Mango farmers: छत्तीसगढ़ दो युवा किसानों ने वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर 11 एकड़ ज़मीन पर आम की 15 अलग-अलग किस्में लगाकर एक नई मिसाल कायम की है। ये युवा किसान इस समय अपनी आम की फसल से सीधे तौर पर ₹5 लाख का मुनाफ़ा कमा रहे हैं। इसके अलावा आम के बाग के अंदर ही हल्दी और जिमीकंद जैसी दूसरी फसलें उगाकर उन्होंने अपनी कमाई को कई गुना बढ़ा लिया है।
बागवानी विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की मदद से उन्होंने सरकारी योजनाओं का फ़ायदा उठाया है। वैज्ञानिक खेती करके उन्होंने दूसरे किसानों को भी पारंपरिक फसलों को छोड़कर बागवानी की आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
15 किस्मों के 1,500 आम के पौधों से बढ़ी कमाई
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाज़ार ज़िले के भाटापारा ब्लॉक में स्थित भरतपुर इलाके के दो युवा किसानों ने आधुनिक और वैज्ञानिक खेती के तरीकों को अपनाकर ज़बरदस्त सफलता हासिल की है। भरतपुर के किसान प्रदीप अग्रवाल और प्रत्योत अग्रवाल ने मिलकर 11 एकड़ ज़मीन पर आम की 15 से ज़्यादा उन्नत किस्मों के पौधे लगाए। इस पहल से न केवल उनका उत्पादन बढ़ा है, बल्कि लाखों रुपये का मुनाफ़ा भी हो रहा है।
किसान प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने भोपाल से आम की अलग-अलग किस्मों के लगभग 1,500 पौधे खरीदे और उन्हें अपने खेत में लगाया। आज उनके खेत में पैदा होने वाले आमों को न सिर्फ़ छत्तीसगढ़ में, बल्कि दूसरे राज्यों में भी पहचान मिल रही है और वे अपनी एक अलग पहचान बना रहे हैं।

हल्दी, अदरक और जिमीकंद की खेती से पुरस्कार भी मिला
युवा किसान प्रदीप ने बताया कि वे आम के पेड़ों के बीच खाली ज़मीन का इस्तेमाल हल्दी, अदरक और जिमीकंद जैसी फसलें उगाने के लिए कर रहे हैं। इन अंतरा-फसलों (intercrops) से होने वाली कमाई से उनके खेती के खर्च जिसमें मज़दूरी, सिंचाई का खर्च और अन्य ऊपरी खर्च शामिल हैं, वह आसानी से पूरे हो जाते हैं। आम की फसल से होने वाली पूरी कमाई ही उनका सीधा और शुद्ध मुनाफ़ा है।
किसान प्रत्योत अग्रवाल ने बताया कि भाटापारा में स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (Agricultural Science Centre) और बागवानी विभाग के मार्गदर्शन में वे लगातार वैज्ञानिक तरीकों से खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर, किसान पारंपरिक खेती के तरीकों के साथ-साथ आधुनिक खेती की तकनीकों को अपनाकर ज़्यादा मुनाफ़ा कमा सकते हैं। फल उत्पादन के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों के लिए उन्हें राज्य स्तर पर सम्मानित भी किया गया है।
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बहु-फसली खेती और सही प्रबंधन से ज़्यादा कमाई
कृषि विज्ञान केंद्र भाटापारा के मुख्य कृषि वैज्ञानिक डॉ. अंगद राजपूत ने कहा कि बेहतर प्रबंधन और कीटनाशकों के नियमित इस्तेमाल की बदौलत फलों की बागवानी किसानों के लिए अतिरिक्त आय का एक बेहतरीन ज़रिया बनकर उभर रही है। उन्होंने बताया कि भरतपुर के किसान बहु-फसली खेती के ज़रिए अच्छी-खासी कमाई कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रदीप और प्रत्योत अग्रवाल न सिर्फ़ खुद आर्थिक लाभ उठा रहे हैं, बल्कि खेती में आधुनिक तकनीकों को अपनाने के बारे में दूसरे किसानों के बीच जागरूकता फैलाने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।


















