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Agri News: बुंदेलखंड में रिटायर्ड इंजीनियर ने कर दिखाया कमाल, बंजर जमीन से कमा रहे लाखों

Bundelkhand Kisan News

Agri News : बुंदेलखंड में हमेशा से पलायन का दौर चला है। यहां की सूखी जमीन पर खेती करना किसानों के लिए हमेशा से एक चुनौती रही है, क्योंकि बारिश के मौसम को छोड़कर सिंचाई के लिए पानी कम होता है। यही कारणा है कि यहां रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। अब यहाँ सिंचाई विभाग से रिटायर होने के बाद बी.के. तिवारी ने अपनी दूर की सोच और मेहनत से खेती को फायदे का धंधा बना दिया है।

कृषि विविधीकरण और नेचुरल खेती अपनाकर रिटायर्ड सिंचाई इंजीनियर तिवारी ने न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ाई है, बल्कि इलाके के किसानों के लिए प्रेरणा भी बन गए हैं। अब उनके मॉडल की तारीफ पूरे जिले में हो रही है।

 

बंजर जमीन से उपजाऊ खेत तक का सफर

झांसी में ग्वालियर रोड पर अंबाबाई इलाके में 2010 में 7 एकड़ जमीन खरीदने के बाद बी.के. तिवारी ने सबसे पहले जमीन को खेती लायक बनाने का काम किया। पत्थर हटाकर और मिट्टी को बेहतर बनाकर, उन्होंने यहां बागवानी के लिए एक मजबूत नींव रखी।

आज, उनके खेत में 3,000 वर्ग मीटर एरिया में एक स्टेट-ऑफ-द-आर्ट पॉलीहाउस है, जहां शतावरी, काली हल्दी, अदरक और टमाटर जैसी फसलें उगाई जा रही हैं। एक ड्रैगन फ्रूट नर्सरी भी बनाई गई है।

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पॉलीहाउस से लाखों में इनकम

तिवारी कहते हैं कि उन्हें सिर्फ इस 3,000 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस से सालाना 4 से 5 लाख रुपये की इनकम होती है। कंट्रोल्ड माहौल में मल्टी-क्रॉप प्रोडक्शन ने उनकी इनकम को स्टेबल और फायदेमंद बना दिया है।

 

नेचुरल खेती और देसी गायों का सपोर्ट

उनका पूरा खेत नेचुरल खेती पर आधारित है। वह 18 देसी गाय पालते हैं और गाय के गोबर और मूत्र से बनी ऑर्गेनिक खाद और पेस्टीसाइड का इस्तेमाल करते हैं। इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ी है और केमिकल खाद पर निर्भरता खत्म हुई है।

 

सोलर ड्रायर से बढ़ता है वैल्यू एडिशन

सरकारी मदद से, उन्होंने 2.2 मिलियन रुपये की लागत से एक सोलर ड्रायर लगाया, जिस पर 40% सब्सिडी मिली। यह ड्रायर एक बार में 3 क्विंटल से ज़्यादा फल और सब्ज़ियाँ सुखा सकता है। इससे पैदावार की कीमत बढ़ती है और बर्बादी कम होती है।

 

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पानी बचाने की एक अनोखी पहल

झाँसी इलाके में पानी की कमी को देखते हुए, उन्होंने अपने खेत में दो तालाब खोदे हैं। इन तालाबों में बारिश का पानी इकट्ठा होता है, जिससे न सिर्फ़ सिंचाई होती है बल्कि ग्राउंडवॉटर लेवल भी रिचार्ज होता है।

 

किसानों और स्टूडेंट्स के लिए एक लर्निंग सेंटर

बी.के. तिवारी का मॉडल इतना सफल रहा है कि अब लोकल किसान, खेती से जुड़े अधिकारी और स्टूडेंट्स के ग्रुप यहाँ पढ़ने आते हैं। वे सेहतमंद अनाज, फल और सब्ज़ियाँ उगा रहे हैं जिनकी बाज़ार में अच्छी कीमत मिलती है।

 

झाँसी का यह मॉडल एक बन गया है प्रेरणा

बी.के. तिवारी का इंदिरा फार्म उत्तर प्रदेश में खेती में अलग-अलग तरह के काम और नेचुरल खेती का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। यह साबित करता है कि सरकारी योजनाओं का सही इस्तेमाल और कड़ी मेहनत के साथ साइंटिफिक तरीके से खेती छोटे लेवल पर भी फ़ायदेमंद बिज़नेस बन सकती है।

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