
मध्य प्रदेश घूमने का प्लान बना रहे लोगों के लिए एक नई पहल सामने आई है। अब राज्य के ऐतिहासिक स्थलों, मंदिरों, किलों और वन्यजीव पर्यटन स्थलों को देखने का अनुभव पहले से ज्यादा आसान और दिलचस्प बनाने की तैयारी है। इसके लिए मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड और Explurger ने मिलकर एक नई योजना शुरू करने की घोषणा की है।
इस योजना के तहत राज्य के 100 पर्यटन स्थलों पर NiVU AI तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसकी मदद से पर्यटक घूमने के दौरान जगहों के इतिहास, खासियत और उनसे जुड़ी जानकारियां अधिक आसानी से समझ सकेंगे।
9 अक्टूबर 2026 को भोपाल में आयोजित MP Travel Mart 2026 के दौरान इस साझेदारी की घोषणा की गई। इसके लिए दोनों पक्षों के बीच तीन साल का समझौता हुआ है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य पर्यटन को तकनीक से जोड़ना है, ताकि लोग किसी पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी पाने के लिए केवल गाइड या जानकारी वाले बोर्ड पर निर्भर न रहें। AI की मदद से पर्यटकों को जगहों को समझने और उनके बारे में जानने का एक नया तरीका मिल सकता है।
योजना के तहत पहले साल में 30 प्रमुख पर्यटन स्थलों को शामिल करने की तैयारी है। इन स्थलों का चयन Explurger और मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड मिलकर करेंगे। इसके बाद अगले तीन वर्षों में इस पहल को बढ़ाकर राज्य के 100 पर्यटन स्थलों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसमें मंदिर, ऐतिहासिक किले, सांस्कृतिक स्थल और वन्यजीव पर्यटन से जुड़ी जगहें शामिल होंगी।
अक्सर लोग किसी नई जगह पर घूमने तो पहुंच जाते हैं, लेकिन वहां के इतिहास और उससे जुड़ी खास बातों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में AI आधारित सुविधा पर्यटकों को उस जगह को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकती है।
इससे मध्य प्रदेश आने वाले पर्यटकों को अपनी यात्रा की योजना बनाने और घूमने के अनुभव को अधिक जानकारीपूर्ण बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस सुविधा का वास्तविक अनुभव इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे अलग-अलग पर्यटन स्थलों पर किस तरह लागू किया जाता है।
मध्य प्रदेश अपने ऐतिहासिक स्मारकों, धार्मिक स्थलों, जंगलों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। उज्जैन, खजुराहो, सांची, ग्वालियर और कान्हा जैसे पर्यटन स्थलों की वजह से राज्य में घूमने के कई विकल्प मौजूद हैं।
ऐसे में पर्यटन को AI जैसी नई तकनीक से जोड़ना पर्यटकों को आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इससे राज्य के पर्यटन स्थलों की जानकारी अधिक लोगों तक पहुंचाने के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में पर्यटन और तकनीक को एक साथ जोड़ने की यह पहल आने वाले समय में पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। अब देखना होगा कि अगले तीन वर्षों में यह योजना किस तरह आगे बढ़ती है और पर्यटकों को इसका कितना लाभ मिलता है।