ट्राइग्लिसराइड और मेमोरी लॉस: अक्सर आपने अपने आसपास लोगों को कहते सुना होगा कि ‘ब्रेन फॉगी लग रहा है’, ‘कुछ समझ नहीं आ रहा’ इत्यादि। इसका मतलब होता है ध्यान और मानसिक स्पष्टता की कमी हो जाना। असल में ब्रेन फॉग कोई बीमारी नहीं होती, बल्कि यह संकेत होता है कि दिमाग में असंतुलन बढ़ रहा है। इसके कई कारण होते हैं जैसे कि तनाव, नींद की कमी, विटामिन की कमी या फिर खराब जीवन शैली। परंतु इसका एक मुख्य कारण होता है ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल बढ़ जाना। Triglycerides का लेवल यदि बढ़ जाए कि यह भी Mental Fogginess बढ़ा देता है।
क्या होता है ट्राइग्लिसराइड और क्या है ट्राइग्लिसराइड और मेमोरी लॉस का कनेक्शन?
ट्राइग्लिसराइड्स हमारे ब्लड में पाया जाने वाला एक प्रकार का फैट होता है। जब हम किसी भी भोजन से ज्यादा कैलोरी कंज्यूम कर लेते हैं तो हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम इसे ट्राइग्लिसराइड्स में बदल देता है और इसे ब्लड में सेव कर देता है। हालांकि ट्राइग्लिसराइड्स ऊर्जा के बेहतरीन स्रोत होते हैं। परंतु रक्त में यदि ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा ज्यादा हो जाए तो यह हार्ट स्ट्रोक का भी खतरा बढ़ा सकते हैं। कई बार यह सोचने समझने की क्षमता पर भी असर डालते हैं। इसी की वजह से ब्रेन फॉगीनेस कमज़ोर यार्दाश्त और फोकस की कमी जैसी परेशानी भी आती है।
ट्राइग्लिसराइड्स और ब्रेन फॉगीनेस का क्या कनेक्शन है?
ट्राइग्लिसराइड्स हमारे रक्त में संचित ऊर्जा होती है। जब हमारे खून में ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा अधिक हो जाती है तो यह हमारे ब्लड सेल्स में फैट और इन्फ्लेमेशन पैदा करते हैं। जिसकी वजह से मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। ब्रेन को काम करने के लिए भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। यदि समय पर ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाया तो ब्रेन फॉगीनेस, याददाश्त की कमी इत्यादि महसूस होता है।
हमारे ब्रेन में हिप्पोकेंपस (hippocampus) एक हिस्सा होता है जो याददाश्त को तेज करता है। यह हिस्सा हमें कुछ नया सीखने के लिए भी मदद करता है। परंतु जब ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा बढ़ जाती है तो हिप्पोकेंपस की कार्य क्षमता भी प्रभावित होती है जिसकी वजह से याददाश्त कमजोर हो जाती है।
ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने की वजह से कौन-कौन सी समस्याएं हो सकती है?
विशेषज्ञों की माने तो जब ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स लेवल बढ़ जाता है तो ब्लड ब्रेन बैरियर में फ्लो प्रवाहित होता है, जिसकी वजह से कॉग्निटिव फंक्शन, फोकस और याददाश्त पर असर पड़ता है। साथ ही ट्राइग्लिसराइड्स अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसे जोखिम बढ़ा देता है। मतलब ट्राइग्लिसराइड मेमोरी लॉस में मुख्य दोषी का काम करता है।
ट्राइग्लिसराइड्स को कैसे नियंत्रित करें?
- ट्राइग्लिसराइड्स को नियंत्रित करने के लिए कम प्रोसेस्ड खाना खाएं, तली भुनी-चीजों से परहेज करें।
- हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, ओमेगा 3 फैटी एसिड वाले खाद्य पदार्थ ज्यादा से ज्यादा खाएं।
- अपने खाने में अलसी, अखरोट, मछली को शामिल करें।
- रोजाना 30 मिनट तक एक्सरसाइज करें, केवल फिजिकल एक्सरसाइज नहीं बल्कि मेंटल एक्टिविटी पर भी ध्यान दें।
- पर्याप्त नींद लेने की पूरी कोशिश करें, कम से कम 7 से 8 घंटे गहरी नींद ले।
- यदि आप पहले से ही डायबीटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल के शिकार है तो डॉक्टर से परामर्श लें और ट्राइग्लिसराइड्स को नियंत्रित करें।
रिसर्च बताती है कि ट्राइग्लिसराइड्स केवल हार्ट हेल्थ से नहीं जुड़ा, बल्कि यह आपके ब्रेन की कार्य क्षमता को भी प्रभावित करता है। क्योंकि बॉडी का संचालन ब्रेन और हार्ट दोनों मिलकर करते हैं। इसलिए ट्राइग्लिसराइड्स को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है। यदि आप भी चाहते हैं कि आपकी याददाश्त तेज रहे और फोकस बना रहे तो बॉडी के ट्राइग्लिसराइड्स लेवल पर नजर बनाए रखें और इसे कंट्रोल में रखें।












