10 टन प्याज स्टोर करने का साइंटिफिक मॉडल बनाया गया
Kisan Advise: भारत प्याज का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। देश में प्याज प्रोडक्शन में महाराष्ट्र पहले नंबर पर है, जबकि मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर है। खरीफ सीजन में प्याज स्टोर करने की सही सुविधा न होने की वजह से किसानों को भारी नुकसान होता है। ज़्यादा नमी, ठीक से हवा न आने और स्टोर करने के पुराने तरीकों की दिक्कतों की वजह से बड़ी मात्रा में प्याज सड़ जाता है या उन्हें औने-पौने दामों पर बेचना पड़ता है।
बांदा एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर अमित कुमार सिंह ने इस समस्या का एक प्रैक्टिकल सॉल्यूशन निकाला है। उन्होंने एक कम लागत वाला स्टोरेज मॉडल बनाया है जिसे गांव में मिलने वाले सामान का इस्तेमाल करके आसानी से बनाया जा सकता है। इससे किसान घर बैठे बहुत कम खर्च में अपने प्याज को सड़ने से बचा सकेंगे।
मॉडल की खासियत
- लागत सिर्फ़ 25,000 से 40,000 रुपये
- स्टोरेज कैपेसिटी लगभग 10 टन
- 4 से 5 महीने तक सुरक्षित स्टोरेज
- लगातार नैचुरल हवा का आना-जाना
- नमी और फफूंद से बचाव

गांव में लोकल कारीगरों से बनाना मुमकिन
स्ट्रक्चर को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि नीचे और किनारों से हवा का सर्कुलेशन बना रहे, जिससे प्याज में गर्मी और नमी जमा न हो। इसी वजह से प्याज ज़्यादा समय तक खराब नहीं होते।
खरीफ प्याज के लिए यह क्यों ज़रूरी है?
बुंदेलखंड इलाके में खरीफ सीजन में माहौल में नमी ज़्यादा होती है। पुराने स्टोरेज तरीकों से 25–30% तक नुकसान होता है।
अमित कुमार सिंह के मुताबिक, यूनिवर्सिटी खरीफ प्याज की 10 बेहतर वैरायटी पर रिसर्च कर रही है। ये वैरायटी पैदावार में बेहतर हैं, लेकिन ज़्यादा नमी की वजह से इनका सुरक्षित स्टोरेज एक चुनौती बनी हुई है। इसी ज़रूरत को ध्यान में रखकर यह मॉडल बनाया गया था।
किसानों को क्या फ़ायदा होगा
- तुरंत बेचने की मजबूरी खत्म हो जाती है।
- बेहतर बाज़ार कीमतों का इंतज़ार करना मुमकिन है। स्टोरेज से होने वाले नुकसान में काफ़ी कमी।
- एक्स्ट्रा इनकम का मौका।
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छोटे और मीडियम साइज़ के किसानों के लिए एक किफ़ायती सॉल्यूशन
अगर किसान अपनी फ़सलों को 4-5 महीने तक बचाकर रख सकते हैं, तो उन्हें ऑफ़-सीज़न में बेहतर दाम मिल सकते हैं, जिससे इनकम में काफ़ी बढ़ोतरी हो सकती है।
इनकम डबल करने की दिशा में एक असरदार कदम
यह मॉडल बुंदेलखंड जैसे इलाकों में खास तौर पर काम आ सकता है, जहाँ खराब मौसम किसानों के लिए मुश्किलें खड़ी करता है। इन तीन खासियतों – कम लागत, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और साइंटिफिक डिज़ाइन – की वजह से इस टेक्नोलॉजी के हर गाँव तक पहुँचने की संभावना है।
अगर राज्य लेवल पर इसे बड़े पैमाने पर फैलाया जाए, तो खरीफ़ प्याज़ उगाने वाले किसान स्टोरेज से होने वाले नुकसान से काफ़ी हद तक राहत पा सकते हैं और अपनी इनकम को स्टेबल कर सकते हैं।

