Agriculture

Milk production : तो बहने लगेगी दूध की धारा, अगर पशुपालकों की ये समस्या हो जाए हल

Milk production Cost

लागत कम करने वाले चारे पर हो रिसर्च, कम खपट और ज्यादा दूध

Milk production Cost : मप्र से लेकर केन्द्र सरकार तक दुग्ध उत्पादन को लगातार बढ़ावा दे रही है, ताकि पशुपालक अधिक से अधिक मुनाफा कमा सकें। बता दें कि दूध उत्पादन में देश नंबर वन होने के बावजूद भी पशुपालक दूध से अच्छा मुनाफा नहीं कमा पा रहे हैं। इसकी बड़ी वजह ये है कि पशुपालन में दूध पर आने वाली लागत का 70 फीसद खर्च पशुपालक चारे पर कर रहे हैं। सबसे ज्यादा मुश्किल बात ये है कि दूध की लागत (Milk production Cost) को कम करना पशुपालक के हाथ में नहीं है। चारे में पशुपालक के पास विकल्प नहीं है कि वो चारे की लागत को कम कर सकें।

हर साल दूध उत्पादन 5 से 6 फीसद की दर से बढ़ रहा है, लेकिन उत्पादन के मुकाबले पशुपालकों का मुनाफा नहीं बढ़ रहा है। डेयरी एक्सपर्ट की मानें तो इसकी सबसे बड़ी वजह है लागत।आज दूध उत्पादन की लागत इतनी बढ़ गई है कि पशुपालकों के लिए लागत के मुकाबले मुनाफा कमाना मुश्किल हो गया है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि दूध उत्पादन की लागत को घटाया जाए।

 

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…तो पशुपालक का बढ़ेगा मुनाफा

इसके दो बड़े फायदे होंगे, पहला पशुपालक का मुनाफा बढ़ेगा और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट की कीमत कम होगी तो बाजार में डिमांड बढ़ेगी और हम एक्सपोर्ट भी कर सकेंगे। पशुपालन में अगर लागत की बात करें तो सबसे ज्यादा चारे पर आती है। इसलिए आज पशुपालन सेक्टर को ऐसे चारे की जरूरत है जो सस्ता भी हो और जिसे गाय-भैंस कम खाए और ज्यादा दूध उत्पादन करें।

Milk production

Milk production

देश में बढ़ जाएगा 10 करोड़ टन दूध

इंडियन डेयरी एसोसिएशन के पूर्व प्रेसिडेंट और अमूल के पूर्व एमडी डॉ. आरएस सोढ़ी का कहना है कि का कहना है कि मौजूदा वक्त में भारत 24 करोड़ टन दूध का उत्पादन कर रहा है। उम्मीद है कि 2047 तक देश में करीब 63 करोड़ टन दूध का उत्पादन होने लगेगा। जैसा की उम्मीद है तो ऐसा होने पर ये विश्व दूध उत्पादन का 45 फीसद हिस्सा होगा।

अभी ये हिस्सेदारी 25 फीसद है। इतना ही नहीं 63 करोड़ टन उत्पादन होने पर 10 करोड़ टन दूध देश में सरप्लस हो जाएगा, वहीं ये भी उम्मीद है कि 2047 तक विश्व व्यापार का दो तिहाई हिस्सा भारत का होगा, लेकिन दूध उत्पादन बढ़ने के साथ ही हमे उसकी खपत और पशुपालक की लागत संग उसके मुनाफे के बारे में भी सोचना होगा।

 

खपत बढ़ेगी तो कीमत भी बढ़ेगी

हर साल अच्छी दर से दूध उत्पादन बढ़ रहा है तो इसकी खपत का बढ़ना भी जरूरी है। खपत बढ़ेगी तो कीमत बढ़ेगी और रणनीति ये होनी चाहिए कि दूध की कीमतें खाद्य मुद्रास्फीति दर से ज्यादा न बढ़ें, वहीं पशुपालकों के बारे में इस तरफ भी सोचना होगा कि प्रति किलोग्राम चारे में दूध उत्पादन को बढ़ाया जाए। ये सब मुमकिन होगा अच्छी ब्रीडिंग और चारे में सुधार लाकर। आज पशुपालक अपने दूध के दाम ज्यादा और चारे के दाम कम कराना चाहता है, क्योंकि अगर दूध की लागत 100 रुपये लीटर आ रही है तो उस में 70 रुपये तो सभी तरह के चारे और खुराक पर ही खर्च हो जाते हैं।

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डेयरी इंपोर्ट से बदल जाएगी तस्वीर

अमेरिका समेत कई बड़े देश लगातार अपने डेयरी प्रोडक्ट भारत में बेचने के लिए दबाव बना रहे हैं, लेकिन भारत अपने पशुपालक की रक्षा करते हुए डेयरी प्रोडक्ट इंपोर्ट करने से मना कर चुका है। एक तो मामला ये भी है कि वहां पशुओं को मांसाहारी खुराक दी जाती है, वहीं अगर मंजूरी दे दी गई तो इससे देश के डेयरी सेक्टर में अस्थिरता आ जाएगी।

हमारे इंपोर्ट करने से होगा ये कि आज हम 24 करोड टन दूध का उत्पादन कर रहे हैं। अब अगर हमने अपने उत्पादन का 10 फीसद भी इंपोर्ट कर लिया तो वो आंकड़ा होगा 24 टन, जबकि विश्व का कुल दूध कारोबार 100 मीट्रि‍क टन है। ऐसे में हमारे इंपोर्ट करते ही ये आंकड़ा 124 मीट्रिक टन पर पहुंच जाएगा।

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