आगरा से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सोशल मीडिया पर फैल रहे अश्लील कंटेंट को लेकर एक मां ने पुलिस से शिकायत की है। महिला का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे वीडियो बच्चों की मानसिक स्थिति पर गलत असर डाल रहे हैं, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस नियंत्रण नजर नहीं आ रहा।
बच्चों के मोबाइल पर अचानक आया आपत्तिजनक वीडियो
आगरा के ताजगंज क्षेत्र की रहने वाली रूबी तोमर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके बच्चे मोबाइल पर इंस्टाग्राम रील्स देख रहे थे। इसी दौरान अचानक एक अश्लील और आपत्तिजनक वीडियो सामने आ गया। महिला का कहना है कि इस तरह का कंटेंट बच्चों के लिए बेहद नुकसानदायक है और इससे उनके सोचने-समझने की क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
महिला इन्फ्लुएंसर पर गंभीर आरोप

इंस्टाग्राम पर अश्लील वीडियो पोस्ट करने का दावा – रूबी तोमर ने आरोप लगाया कि कमला नगर क्षेत्र की रहने वाली गौरी नाम की महिला सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर लगातार इंस्टाग्राम पर अश्लील और आपत्तिजनक वीडियो पोस्ट कर रही है। उनका कहना है कि गौरी के वीडियो बच्चों ने देख लिए, जिससे उन पर गलत प्रभाव पड़ा। महिला ने इसे समाज और खासकर बच्चों के भविष्य के लिए खतरनाक बताया।
करोड़ों व्यूज और लाखों फॉलोअर्स का दावा
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संबंधित वीडियो को करीब डेढ़ करोड़ लोग देख चुके हैं
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इस नाम से दो इंस्टाग्राम आईडी चलाई जा रही हैं
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दोनों अकाउंट्स पर मिलाकर करीब 4.5 लाख फॉलोअर्स हैं
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फेसबुक पर भी लगभग 10 हजार फॉलोअर्स मौजूद हैं, महिला का आरोप है कि वीडियो के कमेंट सेक्शन में भी ऐसे शब्द लिखे गए हैं, जिन्हें सार्वजनिक रूप से दिखाया नहीं जा सकता।
साइबर क्राइम थाने में दर्ज हुआ मामला
रूबी तोमर ने इस मामले को लेकर साइबर क्राइम थाना में केस दर्ज कराया है। उन्होंने मांग की है कि इस तरह की सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई की जाए। पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर इन्फ्लुएंसर गौरी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
सोशल मीडिया कंटेंट पर पहले ही सख्त रुख अपना चुकी है सरकार
गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार और आईटी मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अश्लील, फेक और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर चेतावनी दी थी। सरकार ने साफ कहा था कि अगर प्लेटफॉर्म्स ने लापरवाही बरती, तो उन्हें मिलने वाली कानूनी छूट (Safe Harbour) खत्म की जा सकती है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि सोशल मीडिया पर कंटेंट की निगरानी कितनी जरूरी है, खासकर तब जब इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ रहा हो।
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