सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस में ‘अंधभक्त’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर किसी नेता या राजनीतिक पार्टी के प्रति बिना सवाल किए समर्थन करने वाले व्यक्ति के लिए किया जाता है। लेकिन अभिनेत्री इशा कोप्पिकर ने हाल ही में इस शब्द को एक अलग अर्थ देते हुए खुद को ‘प्राउड अंधभक्त’ बताया।

सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस में ‘अंधभक्त’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर किसी नेता या राजनीतिक पार्टी के प्रति बिना सवाल किए समर्थन करने वाले व्यक्ति के लिए किया जाता है। लेकिन अभिनेत्री इशा कोप्पिकर ने हाल ही में इस शब्द को एक अलग अर्थ देते हुए खुद को ‘प्राउड अंधभक्त’ बताया।
इशा के मुताबिक, उनकी ‘भक्ति’ किसी राजनीतिक पार्टी के लिए नहीं, बल्कि भारत और देश के प्रति उनके प्यार के लिए है। उनके बयान के बाद अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी उनका समर्थन किया और इशा का वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया।
इशा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि अगर देश से प्यार करना और भारत को आगे बढ़ते देखना ‘अंधभक्ति’ है, तो वह खुद को अंधभक्त कहे जाने में गर्व महसूस करेंगी।
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी भक्ति किसी राजनीतिक दल के प्रति नहीं है।
इशा ने कहा कि देश से प्यार करने का मतलब यह नहीं है कि सरकार के हर फैसले से सहमत होना जरूरी है। उनके मुताबिक, कोई व्यक्ति देशभक्त होते हुए भी सरकार के फैसलों पर सवाल उठा सकता है और उनकी आलोचना कर सकता है।
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कंगना रनौत ने इशा का वीडियो अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया। उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “Wow!! Well explained as for me.”
कंगना ने इशा की बात को अपने जीवन के अनुभवों से भी जोड़ा। उन्होंने बताया कि उन्हें जब भी कुछ गलत लगा, उन्होंने उसके खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की और इसे अपनी देशभक्ति का हिस्सा माना।
कंगना ने अपने स्कूल के दिनों का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने एक ऐसे शिक्षक के खिलाफ आवाज उठाई थी, जो असेंबली के दौरान बच्चों को डंडे से मारते थे।
उन्होंने 26/11 मुंबई आतंकी हमले और निर्भया मामले के बाद भी अपनी प्रतिक्रिया और विरोध का जिक्र किया।
कंगना ने कहा कि वह अपने देश और देश के लोगों से प्यार करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह उन लोगों की सराहना करने में सक्षम हैं, जिनसे वह मिलती हैं।
इशा के वीडियो का मुख्य संदेश ‘नेशन फर्स्ट’ यानी देश को सबसे ऊपर रखने का था।
उन्होंने कहा कि लोगों को सिर्फ यह नहीं सोचना चाहिए कि देश ने उनके लिए क्या किया, बल्कि यह भी सोचना चाहिए कि वे देश के लिए क्या योगदान दे सकते हैं।
इशा ने यह भी कहा कि भारत की तरक्की का समर्थन करने का मतलब यह नहीं है कि सरकार से सवाल पूछने का अधिकार खत्म हो जाए।
सोशल मीडिया पर ‘अंधभक्त’ शब्द आमतौर पर किसी नेता या पार्टी के प्रति कथित अंध समर्थन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इशा ने इसी शब्द को अपने तरीके से इस्तेमाल करते हुए इसे देश के प्रति अटूट प्रेम और देशभक्ति से जोड़ दिया।
उनका कहना है कि देश से प्यार और राजनीतिक पार्टी का समर्थन दो अलग-अलग चीजें हैं। व्यक्ति देशभक्त हो सकता है और साथ ही सरकार के किसी फैसले से असहमत भी हो सकता है।
कंगना रनौत के समर्थन के बाद इशा का यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।