जब भारत जैसे देश में, जहां हर साल करीब 800 टन सोना खरीदा जाता है, वहां प्रधानमंत्री ऐसा कहें तो बात छोटी नहीं होती। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारतीय परिवारों से अपील की कि वे कम से कम एक साल तक सोने की खरीदारी रोकने पर विचार करें। उन्होंने इसे सिर्...

जब भारत जैसे देश में, जहां हर साल करीब 800 टन सोना खरीदा जाता है, वहां प्रधानमंत्री ऐसा कहें तो बात छोटी नहीं होती। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भारतीय परिवारों से अपील की कि वे कम से कम एक साल तक सोने की खरीदारी रोकने पर विचार करें। उन्होंने इसे सिर्फ आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि देशहित से जुड़ा कदम बताया। यह बयान इसलिए भी बड़ा बन गया क्योंकि भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं होता। यह बचत है, सुरक्षा है, इज्जत है, शादी-ब्याह की परंपरा है और कई परिवारों के लिए भविष्य की गारंटी भी। अब सवाल यही है कि आखिर पीएम मोदी ने ऐसा क्यों कहा? और क्या सच में लोगों को सोना खरीदना बंद कर देना चाहिए?
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने सीधे भारतीय परिवारों से अपील करते हुए कहा कि अगर लोग कुछ समय के लिए सोने की खरीद कम कर दें, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा हो सकता है। उन्होंने समझाया कि भारत हर साल भारी मात्रा में सोना विदेशों से आयात करता है। इससे देश का बहुत सारा विदेशी मुद्रा भंडार बाहर चला जाता है, जिसका असर रुपये और देश के व्यापार घाटे पर पड़ता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर है। साल 2023-24 में भारत ने 45 बिलियन डॉलर से ज्यादा का सोना आयात किया। यानी अरबों डॉलर देश से बाहर गए। मोदी का तर्क साफ था
अगर लोग उसी पैसे का कुछ हिस्सा बैंकिंग, निवेश या दूसरे वित्तीय विकल्पों में लगाएं, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। उन्होंने इसे कोई आदेश या कानून की तरह पेश नहीं किया। न कोई बैन लगाया गया, न टैक्स बढ़ाया गया। यह सिर्फ एक देशहित में अपील थी।
भारत में सोने की डिमांड सिर्फ फैशन की वजह से नहीं है। गांवों और छोटे शहरों में आज भी लोग सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं। लेकिन यही आदत देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा दबाव भी बनाती है। जब भी डॉलर मजबूत होता है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत बढ़ती है, भारत का इंपोर्ट बिल और ज्यादा बढ़ जाता है। अप्रैल 2024 में भारत का गोल्ड इंपोर्ट पिछले साल के मुकाबले करीब 194% बढ़कर लगभग 3.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया था। इसका सीधा असर भारत के Current Account Deficit यानी CAD पर पड़ता है। जब देश ज्यादा आयात करता है और कम निर्यात, तो रुपये पर दबाव बढ़ता है और महंगाई भी बढ़ सकती है।
सोने की खरीद कम कराने के लिए सरकार और Reserve Bank of India पहले भी कई स्कीम ला चुके हैं। इनमें Gold Monetisation Scheme, Sovereign Gold Bonds यानी SGBs और गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने जैसे कदम शामिल रहे हैं। साल 2023 में गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी 15% तक पहुंच गई थी, हालांकि बाद में 2024 के बजट में इसे घटाकर 6% कर दिया गया। लेकिन सच यही है कि इन कोशिशों से भारतीयों की सोना खरीदने की आदत में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया।
पीएम मोदी का मतलब सिर्फ “सोना मत खरीदो” नहीं था। सरकार चाहती है कि लोग फिजिकल गोल्ड की जगह दूसरे विकल्प अपनाएं। सबसे ज्यादा जोर Sovereign Gold Bonds पर दिया जा रहा है। यह सरकार समर्थित बॉन्ड होते हैं जिनमें सोने की कीमत के हिसाब से फायदा मिलता है और ऊपर से करीब 2.5% सालाना ब्याज भी। इसके अलावा Gold ETF और Digital Gold जैसे विकल्प भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। आज कई प्लेटफॉर्म 1 रुपये से भी डिजिटल गोल्ड खरीदने की सुविधा दे रहे हैं। सरकार का कहना है कि इससे लोगों को सोने का फायदा भी मिलेगा और देश पर इंपोर्ट का बोझ भी कम होगा।
भारत में शादी बिना सोने के अधूरी मानी जाती है। कई परिवारों में बेटी के जन्म से ही उसके लिए सोना जोड़ना शुरू हो जाता है। गांवों में जहां बैंकिंग सुविधाएं कम हैं, वहां सोना ही लोगों की “इमरजेंसी सेविंग” होता है।राजस्थान की एक दादी को अगर आप कहें कि सोने की चूड़ी की जगह बॉन्ड पेपर रख लो, तो यह बात उन्हें समझाना आसान नहीं होगा। यानी यह सिर्फ आर्थिक मामला नहीं, बल्कि भावनाओं और भरोसे से भी जुड़ा हुआ है।
पीएम मोदी के बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर बाजार तक अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोगों ने चिंता जताई कि अगर लोग सोना खरीदना कम कर देंगे तो लाखों लोगों के रोजगार पर असर पड़ेगा। भारत का जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर करीब 46 लाख लोगों को रोजगार देता है। वहीं दूसरी तरफ कई फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स ने मोदी की बात का समर्थन किया। उनका कहना है कि फिजिकल गोल्ड लंबे समय में उतना अच्छा रिटर्न नहीं देता जितना लोग मानते हैं। पिछले 10 सालों में जहां Nifty 50 ने लगभग 14.5% सालाना रिटर्न दिया, वहीं सोने का रिटर्न करीब 9-11% के बीच रहा। ऊपर से मेकिंग चार्ज और बेचने में होने वाला नुकसान अलग।
1963 में भारत सरकार Gold Control Act लेकर आई थी। उस समय लोगों के पास कितना सोना हो सकता है, इस पर सीमा तय कर दी गई थी। लेकिन इसका उल्टा असर हुआ और गोल्ड का काला बाजार बढ़ गया। आखिरकार 1990 में यह कानून हटाना पड़ा। 2013 में जब भारत का Current Account Deficit रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, तब भी सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट पर भारी ड्यूटी लगाई थी। लेकिन लोगों की खरीदारी पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। इतिहास यही बताता है कि भारत में सोने की मांग सिर्फ नियमों से नहीं बदलती।
फिलहाल ऐसा होने की संभावना कम दिखती है। 2024 में भारत में सोने की कीमत 75,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच चुकी थी। इसके पीछे वैश्विक कारण हैं जैसे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें, जियोपॉलिटिकल तनाव और दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों की खरीदारी। मोदी के बयान से तुरंत कीमतों पर बड़ा असर शायद न पड़े। लेकिन अगर बड़ी संख्या में लोग कुछ समय के लिए खरीदारी टाल देते हैं, तो त्योहारों और शादी के सीजन में डिमांड थोड़ी नरम पड़ सकती है।