Cancer Early Symptoms: भारत में तेजी से बढ़ रहे कैंसर के मामलों ने सबकी नींद उड़ा दी है। भारत में हर साल कैंसर के 15 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। ,ऐसे में भारत पूरी दुनिया में कैंसर के मामले में टॉप 3 देशों में शामिल हो गया है। चीन और अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा कैंसर के मामले भारत में ही सामने आ रहे हैं। खतरनाक बात ये है कि युवाओं में कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। जिसकी शुरुआती पहचान होना मुश्किल हो जाता है।
कैंसर के शुरुआती लक्षण (Cancer Symptoms ) सामान्य बीमारी के जैसे
कैंसर के लक्षण शुरुआती स्टेज में बहुत हल्के और सामान्य बीमारी (Cancer Symptoms) के जैसे होते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर बैठते हैं। कैंसर शरीर के अंदर चुपचाप बढ़ता रहता है और जब इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगते हैं जब तक कई बार कैंसर स्टेज III या IV तक पहुंच चुका होता है। खासतौर से पेट या ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण मरीज को तब तक कुछ नोटिस नहीं होते जब तक बीमारी एडवांस स्टेज में नहीं पहुंच जाती। पेट फूलना, हल्का दर्द या थकान को लोग मामूली बात समझकर छोड़ देते हैं। कैंसर के लक्षणों का देरी से पता चलना भी इसका बड़ा कारण बन रहा है। कैंसर से बचने के लिए इन शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
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सामान्य समझकर कर देते हैं नजरअंदाज लोग
डॉक्टर वैशाली जामरे (डायरेक्टर सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और हेड, ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी, एंड्रोमेडा कैंसर हॉस्पिटल, सोनीपत) ने बताया कि कई बार लोग कैंसर के लक्षणों को तनाव, उम्र बढ़ने, या लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याएं मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

पहला लक्षण- लगातार थकान
कई बार आपने लोगों को कहते सुना होगा कि बढ़ती उम्र की वजह से लगातार थकान, बिना किसी वजह के वजन कम होना और खाने की आदतों में बदलाव आने लगे हैं। लेकिन इन्हें ज्यादा नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है। लंबे समय तक अपच, पेट साफ़ होने की आदतों में बदलाव या रेगुलर पेट फूलना खराब खाने की आदतों या तनाव की वजह से होता है। हालांकि ये लक्षण आम हैं लेकिन इनका लगातार बने रहना ही लोगों को परेशान करता है। ऐसे कई भी लक्षण 2-3 हफ्ते तक रहें तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
दूसरा लक्षण- बार-बार खांसी आना
कई बार कुछ चेतावनी वाले संकेत आते जाते रहते हैं। जिसमें कुछ लक्षण कैंसर की ओर इशारा करते हैं।मल में कभी-कभी खून आता है या खांसी जो ठीक हो जाती है लेकिन फिर वापस आ जाती है। आवाज़ जो बार-बार खराब लगती है। ये लक्षण कई बार अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा होते रहना सही नहीं है। इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
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तीसरा लक्षण- हिस्से में खतरनाक गांठ का बनना
बिना दर्द के शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ बनना खतरनाक हो सकता है। दर्द वाली गांठ को कैंसर से जोड़कर नहीं देखा जाता, लेकिन ब्रेस्ट, गर्दन या टेस्टिकल्स में बिना दर्द वाली गांठ हो रही है तो ये खतरनाक हो सकती है। बिना कारण के सूजन आना और ब्लीडिंग होना भी खतरनाक है। इसलिए ये सोचना गलत है कि दर्द नहीं है तो कैंसर नहीं हो सकता।
कहां आ रही है कमी?
- प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर स्क्रीनिंग की कमजोर व्यवस्था
- कैंसर से जुड़े विश्वसनीय और एकीकृत डाटा की कमी
- इलाज और जांच में क्षेत्रीय असमानताएं
- गरीब और वंचित वर्ग तक डायग्नोस्टिक सुविधाओं की सीमित पहुंच
- देर से पहचान के कारण इलाज की लागत और मृत्यु दर में वृद्धि
ज्यादातर कैंसर मरीज 50 से कम उम्र के
फोर्टिस मेमोरियल हॉस्पिटल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी में सीनियर डायरेक्टर डॉ. नितेश रोहतगी कहते हैं कि एक समय तक भारत में 70 से ऊपर वालों में कैंसर देखने को मिलता था लेकिन अब ज्यादातर कैंसर मरीज 50 से कम उम्र के हैं, यह बेहद चिंताजनक है। भारत में कैंसर मामलों की बात करें तो महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर तेजी से फैल रहे हैं। पुरुषों में लंग और ओरल कैंसर तो मौजूद हैं ही, लेकिन प्रोस्टेट कैंसर, किडनी और कोलन कैंसर के मरीज बीते दिनों में ज्यादा देखने को मिल रहे हैं।

