Vehicle Ownership Transfer: एक Vehicle खरीदते वक़्त उस गाड़ी की ओनरशिप हमें मिल जाती है। फिर भविष्य में यदि हम उस गाड़ी को किसी को बेच दे तो गाड़ी तो बिक जाती है लेकिन उसकी ओनरशिप हमारे पास ही रह जाती है। जिससे उस गाड़ी के साथ हमेशा के लिए आपका नाम जुड़ जाता...

फिर यदि कभी भी भविष्य में कभी भी उस गाड़ी का चालान कटता है तो उसका जुर्माना सीधा आपके खाते में ही जाएगा, क्योकि आप उस गाड़ी के ओनर है। तो यदि आपने भी अपनी गाड़ी बेचने के बाद Vehicle Ownership Transfer नहीं की है तो आज ही करे।
जानिए कैसे कर सकते है आप Vehicle Ownership Transfer और क्या होगी इसकी प्रक्रिया ?
credit: google[/caption]
आपको ऊपर दी हुई तीनों स्तिथियो में अलग अलग फॉर्म भरना होगा जैसे -
गाड़ी की बिक्री की स्तिथि में: यदि आपने गाड़ी बेचीं है और ओनरशिप ट्रांसफर कर रहे है तो आपको दोनों पार्टियों को फॉर्म 29 भरकर RTO ऑफिस में जमा करना होगा। इसके अलावा यदि एक ही राज्य में रहने वाले व्यक्ति को गाड़ी बेचीं है तो आपको फॉर्म 30 और फॉर्म 1 भरना होगा। ये फॉर्म 14 दिन के अंदर भरकर RTO ऑफिस में जमा करना होगा।
फॉर्म 1 के साथ आपको कई दस्तावेज जैसे टैक्स सर्टिफिकेट, गाड़ी के रजिस्ट्रेशन का सर्टिफिकेट,फोटो, एज प्रूफ, एड्रेस प्रूफ, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, पैन कार्ड, गाड़ी के इंश्योरेंस के डॉक्यूमेंट्स और गाड़ी के चेसिस और इंजन की डिटेल्स आदि देने होंगे। ये तीनो फॉर्म 1 , 29 और 30 Vehicle Ownership Transfer करने के लिए होते है।
यदि गाड़ी के मालिक की मृत्यु हो जाये: इस स्तिथि में आपको फॉर्म 31 भरना होगा। फॉर्म 31 में गाड़ी के मालिक के वारिस के पास Vehicle Ownership Transfer करने का एप्लीकेशन है। ये फॉर्म 3 महीने के अंदर RTO ऑफिस में जमा करना होता है।
Also read: यदि आप भी है वाहन चालक तो आज ही करवाए अपना Vehicle Insurance, जानिए इससे जुड़ी जानकारी
गाड़ी की नीलामी: इस स्तिथि में फॉर्म 32 भरकर RTO ऑफिस में जमा करना होता है। फॉर्म 32 में गाड़ी खरीदने वाले को Vehicle Ownership Transfer देने का एप्लीकेशन होता है।