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डॉ. धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि बक्सवाहा में राजेश यादव के सहयोग से उन्होंने हीरा खनन स्थान और शैलचित्र स्थान का भ्रमण किया। इस दौरान वहां के स्थानीय नागरिकों से भी बातचीत की। जिससे उन्हें जानकारी मिली कि उनकी जीविका, शिक्षण उसी जंगल पर निर्भर है, जिसे भविष्य में काटे जाने पर विचार हुआ है।


