Gold Silver Price Today: भारत में सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे Import Duty Cut की चर्चा अहम वजह बनी है। जानें MCX रेट और आगे का अनुमान।

सोने और चांदी की कीमतों में भारतीय बाजार और अंतरराष्ट्रीय बाजार के बीच इस समय बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। जहां ग्लोबल बुलियन मार्केट में तेजी रही, वहीं भारत में Gold Silver Price Crash जैसी स्थिति देखने को मिली।
27 अगस्त को घरेलू बाजार में सोना 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास या उससे नीचे कारोबार करती नजर आई। बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह सोने और चांदी पर आयात शुल्क घटाए जाने की संभावित चर्चा को माना जा रहा है।
हालांकि, यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार ने अभी आयात शुल्क घटाने का कोई अंतिम फैसला नहीं किया है। मीडिया रिपोर्टों में केवल इस पर विचार-विमर्श की बात सामने आई है।
मौजूदा प्रभावी आयात शुल्क सोने और चांदी पर करीब 15 फीसदी है। ज्वैलरी और सराफा उद्योग की ओर से इसे घटाकर 6 फीसदी करने की मांग किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
अगर सरकार वास्तव में शुल्क को 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी करती है, तो आयातित सोने की घरेलू लागत में महत्वपूर्ण कमी आएगी। इसका असर बाजार में मौजूद पुराने स्टॉक की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
यही संभावना फिलहाल कारोबारियों और खरीदारों के बीच अनिश्चितता पैदा कर रही है।
केंद्र सरकार ने 13 मई 2026 से सोने और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क को 6 फीसदी से बढ़ाकर करीब 15 फीसदी कर दिया था।
सरकारी आर्थिक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव के तहत Basic Customs Duty को 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी किया गया और Agriculture Infrastructure and Development Cess को 5 फीसदी किया गया। यह कदम गैर-जरूरी आयात को नियंत्रित करने और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के उद्देश्य से उठाया गया था।
इस फैसले के बाद घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तत्काल तेज उछाल देखने को मिला था।
इस समय भारतीय फिजिकल गोल्ड मार्केट में खरीदार नई खरीदारी को लेकर सतर्क हैं। वजह साफ है—अगर सरकार आयात शुल्क घटा देती है तो कम ड्यूटी के कारण आयातित सोने की लागत अचानक कम हो सकती है।
ऐसे में जिन डीलर्स के पास मौजूदा 15 फीसदी ड्यूटी के हिसाब से खरीदा गया स्टॉक है, उन्हें कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए डिस्काउंट देना पड़ सकता है।
इसी वजह से घरेलू सोने का भाव उसकी अनुमानित landed cost की तुलना में काफी नीचे कारोबार कर रहा है। बाजार में यह अंतर सरकार के फैसले को लेकर जारी अनिश्चितता को दिखाता है।
27 अगस्त को उपलब्ध कारोबार आंकड़ों के अनुसार, MCX पर सोना दबाव में रहा। दिन के कारोबार में सोने की कीमत करीब 1,59,053 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास थी। इसका इंट्राडे हाई करीब 1,60,898 रुपये और लो 1,56,692 रुपये रहा।
चांदी करीब 2,39,672 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। दिन के दौरान इसका हाई 2,42,999 रुपये और लो 2,36,878 रुपये रहा।
ये वायदा बाजार के आंकड़े हैं और दिन के दौरान कीमतों में लगातार बदलाव हो सकता है।
भारतीय बाजार की चाल इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार से अलग दिखाई दे रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 27 अगस्त को ग्लोबल स्पॉट गोल्ड में तेजी रही और कीमत करीब 4,630 डॉलर प्रति औंस तक पहुंची थी। स्पॉट सिल्वर भी करीब 69 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक मजबूत हुआ।
इसके उलट, घरेलू बाजार में सोने पर दबाव रहा। यह अंतर सामान्य परिस्थितियों से अलग है और मुख्य रूप से घरेलू प्रीमियम, डिस्काउंट तथा संभावित आयात शुल्क बदलाव की उम्मीद से जुड़ा हुआ है।
अगर सरकार 15 फीसदी से 6 फीसदी आयात शुल्क करने का फैसला लेती है, तो घरेलू सोने की landed cost पर सीधा असर पड़ेगा। इससे भारतीय बाजार में सोने की कीमतों की re-pricing हो सकती है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सोना बिल्कुल 9 फीसदी सस्ता हो जाएगा। वास्तविक खुदरा कीमत पर अंतरराष्ट्रीय सोने का भाव, डॉलर-रुपया विनिमय दर, स्थानीय प्रीमियम/डिस्काउंट, टैक्स और बाजार की मांग समेत कई कारकों का असर पड़ता है।
इसलिए 9 फीसदी की संभावित गिरावट को एक सीधा निश्चित रिटेल प्राइस कट मानना सही नहीं होगा।
अगर आयात शुल्क में कटौती नहीं होती है, तो मौजूदा डिस्काउंट धीरे-धीरे कम हो सकता है। बाजार में अनिश्चितता घटने पर खरीदार और डीलर्स फिर से सामान्य कीमतों पर कारोबार कर सकते हैं।
वहीं, अगर सरकार कटौती की घोषणा करती है, तो पहले से मौजूद हाई-ड्यूटी स्टॉक पर दबाव बढ़ सकता है और घरेलू बाजार में तेज पुनर्मूल्यांकन देखने को मिल सकता है।
यानी फिलहाल सोने-चांदी का बाजार सरकार के अगले नीति संकेतों पर काफी हद तक निर्भर है।
मौजूदा स्थिति में घरेलू सोने और चांदी की कीमतों पर केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा देखकर अनुमान लगाना मुश्किल है। भारत में आयात शुल्क से जुड़ी संभावित नीति का असर स्थानीय कीमतों पर काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसके अलावा, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद, डॉलर की चाल, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाएं और सुरक्षित निवेश की मांग भी अंतरराष्ट्रीय बुलियन कीमतों को प्रभावित करती हैं।
इसलिए अभी सबसे अहम बात यह है कि 6 फीसदी आयात शुल्क की चर्चा को सरकारी फैसला न माना जाए। फिलहाल यह रिपोर्टेड प्रस्ताव/मांग और विचार-विमर्श का विषय है, अंतिम अधिसूचना नहीं। M