आखिर क्यों आसमान से बरस रही है कयामत, अमेरिका से लेकर भारत तक में दिख रहा है असर 

पिछली एक सदी में मानव ने प्रकृति के साथ जितनी मनमानी की है। उसका असर अब दुनिया भर के मौसम में दिखना शुरू हो गया है। अमेरिका से लेकर भारत तक जलवायु में हो रहे बड़े बदलावों को साफ तौर पर देखा जा रहा है और इसका नकारात्मक प्रभाव संपूर्ण मानव समाज पर पड़ रहा है। कुछ जगहों पर अतिवृष्टि के कारण लोगों को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ रही है। वहीं कुछ जगहों पर भीषण गर्मी के कारण लोग पानी की बूंद बूंद को तरस गए हैं। 

आखिर क्यों आसमान से बरस रही है कयामत, अमेरिका से लेकर भारत तक में दिख रहा है असर 
पिछली एक सदी में मानव ने प्रकृति के साथ जितनी मनमानी की है। उसका असर अब दुनिया भर के मौसम में दिखना शुरू हो गया है। अमेरिका से लेकर भारत तक जलवायु में हो रहे बड़े बदलावों को साफ तौर पर देखा जा रहा है और इसका नकारात्मक प्रभाव संपूर्ण मानव समाज पर पड़ रहा है। कुछ जगहों पर अतिवृष्टि के कारण लोगों को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ रही है। वहीं कुछ जगहों पर भीषण गर्मी के कारण लोग पानी की बूंद बूंद को तरस गए हैं। 

इतना ही नहीं फसलों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। बदले हुए मौसम के कारण किसानों को भी फसल उगाने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। साथ ही अब तो आए दिन सुनने को मिल रहा है कि किसानों की खड़ी फसल को तेज बारिश ने बर्बाद कर दिया।

अमेरिका में बारिश के कारण आपातकाल : 
बताया जा रहा है कि ट्राॅपिकल स्टार्म (उष्णकटिबंधीय तूफान) इडा के कारण अमेरिका में इतनी बारिश हुई कि न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी में आपातकाल लगाना पड़ गया है। बारिश के कारण आपातकाल शायद इस तरह की घटना पहले किसी ने भी नहीं सुनी होगी। बताया जा रहा है कि अमेरिका के 400 सालों के इतिहास में इससे ज्यादा बारिश कभी नहीं हुई।

तेज बारिश के कारण कई लोगों को असमय ही काल के गाल में जाना पड़ गया है। लेकिन कई लोगों के घर अब भी बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। लोगों की आजीविका पूरी तरह से नष्ट हो गई है।

लू के चलते बिहार में लगाई गई थी धारा 144 :  
ये तो बात हुई अमेरिका की, लेकिन इसी तरह दो साल पहले बिहार के कुछ जिलों में भयंकर झुलसाने वाली लू के कारण धारा 144 लगाना पड़ गई थी। गर्मी इतनी ज्यादा थी कि लोगों को घर से बाहर निकलने से पहले 10 बार सोचना पड़ रहा था और जो लोग घर से बाहर निकल रहे थे। वे जान अपनी हथेली पर रहकर निकल रहे थे।

इसी साल जून के महीने में कनाडा में एक जगह पर तापमान पचास डिग्री रिकार्ड किया जा चुका है। इतना ही नहीं पड़ोसी मुल्क चीन में भी जुलाई के महीने में एक शहर में चौबीस घंटे में उतनी बारिश दर्ज हुई, जितनी वहां पूरे साल में बरसती है।

क्लाइमेट चेंज से क्लाइमेट किल तक का सफर :  
अभी कुछ ही सालों पहले की तो बात है। मौसम में हो रहे इन बदलावों को जलवायु परिवर्तन यानि क्लाईमेट चेंज का नाम दिया गया था। बाद में इसे जलवायु संकट यानि क्लाईमेट क्राइसिस की संज्ञा दी गई। उसके बाद इसे क्लाईमेट एमरजेंसी (जलवायु आपातकाल) कहा गया, लेकिन अंतत: अब इसे जलवायु हत्या या क्लाईमेट किल कहा जा रहा है। शायद अब वो दिन भी दूर नहीं जब इसे किलर क्लाईमेट ही पुकारा जाने लगेगा।

क्योंकि मौसम में हो रहे इन बदलावों से साफ जाहिर है कि दुनिया भर में मौसम अब हत्यारा बना चुका है। यही कारण है कि कुछ दशकों पहले तक जिसे मौसम मस्ताना या सुहाना मौसम जैसे उपनाम दिए जाते थे। अब उस मौसम को हत्यारा माना जा रहा है। 

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