बजट 2026 रियल एस्टेट इंडिया: एक समय था भारत में घर खरीदना सुरक्षा और स्थिरता की पहचान माना जाता था, लेकिन आज यही सुरक्षा और स्थिरता सवालों के घेरे में आ चुकी है। क्योंकि आज के समय में कई महानगरों में करोड़ों रुपए के लग्जरी फ्लैट्स और प्रीमियम विला धड़ल्ले से बिक रहे हैं लेकिन किफायती आवास बाजार से गायब होते चले जा रहे हैं। दिन-ब-दिन जमीन की कीमतें बढ़ती जा रही हैं। घर निर्माण की लागत में भी वृद्धि हो रही है। होम लोन की ब्याज दर आसमान छू रही है और EMI चुकाना मध्यम वर्ग के बस की बात नहीं रही। इसके उलट अमीर खरीदार के लिए घर खरीदना केवल जरूरत नहीं बल्कि इन्वेस्टमेंट का हिस्सा बन गया है।
इतनी सारी परेशानियों की वजह से 2026 में सभी लोगों की नजर रियल एस्टेट पर टिकी हुई है। क्या 2026 का बजट रियल एस्टेट के इस असंतुलन को समाप्त कर पाएगा? क्या लग्जरी घरों की बिक्री को कंट्रोल कर आम नागरिकों के सपनों को पूरा किया जाएगा? क्या सरकार की PM आवास स्कीम को दोबारा जिंदा कर पाएगी? क्या सरकार होम लोन पर छूट देगी और किफायती आवास की परिभाषा बदलेगी? क्या आम नागरिक को घर बनाने की गेरेन्टी मिलेगी?
क्या है अफॉर्डेबल हाउसिंग बनाम लग्जरी होम्स?
पिछले कुछ समय से लग्जरी घरों की मांगों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। दो वर्गों में इनकम ग्रुप बंट चुका है ,एक है अमीर और दूसरा है मध्यवर्गीय। अमीर लोग अब घर पारिवारिक संरक्षण के लिए नहीं बल्कि इन्वेस्टमेंट के नजरिए से घर खरीद रहे हैं। हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (HNI), नॉन रेजिडेंट इंडियन(NRI) लगातार प्रीमियम और लग्जरी प्रॉपर्टी में निवेश कर रहे हैं। जिसकी वजह से प्रॉपर्टी बिल्डर भी बड़े और लग्जरी घर तैयार करने के पीछे पड़े हुए हैं। 2024 के आंकड़े को ही देखा जाए तो साफ पता चलता है कि इस दौरान लग्जरी घरों की बनावट और बिक्री को काफी वृद्धि मिली है। यहां तक की लग्जरी कारों की बिक्री में 170% उछाल आया है।
वहीं इसके उलट किफायती आवास की कॉन्सेप्ट बिल्कुल खत्म होती नजर आ रही है। किफायती आवास जिसकी कीमत आमतौर पर 50 लाख से कम होती थी आज इस सेक्टर को सबसे बड़े संकट का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि 50 लाख से कम के घर आज मिल नहीं रहे। यहां तक की बिल्डर 50 लाख से कम वाले घर बना ही नहीं रहे। मार्केट में उनकी मांग तो भरपूर है लेकिन उपलब्धि नहीं करवाई जा रही। जिसकी वजह से इस सेगमेंट में घरों की पेशकश में लगातार 17% से 18% तक गिरावट देखी जा रही है जिसकी वजह से मध्यम वर्गीय परिवार अब एक ठीक-ठाक आवाज खरीदने से वंचित होता जा रहा है।
क्या है इतने बड़े असंतुलन की वजह ?
लग्जरी हाउस और किफायती हाउस के बीच यह जो बड़ी सी खाई तैयार हो रही है इसका मुख्य कारण है सस्ते घर बनाने की लागत में बढ़ोतरी, क्योंकि डेवलपर्स के लिए यह कॉन्सेप्ट लाभहीन हो चुका है। इसीलिए डेवलपर्स किफायती आवास की बजाय लग्जरी घर बनाना पसंद कर रहे हैं। वहीं सरकारी परिभाषा में भी अब किफायती आवास की परिभाषा बदलती जा रही है। ब्याज और EMI का दबाव इतना ज्यादा बढ़ गया है कि लोग घर खरीदने की योजना को टालते जा रहे हैं। यहां तक की कुछ लोग किराए के घर में ही रहना पसंद कर रहे हैं तो कुछ भविष्य के प्रोजेक्ट में इन्वेस्टमेंट कर बैठ जाते हैं।
2026-27 के बजट से क्या उम्मीद है
- 2026-27 के बजट से इस बार मध्यम वर्ग के लोगों को ढेर सारी उम्मीद है। सबसे खास उम्मीद है कि इस बार किफायती आवास को लेकर कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।
- इस बार सरकार नीतिगत हस्तक्षेप करेगी जिससे किफायती और लग्जरी सेगमेंट के बीच तालमेल बना रहेगा।
- फाइनेंस एक्सपर्ट की माने तो वर्ष 2026-27 में सरकार को किफायती घरों की कीमत की कैप को बढ़ाना होगा जिससे ज्यादा से ज्यादा प्रोजेक्ट इस श्रेणी में आएंगे।
- इसके अलावा सरकार को होम लोन ब्याज पर टैक्स कटौती सीमा को भी बढ़ना होगा, निर्माण लागत घटानी होगी, खासकर निर्माण लागत में लगने वाली वस्तुओं पर टैक्स छूट देनी होगी।
- रेंटल हाउसिंग के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करना होगा ताकि घर मालिकों को किराए पर घर देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
- शहरों में रहने लायक घरों की संख्या और PM आवास योजना के नीतिगत ढांचे को बेहतर बनाना होगा।
- सब्सिडी की राशि को बढ़ाते हुए योजना की पहुंच सभी वर्गों तक सुनिश्चित करनी होगी।
बजट 2026-27 रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है। इस दौरान यदि सरकार ने सही कदम उठाए तो किफायती आवास को पुनर्जीवित किया जा सकता है। परंतु यदि सरकार इस बार भी चूक गई तो आने वाले समय में किफायती आवास और लग्जरी हाउस के बीच खाई और बढ़ जाएगी। शायद किफायती घरों का कॉन्सेप्ट समाप्त ही हो जाए, क्योंकि हो सकता है समय के साथ आम आदमी घर खरीदने का सपना देखना छोड़ दे और इस सेक्टर को केवल मुनाफा कमाने वाला सेक्टर बना दिया जाए। यदि ऐसा होता है तो निश्चित ही अर्थव्यवस्था के लिए यह बहुत बुरी खबर होगी। जहां मध्य और निचले वर्ग के खरीदार पीछे हो जाएंगे और रियल एस्टेट सेक्टर में घर केवल निवेश का हिस्सा बनकर रह जाएंगे।
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