Custom Hiring Center राज्य सरकार के द्वारा किसानो की कृषि के छेत्र में चलाई है मुहीम है। राज्य सरकार की तरफ से क्रय-विक्रय सहकारी समितियों (KVS), ग्राम सेवा सहकारी समिति (GSS) और कृषक उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से कस्टम हायरिंग केन्द्र बनाए जा रहे हैं।
Custom Hiring Center से कोई भी लघु एवं सीमांत किसान कम रेट पर कृषि के लिए किराये से कृषि उपकरण या यंत्र ले सकते है। किसानो को उन्नत उत्पादन के लिए खाद, बीज, सिंचाई, और मेहनत के साथ साथ उसमें काम में लिए कृषि उपकरणों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इस कृषि उपकरणों की सहायता से उत्पादन एवं उत्पादकता दोनों में बढ़ोतरी होती है। परन्तु अधिकतर किसानो की आर्थिक स्थिति के चलते ज्यादातर किसान महंगे उपकरणों के कारण खरीद नहीं पते है जिसकी वजह से उन्हें बाजार से महंगे दामों में किराये से लेना पड़ता है।
किसानो की इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार की तरफ से क्रय-विक्रय सहकारी समितियों (KVS), ग्राम सेवा सहकारी समिति (GSS) और कृषक उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से Custom Hiring Center बनाए है।

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Custom Hiring Center में उपलब्ध है ये मशीनें
Custom Hiring Center के अंतर्गत किसनो को खेती के लिए ज़मीन तैयार करने से लेकर, बुवाई, कटाई और थ्रेसिंग के लिए आवश्यक उपकरण व मशीने मिलते हैं। इसके आलावा कटाई के बाद के लिए आवश्यक एवं कुछ ज़रूरी उपकरणों के सेट भी उबलब्ध होते हैं जो इस प्रकार है:-
- ट्रैक्टर (Tractor)
- ट्रॉली (Trolley)
- बीज सह उर्वरक ड्रिल (Seed um Fertilizer Drill)
- डिस्क हैरो (Disc Harrow)
- मोल्ड बोर्ड हल (Mould Board Plough)
- पावर स्प्रेयर (Power Sprayer)
- हैंड स्प्रेयर (Hand Sprayer)
- ड्रम सीडर (Drum Seeder)
- धान बायलर (Rice Boiler)
- धान ट्रांसप्लांटर (Paddy Transplanter)
- रोटावेटर (Rotavator)
- टाइन कल्टीवेटर (Tine Cultivator)

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सरकार द्वारा इन सभी उपकरणों को रखने के लिए उचित जगह की पहचान की जाती है, ताकि वहां से आसानी से लोगों तक इसे पहुंचाया जा सके। साथ ही, इलेक्ट्रिक फीटिंग, रनिंग वॉटर, ट्रैक्टर व कृषि उपकरणों को रखने के लिए गैराज और शटर की सुविधा उपलब्ध है।
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कृषि उपकरणों की खरीद के लिए सहायता

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Custom Hiring Center को कृषि विभाग आठ लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देता है। ये सहायता सहकारिता विभाग सब्सिडी के माध्यम से कृषि यंत्रों की खरीद के लिए प्रदान करता है। इस सहायता से केंद्रों पर ट्रैक्टर, थ्रेशर, रोटावेटर, रीपर, सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल जैसे उन्नत कृषि यंत्रों को खरीदा जाता है।
जिसे किसान इन केन्द्रों से अपनी जरूरत के वक्त कृषि यंत्रों को किराये पर लेते हैं तथा खेती में इस्तेमाल करते हैं। यह सुविधा किसानों का आर्थिक भार कम कर देती है जिससे उनका काम कम किराये में हो जाता है।
अच्छे और नई तकनीक से बने कृषि यंत्रों के उपयोग से फसल के उत्पादन में बढ़ोतरी होती है साथ ही उन्हें नै तकनीकों को काम में लेकर कृषि करना आसान हो जाता है जिससे किसानों की आय बढ़ती है। देखा जाये तो इससे कृषको को फसलों के उत्पादन में काफी मदद मिलती है और जिससे सहकारी समिति भी मजबूत होती है।
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