मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान में होने वाले युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। इसका असर अब धीरे-धीरे भारत में भी पहुंच रहा है। और अब इसकी आंच 8th pay commission पर भी पहुँचती हुई दिखाई दे रही है।
जी हां, कर्मचारियों के मन में अब डर उठने लगा है की अर्थव्यवस्था के इस प्रकार डांवाडोल होने की वजह से कहीं 8th pay commission में देरी न हो जाए?
तेल की कीमतों में उछाल आ रहा है, महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, सरकार पर आर्थिक बोझ का असर साफ दिखाई दे रहा है और यही सभी कारण केंद्रीय कर्मचारियों की चिंता को और गहरा बना रहे हैं।
क्योंकि लंबे समय से लटके हुए 8 वें वेतन आयोग पर फिर से देरी की तलवार लटक रही है! ऐसे में सवाल यह उठता है क्या इस बार भी सैलरी बढ़ोतरी का सपना टल जाएगा?
8th pay commission को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
दरअसल हाल ही में ईरान से जुड़े युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। रिपोर्ट की माने तो युद्ध की वजह से तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। डॉलर मजबूत हो रहा है और रुपया धीरे-धीरे कमजोर पड़ता जा रहा है। भारत में भी महंगाई बढ़ती जा रही है।
सरकार पर जब भी खर्च का बोझ बढ़ता है तो सरकार बड़े वित्तीय फैसले टाल देती है। ऐसे में सूत्रों की माने तो पूरी आशंका दिखाई दे रही है कि सरकार 8 वें वेतन आयोग को इस बार भी टाल देगी। और यही कारण है कि सरकारी कर्मचारियों में फिलहाल असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
8 वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों की उम्मीदें
हालांकि 8th pay commission को लेकर कर्मचारियों को भी काफी सारी उम्मीदें हैं। लगातार कर्मचारी 8 वें वेतन आयोग के अंतर्गत फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने, बेसिक पे बढ़ाने, महंगाई भत्ते बढ़ाने की बात कर रहे हैं।
पहले से ही वेतन आयोग को 8th pay commission गठित करने में समय लग रहा है। 1 वर्ष देरी पहले ही हो चुकी है और अब महंगाई की मार और आर्थिक दबाव को देखते हुए यदि इस बार भी 9 वां वेतन आयोग टाला गया तो कर्मचारी हताश हो जाएंगे।
जहां कर्मचारी न्यूनतम वेतन 18,000 से 69000 करने की मांग कर रहे हैं। वहीं फिटमेंट फैक्टर में भी सुधार और पेंशन सुधार की मांग प्रस्तावित है। परंतु बढ़ती हुई महंगाई और वैश्विक खलबली को देखते हुए यह सब कुछ अब नामुमकिन सा लग रहा है।
क्या कहना है एक्सपर्ट का?
एक्सपर्ट की माने तो 8th pay commission का गठन पूरी तरह से आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि वैश्विक संकट लंबा चलता है, तेल की कीमत यूं ही बढ़ती हैं, महंगाई की मार राजकोषीय घाटे को बढ़ाती है तो वर्ष 2026-27 में भी 8 वें वेतन आयोग की टाइमलाइन प्रभावित होगी।
हालांकि सरकार ने अभी तक किसी प्रकार की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। लेकिन हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा अपनाए हुए रूप को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि अभी कुछ दिन और केंद्रीय कर्मचारियों को अपने सपनों की बलि देनी होगी।
एक ओर जहां युद्ध की स्थिति टलने का नाम नहीं ले रही, वहीं दूसरी ओर ग्लोबल इकॉनमी में इसका असर साफ दिखने लगा है। जहां पेंशन का मुद्दा दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है, वही रिटायरमेंट सिक्योरिटी भी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। इसी बीच 8 वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों की चिंता कम नही हो रही।
ऐसे में फिलहाल सूत्र इसी तरह इशारा कर रहे हैं कि आने वाले कुछ समय तक 8th pay commission पर कोई फैसला नहीं होगा। हालांकि सरकार ने फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन कुछ दिनों के भीतर शायद सीधी साफ हो जाए।

















