भारत की प्रमुख ज्वेलरी और गोल्ड रिफाइनिंग कंपनी Rajesh Exports Ltd के शेयरों में गुरुवार को भारी गिरावट देखने को मिली। कंपनी के शेयर 5% के लोअर सर्किट के साथ ₹103.92 पर पहुंच गए। यह गिरावट उस समय आई जब SEBI ने कंपनी और इसके प्रमोटर राजेश मेहता को प्रतिभूति बाजार से अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया। SEBI की यह कार्रवाई कंपनी के वित्तीय खुलासों में कथित अनियमितताओं की जांच के बाद सामने आई है।

SEBI ने क्यों की कार्रवाई?

Rajesh Exports Share Price

SEBI के अंतरिम आदेश के अनुसार, Rajesh Exports के वित्तीय आंकड़ों में बड़े पैमाने पर विसंगतियों की आशंका जताई गई है। नियामक संस्था का दावा है कि पिछले पांच वित्तीय वर्षों के दौरान कंपनी द्वारा रिपोर्ट किए गए राजस्व आंकड़ों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जांच की शुरुआत एक शेयरधारक द्वारा की गई शिकायत के बाद हुई थी, जिसमें कंपनी के वित्तीय खुलासों पर संदेह व्यक्त किया गया था।

Rajesh Exports: जांच में क्या सामने आया?

अक्टूबर 2024 में SEBI ने मामले की जांच के लिए एक जांच अधिकारी नियुक्त किया था। बाद में फॉरेंसिक ऑडिट के लिए BDO को भी शामिल किया गया। SEBI के अनुसार, Rajesh Exports की कुल समेकित (Consolidated) आय का 97% से 99% हिस्सा विदेशी सहायक कंपनियों से दिखाया गया था। इनमें कंपनी की स्विट्जरलैंड स्थित रिफाइनिंग यूनिट Valcambi सबसे प्रमुख है। हालांकि, नियामक का कहना है कि Valcambi द्वारा रिपोर्ट किए गए राजस्व और समूह के समेकित वित्तीय विवरणों में दर्शाए गए आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर दिखाई दिया।

फॉरेंसिक ऑडिट में आईं चुनौतियां

SEBI ने अपने आदेश में कहा है कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इन कारणों से फॉरेंसिक ऑडिट को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

  • प्रमुख ग्राहकों और विक्रेताओं के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए।
  • कुछ महत्वपूर्ण सहायक कंपनियों के वित्तीय विवरण साझा नहीं किए गए।
  • दस्तावेजों में असंगतियां पाई गईं।
  • जांच प्रक्रिया के दौरान अपेक्षित सहयोग नहीं मिला।

कंपनी की वित्तीय स्थिति कैसी है?

वित्त वर्ष 2025-26 के वित्तीय आंकड़ों के अनुसार कंपनी पर अल्पकालिक उधारी (Short-Term Borrowings) लगभग ₹1,016 करोड़ थी।

इसके अलावा:

  • ट्रेड पेएबल्स: ₹22,000 करोड़ से अधिक
  • नकद एवं नकद समकक्ष (Cash & Cash Equivalents): लगभग ₹2,615 करोड़

इन आंकड़ों के बीच SEBI की कार्रवाई ने निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

शेयर में क्यों आया लोअर सर्किट?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि किसी सूचीबद्ध कंपनी पर नियामक कार्रवाई निवेशकों के भरोसे को प्रभावित करती है। SEBI के आदेश के बाद निवेशकों ने तेजी से बिकवाली की, जिसके चलते Rajesh Exports के शेयर 5% लोअर सर्किट पर पहुंच गए।

SEBI का आदेश फिलहाल अंतरिम है। कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद नियामक उपलब्ध साक्ष्यों और जवाबों के आधार पर अंतिम निर्णय लेगा। निवेशकों की नजर अब कंपनी की प्रतिक्रिया और SEBI की अगली कार्रवाई पर बनी हुई है।

FAQs

Rajesh Exports के शेयर में गिरावट क्यों आई?

SEBI द्वारा कंपनी और उसके प्रमोटर पर अंतरिम प्रतिबंध लगाए जाने के बाद शेयर में 5% लोअर सर्किट लगा।

SEBI ने क्या आरोप लगाए हैं?

SEBI ने कंपनी के वित्तीय खुलासों और राजस्व आंकड़ों में कथित विसंगतियों को लेकर सवाल उठाए हैं।

क्या Rajesh Exports पर अंतिम कार्रवाई हो गई है?

नहीं। यह एक अंतरिम आदेश है और कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।

कंपनी की वित्तीय स्थिति क्या है?

FY26 के अनुसार कंपनी पर लगभग ₹1,016 करोड़ की अल्पकालिक उधारी और ₹22,000 करोड़ से अधिक ट्रेड पेएबल्स हैं।

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