Farmers’ Income: मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गेहूं खरीद के नियमों में अहम बदलाव किए हैं। अब सरकार उस गेहूं को भी खरीदेगी, जिसकी चमक 50 प्रतिशत तक कम हो गई हो। यह फैसला उन किसानों के लिए बहुत ज़रूरी राहत लेकर आया है, जिनकी फसलें खराब मौसम या पानी की कमी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। राज्य सरकार का उद्देश्य साफ है।
किसानों को नुकसान से बचाना और उनकी आय में स्थिरता सुनिश्चित करना। इसके अलावा, सरकार ने कृषि कल्याण के उद्देश्य से कई और फैसले भी लिए हैं, ताकि किसानों की कमाई को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।
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गेहूं खरीद के नियमों में बड़े बदलाव
मध्य प्रदेश सरकार ने गेहूं खरीद के नियमों में ढील देकर किसानों के हित में एक अहम कदम उठाया है। पहले, किसानों को कम चमक या थोड़ी कम गुणवत्ता वाला गेहूं बेचने में मुश्किल होती थी, लेकिन नई नीति के तहत, अब 50 प्रतिशत तक कम प्राकृतिक चमक वाला गेहूं भी खरीदा जाएगा। इसके अलावा, अविकसित दानों की स्वीकार्य सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है।
इसी तरह, खराब दानों की स्वीकार्य सीमा को भी बढ़ा दिया गया है। इस नीतिगत बदलाव से उन किसानों को सीधा फायदा होगा जिनकी फसलें सूखे, अत्यधिक गर्मी या सिंचाई की कमी के कारण खराब हो गई थीं। नतीजतन, किसानों के लिए अपनी उपज बेचना आसान हो जाएगा और बाज़ार भाव से कम कीमत मिलने का जोखिम काफी हद तक कम हो जाएगा।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए मुआवज़ा और बोनस
सरकार ने अपनी राहत के उपायों को सिर्फ गेहूं खरीद तक ही सीमित नहीं रखा है; उसने किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कई और बड़े फैसले भी लिए हैं। हाल ही में, राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए ज़मीन अधिग्रहण के बदले किसानों को बाज़ार मूल्य से चार गुना तक मुआवज़ा देने की घोषणा की है।
इसके अलावा, दालों और तिलहनों की खेती को बढ़ावा देने के लिए उड़द की फसल पर एक विशेष बोनस की भी घोषणा की गई है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के अलावा, किसानों को प्रति क्विंटल ₹600 का बोनस भी मिलेगा। इससे किसानों को अपना ध्यान दालों और तिलहनों की खेती की ओर मोड़ने का प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।

किफायती बिजली और सोलर पंपों के माध्यम से आत्मनिर्भर किसान
मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित किया है। इस अवधि के दौरान, किसानों को मात्र ₹5 के नाममात्र शुल्क पर कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए एक योजना लागू की गई है। इसके अतिरिक्त, ‘कृषक मित्र’ योजना के तहत, सोलर पंप 90% सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य किसानों को बिजली के पारंपरिक स्रोतों पर उनकी निर्भरता से मुक्त करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए सशक्त बनाना है। सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है कि किसानों को सिंचाई के लिए बिजली रात के बजाय दिन के समय पर्याप्त मात्रा में मिले, जिससे खेती के कार्य अधिक आसान और सुरक्षित बन सकें।
गेहूं उपार्जन में किसानों को बड़ी राहत
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गेहूं उपार्जन में अब % तक चमक विहीन गेहूं की भी खरीदी की जाएगी। साथ ही पानी की कमी के कारण कम विकसित दानों की सीमा % से बढ़ाकर % कर दी गई है और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा में भी वृद्धि की गई है।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव https://t.co/dWLtHfAulj
— Agriculture Department, MP (@minmpkrishi) April 27, 2026
डेयरी क्षेत्र के माध्यम से ग्रामीण आय में वृद्धि
कृषि के साथ-साथ, सरकार डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने पर भी विशेष जोर दे रही है। राज्य को ‘दुग्ध राजधानी’ में बदलने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ, 1,752 नई दुग्ध सहकारी समितियों की स्थापना की गई है। वर्तमान में, राज्य प्रतिदिन 10 लाख किलोग्राम से अधिक दूध का संग्रह करता है।
इस क्षेत्र से जुड़े किसानों को अब तक कुल ₹1,600 करोड़ से अधिक का भुगतान प्राप्त हो चुका है। इसके अलावा, दूध की कीमतों में ₹8 से ₹10 प्रति किलोग्राम की वृद्धि हुई है, जिससे किसानों की आय को सीधा लाभ पहुंचा है। साथ ही, डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत, डेयरी इकाइयां स्थापित करने के लिए ₹10 लाख तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जिससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
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उर्वरकों और संसाधनों की आसान उपलब्धता
सरकार ने उर्वरकों की उपलब्धता में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। पूरे राज्य में यूरिया का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया गया है और नई तकनीकों को अपनाकर वितरण प्रणाली को सुव्यवस्थित किया गया है। किसान अब अपनी सुविधानुसार उर्वरक प्राप्त कर सकते हैं और उन्हें लंबी कतारों में खड़े होकर इंतजार नहीं करना पड़ता। इन उपायों से खेती की लागत कम करने और किसानों का कीमती समय बचाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्णय स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। गेहूँ की खरीद में राहत, बोनस योजनाएँ, सोलर पंप और डेयरी जैसी पहलें।

















