जब से केंद्र सरकार ने पिछले नवंबर में 8वें सेंट्रल पे कमीशन के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी किए हैं, कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। वहीं, कई कर्मचारी प्रतिनिधि संस्थाओं ने चिंता जताई है कि आखिरी ढांचे में उनकी कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल नहीं की गई हैं। इस बार चर्चा सिर्फ फिटमेंट फैक्टर या बेसिक पे तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल सुविधाओं और अन्य भत्तों में सुधार की भी जोरदार मांग की जा रही है।
फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) बढ़ाने की मांग सबसे अहम मुद्दा
कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग है कि नॉन-CGHS इलाकों में फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को मौजूदा 1,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह किया जाए। उनका तर्क है कि मौजूदा राशि वर्तमान महंगाई और स्वास्थ्य खर्च के हिसाब से बहुत कम है। खासकर उन पेंशनर्स और कर्मचारियों के लिए जो शहरों या CGHS नेटवर्क से बाहर रहते हैं, यह राशि पर्याप्त नहीं है। कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि स्वास्थ्य खर्च लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में मेडिकल अलाउंस को वास्तविक जरूरतों के हिसाब से बढ़ाना जरूरी है। इस प्रस्ताव पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है और इसे कर्मचारियों की लंबित मांगों का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है।
कर्मचारी संगठनों की अन्य प्रमुख मांगें: फिटमेंट फैक्टर, OPS बहाली और भत्ते

कर्मचारी संगठनों ने पिछले साल जनवरी से ही सरकार के सामने अपनी मांगें रखनी शुरू कर दी थीं। नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ साइड ने ToR पर सुझाव दिए, लेकिन कई अहम मुद्दे जैसे फिटमेंट फैक्टर, OPS की बहाली और मेडिकल सुविधाओं की स्पष्ट जानकारी अंतिम ToR में शामिल नहीं हो सकीं। ड्राफ्टिंग कमेटी की मीटिंग 25 फरवरी से राजधानी में हुई, जिसमें लगभग 1 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़ी अहम मांगें शामिल की गईं। इसे कर्मचारियों और पेंशनर्स के हित में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।
कमीशन की प्रक्रिया और ड्राफ्टिंग मीटिंग का महत्व
8वें पे कमीशन को हाल ही में जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में दफ्तर दिया गया है। कमीशन की चेयरपर्सन सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई हैं। इसे कमीशन के कामकाज की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।
कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए संभावित राहत
अब सबकी निगाहें कमीशन की आधिकारिक कार्रवाई और उसकी सिफारिशों पर हैं। अगर FMA को 20,000 रुपये प्रति माह तक बढ़ाने जैसी मांगें मानी जाती हैं, तो यह विशेषकर नॉन-CGHS इलाकों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। कर्मचारी संगठन फिलहाल अपने एजेंडा को और मजबूत करने में लगे हुए हैं। आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा कि सरकार इन मांगों को कितनी हद तक स्वीकार करती है और 8वां पे कमीशन कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।
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