नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद की हालिया रिपोर्ट ‘Agriculture in Meeting Aspirations of Rising India’ (अक्टूबर 2025 में जारी) के अनुसार, भारत के कृषि क्षेत्र ने 2015-16 से 2024-25 तक के दशक में कभी भी नकारात्मक वृद्धि नहीं देखी। यह उपलब्धि खासतौर पर...
नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद की हालिया रिपोर्ट ‘Agriculture in Meeting Aspirations of Rising India’ (अक्टूबर 2025 में जारी) के अनुसार, भारत के कृषि क्षेत्र ने 2015-16 से 2024-25 तक के दशक में कभी भी नकारात्मक वृद्धि नहीं देखी। यह उपलब्धि खासतौर पर तब महत्वपूर्ण है जब कोविड-19 महामारी ने गैर-कृषि क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया, लेकिन कृषि ने मजबूती दिखाई।
भारत की कृषि वृद्धि: चीन से आगे
रिपोर्ट बताती है कि 2015 से 2024 तक भारत की कृषि वृद्धि दर 4.42 प्रतिशत रही, जो चीन की 4.10 प्रतिशत से ज्यादा है। यह अवधि विश्व के प्रमुख कृषि देशों में सबसे तेज वृद्धि वाली रही। FAO (संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन) के आंकड़ों के मुताबिक, 2006-2015 में भारत और विश्व कृषि की औसत वृद्धि 3 प्रतिशत थी। लेकिन अगले दशक (2015-2024) में विश्व की वृद्धि धीमी पड़ गई, जबकि भारत ने इसे 4.42 प्रतिशत तक बढ़ाया।इससे पहले 2015-16 से 2024-25 तक कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की सकल मूल्य वर्धन (GVA) में औसत वार्षिक वृद्धि 4.45 प्रतिशत रही, जो 1950-51 के बाद किसी भी दशक में सबसे ऊंची है।
किसानों और उत्पादकों की आय में जबरदस्त उछाल
2014-15 से 2023-24 तक कृषि उत्पादकों की आय सालाना 10.11 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो विनिर्माण और समग्र अर्थव्यवस्था से ज्यादा है।
- किसानों की आय पिछले दस सालों में 126 प्रतिशत बढ़ी।
- उत्पादकों की आय 2015-16 से 2022-23 तक 108 प्रतिशत बढ़ी।
यह आंकड़े दिखाते हैं कि कृषि अब सिर्फ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का मजबूत इंजन बन चुका है।
विकसित भारत @2047 में कृषि की अहम भूमिका

प्रो. रमेश चंद के अनुसार, ‘विकसित भारत @2047’ का सपना दो मुख्य स्तंभों पर टिका है: प्रति व्यक्ति आय को विकसित देशों के स्तर तक ले जाना समावेशी विकास यानी ‘सबका विकास’ कृषि क्षेत्र इसमें केंद्रीय भूमिका निभाएगा क्योंकि यह राष्ट्रीय आय में 19.73 प्रतिशत योगदान देता है और कुल कार्यबल का 46 प्रतिशत हिस्सा इसी से जुड़ा है।2014-15 से 2024-25 की अवधि भारत के कृषि इतिहास की सबसे मजबूत वृद्धि वाली अवधि रही है। इस दौरान कृषि मांग आधारित रही और उच्च मूल्य वाली फसलों तथा संबद्ध क्षेत्रों (जैसे डेयरी, मत्स्य, पशुपालन) की ओर विविधीकरण हुआ।
चुनौतियों के बावजूद मजबूती और स्थिरता
कोविड के दौरान भी कृषि ने स्थिरता दिखाई। जलवायु परिवर्तन और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच यह क्षेत्र लचीला साबित हुआ। साथ ही, इसमें महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है, जो सामाजिक-आर्थिक महत्व को और मजबूत करती है।
सरकारी योजनाओं का सकारात्मक प्रभावरिपोर्ट में कई सरकारी पहलों के अच्छे नतीजे भी सामने आए हैं
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का कवरेज 2018-19 में 3.4 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 4.1 करोड़ किसानों तक पहुंचा।
- कृषि वित्तपोषण उत्पादन का 29.4 प्रतिशत (2013-14) से बढ़कर 41.7 प्रतिशत (2023-24) हो गया।
- e-NAM ने मध्य 2025 तक 1,522 मंडियों को एकीकृत किया।
उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
- दूध उत्पादन 2014-15 में 146 मिलियन टन से बढ़कर 2023-24 में 239 मिलियन टन से अधिक हो गया। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है।
- फल और सब्जियों का उत्पादन 2013-14 में 280.7 मिलियन टन से बढ़कर 2023-24 में 367.72 मिलियन टन पहुंचा।
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक भी है।
व्यापार की स्थिति में सुधार
2008-09 से 2020-21 तक कृषि के Terms of Trade में 41.3 प्रतिशत अंकों का सुधार हुआ। 2011-12 से 2024-25 तक थोक कृषि मूल्य सूचकांक (WPI) लगभग दोगुना हुआ, और वास्तविक रूप से सालाना 2.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।यह रिपोर्ट बताती है कि पिछले दशक में भारतीय कृषि ने न सिर्फ स्थिरता दिखाई, बल्कि तेज वृद्धि, बढ़ती आय और समावेशी विकास का रास्ता भी अपनाया है। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में कृषि का यह मजबूत प्रदर्शन बहुत बड़ा योगदान देगा।(स्रोत: नीति आयोग सदस्य प्रो. रमेश चंद की रिपोर्ट और संबंधित आंकड़े, जनवरी 2026 तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर)