महू || भारत में पशुपालन किसानों की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन समय-समय पर होने वाली बीमारियाँ पशुधन के लिए गंभीर खतरा बन जाती हैं। हाल के वर्षों में लम्पी स्किन डिज़ीज़ तेजी से फैलने वाली एक प्रमुख वायरल बीमारी के रूप में सामने आई है, जो गाय-भैंसों को प्रभावित करती है। इससे दूध उत्पादन घटता है, पशु कमजोर हो जाते हैं और कभी-कभी मृत्यु भी हो सकती है।

लम्पी स्किन डिज़ीज़ क्या है?

लम्पी स्किन डिज़ीज़

लम्पी स्किन डिज़ीज़ एक वायरल रोग है जो कैप्रिपॉक्सवायरस  के कारण होता है। कैप्रिपॉक्सवायरस  -एक प्रकार का डीएनए वायरस है जो मुख्य रूप से गायों, भैंसों, और बकरियों को प्रभावित करता है यह बीमारी मुख्यतः मच्छरों, मक्खियों, किलनियों और जूँ जैसे कीटों के माध्यम से फैलती है और एक संक्रमित पशु से एक दूसरे में तेजी से पहुंचती है।

लम्पी रोग के मुख्य लक्षण

  • शरीर पर कठोर, दर्दयुक्त गाँठें
  • तेज बुखार
  • आँख और नाक से पानी बहना
  • भूख कम लगना
  • दूध उत्पादन में गिरावट

पशुओं के शरीर पर कठोर गाँठें होना जो की काफी दर्दयुक्त होते है। पशुओं को तेज़ बुखार आना जिससे की कभी कभी उनके आँख व नाक से लगातार पानी बहना। भूख कम लगना भी मुख्य लक्षण में आते है।  इसकी वजह से दूध उत्पादन भी तेजी से काम हो जाता है। यही मुख्य लक्षणों पशुओं में पाए जाते है

लम्पी रोग से बचाव और रोकथाम के उपाय

लम्पी स्किन डिज़ीज़

1.टीकाकरण

लम्पी रोग से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा है “टीकाकरण”।  यह सबसे ज़्यादा विश्वसनीय कदम है। एलएसडीवी या गोटपॉक्स आधारित वैक्सीन प्रभावी मानी जाती है। दो बातों को हमेशा ध्यान रखे : पहली बात -आप अपने गांव या क्षेत्र के पशु चिकित्सक को समय समय पर टीकाकरण करवाना अनिवार्य है जिससे की इस रोग से बचाव किया जा सके। दूसरी बात – सभी गाय, भैंसों का हमेशा एक रिकॉर्ड बनाये रखें और नए पशुओं को लाने से पहले टीकाकरण कराएं जिससे की पुराने पशु और नए पशुओं की दूरी बानी रहे और इन रोग से बचा जा सके।

2.कीट नियंत्रण–

लम्पी रोग से बचने के लिए दूसरा महत्वपूर्ण सुरक्षा है कीट नियंत्रण क्योंकि यह वायरस अधिकतर कीटों द्वारा फैलता है, इसलिए: हमेशा एक आदत बनाये जैसे पशुशाला में मच्छर, मक्खी, जूँ, किलनी रोकथाम के लिए नियमित रूप से स्प्रे करे। अगर आपको किसी भी जगह गोबर की ढेरी, गंदा पानी या कचरा दिखता है तो उसे जमा न होने दें एवं उसे तुरंत साफ़ किया जाये।  पशुओं पर साइपरमेथ्रिन या डेल्टामेथ्रिन जैसे स्प्रे (डॉक्टर की सलाह से) उपयोग करें।

3.बीमार पशु का तुरंत अलगाव (आइसोलेशन)-

एक बात का ज़रूर ध्यान रखे की संक्रमित पशु को कभी भी स्वस्थ पशुओं को एक साथ न बांधे, एवं संपर्क में न लाया जाये।  ऐसे पशुओं को  अलग बाड़े में ही रखें। उन पशुओं के लिए चारा, पानी की बाल्टी, और रस्सी आदि भी अलग रखें का प्रयास करे। यह उपाए करने से रोग का फैलाव काफी कम हो जाता है और पशुओं की दूरी बानी रहती है।

4.पशुशाला में स्वच्छता बनाए रखना

पशुशाला में स्वच्छता बनाए रखने के लिए रोज़ सफाई करना अनिवार्य है, इसको आदत में डालने के लिए एक निर्धारित समय तय कर लीजिये।  यदि आपका फ़र्श वाला फ्लोर है, तो उसकी सफाई ब्लीचिंग पाउडर या फिनाइल से हमेशा कर। पशुशाला में जितने भी पशु है उनको सूखा, हवादार और साफ वातावरण देने का प्रयास करे।  एक स्वच्छ पशुशाला कई बीमारियों को आने से पहले ही रोक देती है।

5.मजबूत प्रतिरोधक क्षमता विकसित करना

लम्पी स्किन डिज़ीज़: जैसी बीमारी से लड़ने में पशु की ताकत सबसे महत्वपूर्ण है।

  • खनिज मिश्रण
  • विटामिन ए,डी, इ पूरक
  • साफ पानी और अच्छी गुणवत्ता का चारा

लम्पी स्किन डिज़ीज़ का उपचार

यदि आपको यह लक्षण दिखाई देती है तो तुरंत नीचे दिए गए उपचार शुरू करें

  • पशु चिकित्सक से संपर्क कर दर्दनाशक, एंटीसेप्टिक मलहम और आवश्यक दवाइयाँ दें।
  • घावों को साफ रखें और मक्खियों से बचाएँ।
  • पशु को पानी और तरल आहार पर्याप्त मात्रा में दें।