Ganesh Chaturthi का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व भगवान गणेश की आराधना का अवसर है, जिन्हें किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। गणेश चतुर्थी विशेष रूप से महाराष्ट्र और गुजरात में मनाई जाती है। इस 10 दिवसीय पर्व में गणपति बप्पा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। गणेश जी को 10 दिनों तक घरों, पंडालों और मंदिरों में स्थापित किया जाता है। इसके बाद 10वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन किया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर्व पर घर में विघ्नहर्ता गणेश की स्थापना और पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और अधूरे कार्य पूरे होते हैं। 10 दिनों तक पूजा-अर्चना करने के बाद, अगले वर्ष गणपति बप्पा के जल्दी आने की कामना करते हुए मूर्ति का विसर्जन किया जाता है।
Ganesh Chaturthi का आध्यात्मिक महत्व

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के पृथ्वी पर अवतरण का उत्सव है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने चंदन के लेप से गणेश जी की रचना की और उन्हें जीवनदान दिया। बाद में गणेश जी को भगवान शिव सहित सभी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हुआ और वे सभी देवताओं में प्रथम पूज्य माने गए। ऐसा माना जाता है कि यह त्योहार नकारात्मकता को दूर करता है, नई शुरुआत करता है और भक्तों को सफलता, समृद्धि और बुद्धि का आशीर्वाद देता है।
2025 में गणपति उत्सव कब है?

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2025 में गणेश चतुर्थी का उत्सव 27 अगस्त से शुरू होकर 10 दिनों तक चलेगा। अगले 10 दिनों तक, हर घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है। फिर 6 सितंबर 2025 को गणपति विसर्जन होगा। इसी दिन अनंत चतुर्दशी भी पड़ती है, जो गणेश उत्सव के समापन का प्रतीक है।
गणपति स्थापना 2025 शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी का उत्सव 27 अगस्त से शुरू होगा और इस दिन गणेश जी की स्थापना के लिए मध्याह्न काल सबसे उपयुक्त माना जाता है। मान्यता है कि इसी समय उनका अवतरण हुआ था। ऐसे में 27 अगस्त 2025 को गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त 27 अगस्त को सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक रहेगा।
Ganesh Chaturthi 2025: गणेश स्थापना पूजा विधि

- घर में गणेश जी की स्थापना करने से पहले, पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ़ करें और उसे फूलों, रंगोली और सजावटी सामग्री से सजाएँ।
- शुभ मुहूर्त में, गणपति बप्पा की मूर्ति को लाल या पीले कपड़े से ढकी वेदी पर स्थापित करें।
- पूजा शुरू करने से पहले, हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करके गणेश जी का आह्वान करें।
- इसके बाद, उनकी मूर्ति को पंचामृत स्नान कराएँ और उन्हें नए वस्त्र और आभूषण पहनाएँ।
- भगवान को मोदक और लड्डू का भोग लगाएं, साथ ही दूर्वा, सिंदूर और लाल फूल भी चढ़ाएं।
- अंत में पूरे परिवार के साथ भगवान गणेश की आरती करें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
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