Fish Cage Culture : मछली पालन के ज़रिए अपनी आय बढ़ाना चाहने वाले मछुआरों और सहकारी समितियों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है। मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी नई ‘एकीकृत मत्स्य नीति 2026’ के तहत ‘केज कल्चर योजना’ शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल करके जलाशयों में मछली उत्पादन को बढ़ावा देना और मछुआरों की आय बढ़ाना है। इस योजना की एक खास बात यह है कि सरकार प्रति केज लाखों रुपये की सब्सिडी दे रही है। अगर आप भी मछली पालन से बेहतर कमाई करना चाहते हैं तो ये योजना आपके लिए एक सुनहरा मौका साबित हो सकती है। आवेदन करने की अंतिम तारीख 20 अप्रैल तय की गई है। इसलिए अपनी तैयारी पहले से ही कर लें।

 

‘केज कल्चर योजना’ क्या है और कितने केज लगाए जाएंगे?

इस योजना के तहत, मध्य प्रदेश सरकार के ‘मत्स्य कल्याण और मत्स्य विकास विभाग’ ने पूरे राज्य में कुल 10,000 केज लगाने का लक्ष्य रखा है। केज कल्चर में, मछलियों को पालने के लिए जलाशय के अंदर एक मज़बूत, जाल जैसी संरचना लगाई जाती है। इस तरीके से कम जगह में ज़्यादा उत्पादन किया जा सकता है, जिससे मछुआरों की कमाई बढ़ती है। नीति के अनुसार, विभाग 100 से 1,000 हेक्टेयर आकार वाले जलाशयों में इस योजना को सीधे लागू करेगा, जबकि 1,000 हेक्टेयर से बड़े जलाशयों में, यह योजना ‘मत्स्य महासंघ’ के ज़रिए लागू की जाएगी।

Fish Cage Culture
Fish Cage Culture

कौन उठा सकता है इस योजना का लाभ

SC, ST, OBC और सामान्य वर्ग के पारंपरिक मछुआरे साथ ही महिलाओं के समूह, स्वयं सहायता समूह (SHGs) और मत्स्य सहकारी समितियां इस योजना के तहत आवेदन करने के पात्र हैं।

सरकार ने हर एक लाभार्थी को ज़्यादा से ज़्यादा 18 केज आवंटित करने का प्रावधान किया है। वहीं, किसी सहकारी समिति या संस्था को ज़्यादा से ज़्यादा 72 केज तक आवंटित किए जा सकते हैं। इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होता है कि छोटे मछुआरे भी इस योजना का लाभ उठा सकें, जबकि बड़ी समितियां बड़े पैमाने पर मछली उत्पादन कर सकें। यह योजना उन लोगों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है जो आधुनिक तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल करके जलाशयों में मछली पालन करना चाहते हैं।

 

कितनी सब्सिडी दी जाएगी?

इस योजना के तहत सब्सिडी ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) के माध्यम से वितरित की जाएगी। प्रति पिंजरे की इकाई लागत ₹3 लाख निर्धारित की गई है। SC और ST श्रेणियों से संबंधित व्यक्तियों, साथ ही सभी सामाजिक श्रेणियों की महिलाओं को 60% की सब्सिडी मिलेगी, जो प्रति पिंजरा ₹1.80 लाख होगी।

सामान्य और OBC श्रेणियों से संबंधित पुरुषों को 40% की सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जो प्रति पिंजरा ₹1.20 लाख होगी। सरकार प्रारंभिक लागत का एक बड़ा हिस्सा स्वयं वहन कर रही है, जिससे मछुआरों पर वित्तीय बोझ कम होता है और वे आधुनिक तरीकों का उपयोग करके मछली पालन शुरू करने में सक्षम हो पाते हैं।

 

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आवेदन कैसे करें और अंतिम तिथि

इच्छुक मछुआरे और मछुआरा सहकारी समितियाँ अपने आवेदन बालाघाट स्थित ‘मत्स्य पालन उप निदेशक’ (Deputy Director of Fisheries) के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जमा कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 20 अप्रैल निर्धारित की गई है। इसके बाद, कलेक्टर द्वारा गठित एक समिति प्राप्त आवेदनों की जांच करेगी, और पिंजरों का आवंटन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। यह सुनिश्चित करता है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और पात्र उम्मीदवारों को एक निष्पक्ष अवसर मिले। योजना के संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए, इच्छुक पक्ष संबंधित कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।