मध्य प्रदेश की विधानसभा में अब अमर्यादित शब्दों का उपयोग नहीं हाे सकेगा। इस संबंध में मप्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग का बयान सामने आया है। बयान में सारंग ने कहा है कि मप्र विधानसभा के स्पीकर गिरीश गौतम ने एक अच्छी और सार्थक पहल शुरू की है। विधानसभा जो लोकतंत्र का मंदिर तो है ही, उसके साथ-साथ समाज को एक दिशा देने वाला केंद्र भी है।
साथ ही सारंग ने कहा है कि विधानसभा में यदि उन शब्दावली का उपयोग होगा जो समाज में एक अच्छा संदेश देता है, तो हमें सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेगा। मंत्री सारंग ने इस पहल को स्वागत योग्य बताते हुए कहा कि इससे मध्यप्रदेश की गौरवशाली परंपरा और ऊपर जाएगी।

मार्च में ही शुरू हो गई थी पहल :
हालांकि विधानसभा में अमर्यादित शब्दों का उपयोग रोकने के लिए स्पीकर गिरीश गौतम ने मार्च में ही पहल कर दी थी। स्पीकर ने हिंदी, अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं सहित प्रदेश की स्थानीय बोलचाल की भाषा में जिन अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, उन्हें असंसदीय मानकर सदन की कार्यवाही में इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही थी।
इस दौरान विधान सभा सचिवालय को पूरी जानकारी जुटाकर विधायकों को सूची मुहैया कराने की बात कही गई थी। इस दौरान विधानसभा में विधायकों के लिए प्रशिक्षण का आयोजन करने की बात भी हुई थी। जिसमें सदन के सीनियर नेताओं को विधायकों को संसदीय मर्यादाओं का पाठ पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इस दौरान विधायकों को बताया गया कि विधानसभा के अंदर कौन से शब्द जुमलों का इस्तेमाल ना किया जाए।पप्पू, फेंकू, मंदबुद्धि और झूठा जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी विधानसभा के अंदर नहीं हो सकेगा। इसका ख्याल विधायकों को रखना होगा।
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