Braj Ki Holi: होली का त्यौहार कहने को तो 8 मार्च को है लेकिन ब्रजवासियो के लिए होली का त्यौहार एक दिन का नही है। जी हाँ, Braj Ki Holi का शुभारंभ हो चुका है। रंग भरनी के इस पावन अवसर पर पूरे देश से करीब 5 लाख लोग दार्शन के लिए पहुंचे वृंदावन। श्रद्धालुओ...
Braj Ki Holi: होली का त्यौहार कहने को तो 8 मार्च को है लेकिन ब्रजवासियो के लिए होली का त्यौहार एक दिन का नही है। जी हाँ, Braj Ki Holi का शुभारंभ हो चुका है। रंग भरनी के इस पावन अवसर पर पूरे देश से करीब 5 लाख लोग दार्शन के लिए पहुंचे वृंदावन।
श्रद्धालुओ को देख 8:45 पे ही खोल दिए गए पट
श्रद्धालुओ की ऐसी भीड़ देख मंदिर के पुजारी गोस्वामी द्वारा सुबह 8:45 पे ही ठाकुर जी के पट खोल दिए गए थे। पट खुलते ठाकुर जी के नाम के जयकारे लगना शुरू हो गए। श्रद्धालुओ की भीड़ ऐसी की पैर रखने की जगह नहीं थी।
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पुलिस और सुरक्षाकर्मियों द्वारा भीड़ को सम्भाल पाना बहुत मुश्किल हो गया। बताया जा रहा हैं कि 5 लाख से अधिक लोगों की भीड़ Braj Ki Holi खेलने सुबह और शाम दोनों समय दिखाई दी।
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सभी भक्त ठाकुर जी की एक झलक पाने के लिए आतुर नजर आ रहे थे। सभी बांके बिहारी के रंग में रंगे हुए थे। हालाकि इतनी भयंकर भीड़ के बावजूद किसी भी व्यक्ती को कोई हानि नहीं पहुंची।
बांके बिहारी के रंगे में रंगे ब्रजवासी, खेली फूलों की होली
ब्रज की इस रंग भरनी एकादशी मे माहौल ऐसा छाया की मानो स्वयं ठाकुर भक्तों के साथ होली खेलने उतरे हो। टेसू के फ़ूलों और केसर वाले रंगों को सभी भक्त जनों पर डाला गया।
मंदिर का पूरा प्रांगण फूलों और रंगों से ढक चुका था। चंदन, चोवा और रंग बिरंगे गुलाल के साथ ब्रजवासियों और श्रद्धालुओ ने Braj Ki Holi का आनंद लिया।
बांके बिहारी ने श्वेत पोशाक धारण कर, दिए दर्शन: Braj Ki Holi
वृंदावन की इस रंग भरनी एकादशी के अवसर पर ठाकुर जी को श्वेत वस्त्र पहनाए गए। ठाकुर जी पर स्वर्ण पिचकारी के साथ सुगंधित केसर वाले फ़ूलों की वर्षा की गई।
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उसके बाद सभी भक्तों के ऊपर रंगे बिरंगे और सुगंधित फूल और गुलाल डालते हुए। होली का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर चारों तरफ बांके बिहारी के जयकारे सुनने मिले।
साथ एक अलग ही सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ। मानो स्वयं बांके बिहारी अपने एक एक भक्त के साथ होली खेल रहे हो।
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