बिहार में भाजपा की ओर से विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और BJP के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। बीजेपी ने गुरुवार को पत्र जारी कर इसकी घोषणा की कि सम्राट चौधरी बिहार बीजेपी के नए प्रदेश अध्यक्ष होंगे।
बता दें कि इसके पहले बिहार में बीजेपी के संजय जायसवाल प्रदेश अध्यक्ष थे। संजय जायसवाल (Sanjay Jaiswal) का कार्यकाल पिछले साल नवंबर में ही समाप्त हो गया था। इसी क्रम में अब बीजेपी ने Samrat Chaudhary को नया बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाया है।
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कुशवाहा समाज से हैं (Samrat Chaudhary)
Samrat Chaudhary साल 2014 में आरजेडी छोड़कर जेडीयू में शामिल हुए थे। पार्टी में शामिल होते ही उन्हें एमएलसी बनाया गया था और फिर उसके बाद मंत्री भी बनाया गया था। साथ ही वह एनडीए सरकार में पंचायती राज मंत्री थे। इसके पहले Samrat Chaudhary आरजेडी और जेडीयू में भी रह चुके हैं। वह कुशवाहा समाज से आते हैं। वहीं, बिहार में कुशवाहा समुदाय की आबादी करीब आठ फीसदी है।
विरासत में मिली राजनीति
Samrat Chaudhary का जन्म 1968 में हुआ। इन्हें विरासत में राजनीति मिली है। इनके पिता शकुनी चौधरी भी छह बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं। Samrat Chaudhary आरजेडी के शासनकाल में 1999 में मंत्री रह चुके हैं।

साथ ही Samrat Chaudhary सबसे कम उम्र में राज्य सरकार में मंत्री बनने की ख्याति प्राप्त है। वर्ष 2000 और 2010 में परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीते थे। इसके अलावा Samrat Chaudhary वर्ष 2018 में बीजेपी में शामिल हुए थे।
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बीजेपी की रणनीति
गौरतलब है कि 2024 में लोकसभा का चुनाव होना है। बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। चुनाव में करीब एक साल का वक्त है लेकिन ऐसा लग रहा है कि धीरे-धीरे तैयारी शुरू कर दी गई है। हालांकि, संजय जायसवाल का कार्यकाल तो पूरा हो चुका था और इसके बाद यह बदलाव हुआ है, लेकिन अब सम्राट चौधरी को 2024 के पहले इस जिम्मेदारी को देकर बीजेपी ने यह बड़ा दांव खेला है।
सम्राट चौधरी बिहार भाजपा के दूसरे ऐसे अध्यक्ष हैं जो राजद में रहकर यहां आए हैं। इससे पहले भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल भी राजद से ही बीजेपी में आए थे। सम्राट चौधरी के तो माता-पिता दोनों राजद के साथ ही रहे। खुद सम्राट चौधरी राबड़ी मंत्रीमंडल में सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे। उनकी उम्र सीमा को लेकर तब बवाल हुआ था।
कुशवाहा वोट बैंक पर नजर
बिहार में सम्राट चौधरी को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे कुशवाहा पॉलिटिक्स है। जिसके इर्द-गिर्द बिहार की राजनीति इनदिनों घूम रही है। बता दें कि जदयू ने एक दिन पहले प्रदेश अध्यक्ष सहित 24 लोगों को अपनी कमिटी में शामिल किया तो उसकी नजर भी इसी वोट बैंक पर थी। भाजपा ने भी प्रदेश की कमान सम्राट के हाथों में सौंपकर इस पर एक और कार्ड खेल दिया है।
- बिहार में यादवों के बाद अगर किसी की सबसे ज्यादा बड़ी वोट बैंक है तो वह कुशवाहा की है। ऐसे में सबकी नजर कुशवाहा वोट बैंक पर टिकी है। राजद के साथ बड़ी संख्या में यादव वोटर हैं ऐसे में कुशवाहा वोटरों पर सभी दाव खेलना चाह रहे हैं।
बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार की सभी सीटों पर 17-17 सीटें भाजपा और जदयू के हिस्से आई थी 6 सीटों पर लोजपा ने चुनाव लड़ा था। इसमें भाजपा और लोजपा अपनी सारी सीटें जीत गई थी। जबकि जदयू किशनगंज की सीट पर हार गई और उसके हिस्से में 16 सीटों पर जीत दर्ज हुई थी।
- ऐसे में भाजपा से अलग होने के बाद अब जदयू की जीती हुई इन 16 सीटों पर भाजपा की नजर है। जिसको ध्यान में रखकर भाजपा ने यह रणनीति तैयार की है।

