देशभर में पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने राज्यों को निर्देश दिया है कि 18 वर्ष से कम उम्र के सभी छात्रों और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड (Criminal Record) नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। साथ ही, इन छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR के आधार पर फिलहाल कोई कड़ी कार्रवाई (Coercive Action) न करने का भी आदेश दिया गया है।

देशभर में पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने राज्यों को निर्देश दिया है कि 18 वर्ष से कम उम्र के सभी छात्रों और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड (Criminal Record) नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। साथ ही, इन छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR के आधार पर फिलहाल कोई कड़ी कार्रवाई (Coercive Action) न करने का भी आदेश दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल उन छात्रों को मिलेगी जिनकी उम्र 18 साल से कम है या जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। जिन लोगों के खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं, उन्हें इस अंतरिम राहत का लाभ नहीं मिलेगा।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि वह पुलिस की कथित ज्यादती और प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की जांच के लिए हाई पावर कमेटी गठित करने पर विचार कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार के साथ-साथ महाराष्ट्र, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह सुनवाई उन याचिकाओं पर हो रही थी, जिनमें देशभर में पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग के आरोप लगाए गए हैं। इनमें 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प का मामला भी शामिल है। एक याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि बिहार में एक पुलिस अधिकारी ने प्रदर्शन के दौरान AK-47 का इस्तेमाल किया था।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि अगर किसी भी पक्ष ने कानून का उल्लंघन किया है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।