की सूची तैयार करेगी, जिन पर इस तरह की कार्रवाई के आरोप हैं। उनका कहना है कि यह पहचान Facial Recognition System से नहीं बल्कि आम लोगों की मदद से की जाएगी और पूरी सूची सार्वजनिक की जाएगी।
21 जुलाई को संसद मार्ग और कनॉट प्लेस पुलिस थानों में प्रदर्शन से जुड़े मामलों में 15 एफआईआर दर्ज की गईं। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023, आर्म्स एक्ट, 1959 और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने संबंधी कानून (PDPP Act) की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। संसद मार्ग थाने में दर्ज एफआईआर में सरकारी आदेश की अवहेलना, सरकारी कार्य में बाधा डालने, लोक सेवक को उसके कर्तव्य से रोकने तथा सरकारी कर्मचारी पर बल प्रयोग से जुड़ी धाराएं शामिल की गई हैं। पुलिस का कहना है कि सभी मामलों की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस और प्रदर्शनकारी दोनों अपने-अपने दावों पर कायम हैं। एक तरफ पुलिस सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रही है, वहीं प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।