Self-reliant Farmers: मध्य-पूर्व में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय रसोई तक भी पहुँचता दिख रहा है। देश के कई हिस्सों में LPG गैस की कमी और गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें अब आम बात हो गई हैं। ऐसे हालात में, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का एक किसान परिवार एक मिसाल बनकर उभरा है। वे अपना खाना पूरी तरह से बायोगैस (गोबर गैस) का इस्तेमाल करके बनाते हैं बिना LPG पर निर्भर हुए और किसी भी संकट से पूरी तरह बेफिक्र रहते हैं।
बायोगैस से पूरे परिवार का खाना बनता है
सहारनपुर ज़िला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर भलस्वा गाँव में रहने वाले किसान, रकम सिंह सैनी ने अपने घर पर एक बायोगैस प्लांट लगाया है। लगभग नौ साल पहले MGNREGA योजना के तहत बनाया गया यह प्लांट, अब उनके पूरे परिवार के तीनों समय के खाने के लिए ईंधन मुहैया कराता है। यह प्लांट गोबर और पानी के मिश्रण को प्रोसेस करके गैस बनाता है। यह ईंधन रोज़ाना 6 से 8 घंटे तक चूल्हा जलाए रखता है, जिससे 8 से 10 लोगों के परिवार के लिए खाना बनाना आसान हो जाता है।
बायोगैस का बचा हुआ हिस्सा खाद में बदल जाता है
किसान रकम सिंह बताते हैं कि दिन के तीनों समय का खाना बनाने के लिए रोज़ाना लगभग 12 से 15 किलोग्राम गोबर ही काफी होता है। इस प्लांट की एक अनोखी बात यह है कि गैस बनने के बाद जो बचा हुआ हिस्सा (रेसिड्यू) रह जाता है, वह जैविक खाद में बदल जाता है, जिसका इस्तेमाल फिर खेतों में किया जाता है। इससे न सिर्फ खेती की लागत कम होती है, बल्कि रासायनिक खादों की ज़रूरत भी घट जाती है। वह बताते हैं कि इस प्लांट के रखरखाव पर लगभग न के बराबर खर्च आता है, और इसे साल में सिर्फ एक बार साफ करने की ज़रूरत पड़ती है।

LPG सिलेंडरों पर निर्भरता कम हुई
वहीं, परिवार की गृहणी गीता सैनी बताती हैं कि पहले उन्हें खाना बनाने के लिए लकड़ी और पुआल का इस्तेमाल करना पड़ता था, जिससे काफी धुआँ निकलता था और उन्हें बहुत परेशानी होती थी। लेकिन अब, गोबर गैस से तेज़ आँच मिलती है जिससे खाना जल्दी बन जाता है, और साथ ही रसोई भी साफ-सुथरी और धुएँ से मुक्त रहती है। वह बताती हैं कि अब उनके घर में एक LPG सिलेंडर 4 से 5 महीने तक चलता है, जिसका मतलब है कि उन्हें साल भर में सिर्फ 2 से 3 सिलेंडरों की ही ज़रूरत पड़ती है।
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किसानों से बायोगैस प्लांट लगाने की अपील
राकम सिंह सैनी ने कहा कि ऐसे समय में जब पूरी दुनिया गैस संकट से जूझ रही है, गाँव-स्तर के संसाधनों के माध्यम से आत्मनिर्भरता हासिल करना ही इसका सबसे बेहतरीन समाधान है। उन्होंने अन्य किसानों से भी बायोगैस प्लांट लगाने की अपील की है, जिससे न केवल उनके अपने खर्चों में कमी आएगी, बल्कि वे पर्यावरण संरक्षण में भी अपना योगदान दे पाएँगे। उनका मानना है कि यदि हर गाँव इस दिशा में कदम उठाता है, तो देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

















