Agriculture

Unique Mango: मप्र के इस जिले में उग रहा दुनिया का सबसे महंगा आम, Z+’ लेवल की सुरक्षा, 1 किलो खरीदने में छूट जाएंगे पसीने

Unique Mango

Unique Mango: मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक ऐसा बाग है, जहाँ आम की फसल को ‘Z+’ लेवल की सुरक्षा दी जा रही है। बिल्कुल किसी VVIP की तरह। एक किलो आम की कीमत में एक कार या स्पोर्ट्स बाइक खरीदी जा सकती है, वहीं 1 किलो आम खरीदने में आम लोगों का पसीना छूट जाएगा। हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे महंगे और दुर्लभ आम ‘मियाज़ाकी’ की।

कीमत ₹3 लाख प्रति किलो

जबलपुर से सिर्फ़ 25 किलोमीटर दूर हिनाउता गाँव के एक बाग में उगाए जाने वाले इस आम की अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमत लगभग ₹3 लाख प्रति किलो है। इसकी बहुत ज़्यादा कीमत की वजह से, सोशल मीडिया पर लोग मज़ाक में कहते हैं कि “इसका स्वाद चखने के लिए तो शायद बैंक से लोन भी लेना पड़ जाए।”

 

‘मियाज़ाकी’ को इतना खास क्या बनाता है?

मूल रूप से जापान का एक पारंपरिक फल माना जाने वाला यह आम अपने अनोखे रंग और स्वाद के लिए मशहूर है।
इसका रंग गहरा लाल और बैंगनी होता है। इसके आकार और रंग की वजह से इसे ‘सूरज का अंडा’ (Egg of the Sun) भी कहा जाता है।
एक फल का वज़न लगभग 350 ग्राम होता है।
यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और इसमें आम की दूसरी किस्मों के मुकाबले चीनी की मात्रा काफी ज़्यादा होती है।

 

सुरक्षा इतनी कड़ी कि परिंदा भी पर न मार सके

हिनाउता गाँव में श्री महाकालेश्वर हाइब्रिड फ़ार्महाउस’ में सुरक्षा के इंतज़ाम देखकर कोई भी हैरान रह जाएगा। आम के पेड़ों की सुरक्षा किलेबंदी की तरह की गई है।

  • सुरक्षा पक्की करने के लिए 17 जर्मन शेफ़र्ड और 3 खूंखार देसी कुत्ते तैनात किए गए हैं।
  • 15 से ज़्यादा हाई-टेक CCTV कैमरे पूरे बाग पर लगातार नज़र रखते हैं।
  • गार्ड्स की एक खास टीम दिन-रात हथियारों और टॉर्च के साथ पूरे इलाके में गश्त करती है।

 

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संकल्प और रानी सिंह की मेहनत की जीत

चार एकड़ में फैले इस जादुई बाग के मालिक संकल्प परिहार और उनकी पत्नी रानी सिंह परिहार हैं। उनके पास आमों का एक ऐसा संग्रह है जिसमें न केवल मियाज़ाकी किस्म शामिल है, बल्कि दुनिया भर की कुछ बेहतरीन किस्में भी मौजूद हैं:

  • अफ़गानिस्तान: नूर जहाँ
  • चीन: आइवरी
  • USA: ब्लैक मैंगो और सेंसेशन
  • मलेशिया: जंबो ग्रीन
    इसके अलावा, यहाँ आम की पारंपरिक किस्में जैसे आम्रपाली, दशहरी और लंगड़ा भी जैविक खाद का इस्तेमाल करके उगाई जाती हैं।

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फलों की ‘सेहत’ के लिए VIP ट्रीटमेंट

इस बाग में रसायनों का इस्तेमाल पूरी तरह से मना है। पौधों को सिर्फ़ जैविक खाद से ही पोषण दिया जाता है। फलों को कीड़ों, तेज़ धूप और पक्षियों से बचाने के लिए उन्हें ‘ग्रो बैग’ और हरे जाल (ग्रीन नेट) से ढक दिया जाता है।
जबलपुर का यह मियाज़ाकी आम अब न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। निर्यात के लिए तैयार यह ‘लग्ज़री फल’ इस बात का सबूत है कि अगर खेती सही तकनीकों और पूरे जुनून के साथ की जाए तो सचमुच इससे सोना उगाया जा सकता है।

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